भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का संसद के समक्ष अभिभाषण
माननीय सदस्यगण,
1. इस नए संसद भवन में यह मेरा पहला संबोधन है।
आज़ादी के अमृतकाल की शुरुआत में यह भव्य भवन बना है।
यहां एक भारत श्रेष्ठ भारत की महक भी है।
भारत की सभ्यता और संस्कृति की चेतना भी है।
इसमें, हमारी लोकतांत्रिक और संसदीय परंपराओं के सम्मान का प्रण भी है।
साथ ही, 21वीं सदी के नए भारत के लिए, नई परंपराओं के निर्माण का संकल्प भी है।
मुझे पूरा विश्वास है कि इस नए भवन में नीतियों पर सार्थक संवाद होगा।
ऐसी नीतियां जो आज़ादी के अमृतकाल में विकसित भारत का निर्माण करेंगी।
मैं आप सभी को अपनी शुभकामनाएं देती हूं।