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भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का Divine Heart Foundation (India) के समारोह में सम्बोधन

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का Divine Heart Foundation (India) के समारोह में सम्बोधन

उत्तर प्रदेश की अपनी इस यात्रा के दौरान सवेरे मैं बनारस में थी और अभी मैं लखनऊ में हूं। संयोग से ‘बनारस की सुबह’ और ‘अवध की शाम’ की तारीफ में बहुत कुछ लिखा जाता रहा है। आज की शाम, इस लखनऊ शहर में आप सब के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। लखनऊ की तहजीब और नफासत के किस्से बहुत लोकप्रिय हैं। मुझे लखनऊ आना अच्छा लगता है।

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के 45वें दीक्षांत समारोह में सम्बोधन

इस दीक्षांत समारोह में उपाधियां और पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को मैं हार्दिक बधाई देती हूं। विद्यार्थियों की सफलता में योगदान देने वाले आचार्य- गण और अभिभावक-गण को भी मैं बधाई देती हूं।

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का लक्ष्‍मीपत सिंघानिया-आईआईएम लखनऊ राष्‍ट्रीय लीडरशिप पुरस्‍कार प्रदान करने के अवसर पर सम्बोधन

आज के इस कार्यक्रम में भाग लेकर मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है। सबसे पहले मैं सभी पुरस्कार विजेताओं को बहुत-बहुत बधाई देती हूँ। IIM Lucknow और JK organisation के द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में न केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों को सम्मानित किया जा रहा है बल्कि नेतृत्व में नैतिकता और समाज के समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्धता को भी रेखांकित किया जा रहा है।

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का दिव्यांगजन सशक्तीकरण हेतु राष्ट्रीय पुरस्कारों की प्रस्तुति के अवसर पर सम्बोधन

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का दिव्यांगजन सशक्तीकरण हेतु राष्ट्रीय पुरस्कारों की प्रस्तुति के अवसर पर सम्बोधन

आज का यह दिन पूरे विश्व के दिव्यांग-जन के साथ-साथ समस्त विश्व समुदाय के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आज विश्व की कुल आबादी में लगभग 15 प्रतिशत दिव्यांग-जन हैं। उन सब का सशक्तीकरण भारत सहित पूरे विश्व समुदाय के लिए उच्च प्राथमिकता है। इस संदर्भ में यह पुरस्कार समारोह अत्यंत महत्वपूर्ण है। मैं देशवासियों की ओर से आज के सभी पुर

भारत की राष्‍ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के 111वें दीक्षांत समारोह में संबोधन

भारत की राष्‍ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय के 111वें दीक्षांत समारोह में संबोधन

आज आप सब को संबोधित करते हुए मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। इस विश्वविद्यालय के पूर्व दीक्षांत समारोहों की गरिमा बढ़ाने वाले व्यक्तित्व में डॉक्टर एस. राधाकृष्णन, डॉक्टर सी. वी. रमन, श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी, श्री सच्चिदानंद सिन्हा, श्री सी.

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज नागपुर के प्लेटिनम जुबली समारोह में सम्बोधन

भारत की राष्ट्रपति  श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज नागपुर के प्लेटिनम जुबली समारोह में सम्बोधन

इस महत्वपूर्ण अवसर पर आप सब के बीच उपस्थित होकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। यह प्रतिष्ठित संस्थान पिछले 75 वर्षों से healthcare, education और research में अपना बहुमूल्य योगदान दे रहा है। इसके लिए मैं सभी पूर्व और वर्तमान शिक्षकों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों की सराहना करती हूँ। इस अवसर पर, मैं इस कॉलेज की स्थापना में योगदान

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का Armed Forces Medical College, पुणे को President’s Colour प्रदान करने के अवसर पर सम्बोधन

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का Armed Forces Medical College, पुणे को President’s Colour प्रदान करने के अवसर पर सम्बोधन

Armed Forces Medical College को उसके 75 वर्ष पूर्ण होने पर President’s Colour प्रदान करते हुए मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। इस महाविद्यालय ने medical education के उच्चतम स्तर के संस्थान के रूप में प्रतिष्ठा अर्जित की है। राष्ट्र की निरंतर सेवा करने के लिए, मैं इस संस्थान के सभी पूर्व और वर्तमान अधिकारियों,

भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का 'विधिक सहायता तक पहुंच: ग्लोबल साउथ में न्याय तक पहुंच सुलभ करना' विषय पर प्रथम क्षेत्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में संबोधन

भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का 'विधिक सहायता तक पहुंच: ग्लोबल साउथ में न्याय तक पहुंच सुलभ करना' विषय पर प्रथम क्षेत्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में संबोधन

विधिक सहायता तक पहुंच पर पहले क्षेत्रीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए यहां आकर मुझे वास्तव में प्रसन्नता हो रही है। मेरा मानना ​​है कि जरूरतमंद लोगों तक कानूनी सहायता सुलभ होना किसी भी आधुनिक देश की आधारशिला है। इससे एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था बनती है जो न्यायसंगत, उचित और वि

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