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केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण

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1. केरल केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में भाग लेने के लिए आज यहां आना मेरे लिए प्रसन्नता का अवसर है। मुझे कासरगोड़ में आकर खुशी हो रही है। यह मालाबार क्षेत्र में स्थित है जो बहुत सामाजिक-ऐतिहासिक महत्त्व का क्षेत्र है। यह मध्य युग के दौरान महत्त्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र था जहां अरब तथा यूरोप के व्यापारी आते रहते थे। भारत की आजादी की लड़ाई के दौरान, इस क्षेत्र ने हमें पांजासी राजा, केरल गांधी के नाम से मशहूर केलप्पाजी तथा के.पी. केशवन जैसे स्वतंत्रता सेनानी दिए।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान तिरुचिरापल्ली के स्वर्ण जयंती समारोह के उद्घाटन के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति का अभिभाषण

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1. राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, तिरुचिरापल्ली के स्वर्ण जयंती समरोहों के उद्घाटन के अवसर पर आज यहां उपस्थित होना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। मैं इस शानदार अवसर पर तकनीकी शिक्षा के इस उत्कृष्ट केन्द्र से जुड़े हर एक व्यक्ति को बधाई देता हूं।

अंतरराष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा सम्मेलन के उद्घाटन पर भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण

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1.अंतरराष्ट्रीय प्राकृतिक रेशा सम्मेलन, जिसे राष्ट्रीय जूट और संबंधित रेशा प्रौद्योगिकी अनुसंधान के प्लेटिनम जुबली समारोह के स्थापना के अवसर पर आयोजित किया गया है, के उद्घाटन में आज की शाम भाग लेना मेरे लिए वास्तव में खुशी का मौका है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का एक संस्था यह संस्थान जूट और संबंधित रेशा प्रौद्योगिकी के विकास के प्रति समर्पित है।

नालसर विधि विश्वविद्यालय के बारहवें वार्षिक दीक्षांत समारोह में भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण

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1.मुझे नालसर विधि विश्वविद्यालय,जो सोलह वर्ष की संक्षिप्त अवधि में हमारे देश की विधिक शिक्षा के एक अग्रणी केंद्र के रूप में उभरा है,के बारहवें दीक्षांत समारोह के लिए आज की शाम यहां उपस्थित होकर प्रसन्नता हुई है। इसके स्नातकों ने विधिक पेशे के लगभग सभी आयामों पर अपनी छाप छोड़ी है। उन्होंने अभियोजन,न्यायिक सेवाओं,अध्यापन,शोध,सामाजिक वकालत,अंतरराष्ट्रीय संगठनों तथा कारोबारी वकालत के क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

भारतीय वन सेवा के 2013-15 बैच के परिवीक्षाधीनों द्वारा भेंट के दौरान भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण

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नमस्कार!

सबसे पहले मैं, आप सभी का राष्ट्रपति भवन में स्वागत करता हूं। मैं आपको एक प्रमुख अखिल भारतीय सेवा,भारतीय वन सेवा में शामिल होने के लिए बधाई देता हूं। यह आपकी शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रतीक है। भारतीय वन सेवा में शामिल होकर आपने अपनी पेशेवर आजीविका की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। यह केवल शुरुआत है तथा आपके सामने सरकार में33 से 35 वर्षों का उपलब्धिपूर्ण तथा चुनौतीपूर्ण सेवाकाल है।

भारत के 68वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का राष्ट्र के नाम संदेश

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प्यारे देशवासियो :

हमारी स्वतंत्रता की 67वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर,मैं आपका और दुनिया भर में सभी भारतवासियों का हार्दिक अभिनंदन करता हूँ। मैं हमारी सशस्त्र सेनाओं,अर्ध-सैनिक बलों तथा आंतरिक सुरक्षा बलों के सदस्यों को विशेष बधाई देता हूं। हाल ही में ग्लासगो में संपन्न राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लेने वाले और सम्मान पाने वाले सभी खिलाड़ियों को भी मैं बधाई देता हूँ।

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