नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला-2014 के उद्घाटन के अवसर पर, भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण

देवियो और सज्जनो,
मुझे नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला-2014 का उद्घाटन करते हुए बहुत प्रसन्नता हो रही है।
इतना विशाल अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला भारत के उदार, लोकतांत्रिक, बहुभाषी, बहुसांस्कृतिक तथा पंथनिरपेक्ष समाज का बेहतरीन नमूना है, जहां प्रतिस्पर्धी विचारों और विचारधाराओं को समान महत्त्व दिया जाता है। ये मूल्य भारत की आत्मा हैं। हमें इन आदर्शों को संरक्षित, सुरक्षित, प्रोत्साहित तथा पोषित करने के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए।








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