भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के 54वें दीक्षांत समारोह पर भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण
1. मैं भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान जो हमारे देश में कृषि अनुसंधान,शिक्षा और विस्तार की एक अग्रणी संस्था है,के 54वें दीक्षांत समारोह पर आज आपके बीच उपस्थित होकर बहुत प्रसन्न हूं। मैं उन छात्रों को बधाई देता हूं जिन्हें आज डिग्री प्रदान की जा रही है। इस अवसर पर मैं इन छात्रों की समझ और कौशल को आकार देने के लिए संकाय के सदस्यों को भी बधाई देता हूं।

बंगाल की खाड़ी के समुद्र में खड़े शानदार युद्धपोतों के सुंदर दृश्य को देखना वास्तव में मेरा सौभाग्य है। ड्रेसिंग लाइनों पर फहराती पताकाएं और ध्वज अपने पोतों का संचालन कर रहे प्रसन्नचित और गर्वित श्वेत वर्दीधारी पुरुषों का देखना वास्तव में सुखद है। आज यहां आप सभी के बीच उपस्थित होना तथा पोतों की इस आकर्षक अंतरराष्ट्रीय परेड का अवलोकन करना मेरा सौभाग्य है। विशाखपत्तनम के पूर्व
1. मुझे वर्ष 2015के अशोक फैलो के इस युवा, उद्यमशील समूह से मिलकर प्रसन्नता हुई है। सर्वप्रथम,मैं आपको और ‘अशोक जन नवान्वेषक’के प्रतिनिधियों का राष्ट्रपति भवन में हार्दिक स्वागत करता हूं।
1. मैं प्रतिभाशाली लोगों के इस समूह के बीच उपस्थित होने में प्रसन्न हूं। मैं इन्फोसिस पुरस्कार के विजेताओं को मुबारकबाद देकर अपनी बात आरंभ करना चाहूंगा। उनका अनुसंधान एक विकसित,समर्थ और संधारणीय विश्व की नींव रख रहा है।
1. भारतीय दण्ड संहिता (आईपीसी) की 155वीं वर्षगांठ के समापन समारोह में भाग लेने पर मैं प्रसन्न हूं। सर्वप्रथम,मैं अभियोग निदेशालय, केरल को बधाई देता हूं जिसके तत्वावधान में यह समारोह मनाया जा रहा है।
1. मुझे पर्यटन मंत्रालय,भारत सरकार के सहयोग से केरल सरकार के पर्यटन विभाग द्वारा कार्यान्वित की जा रही मुजिरिस धरोहर परियोजना का उद्घाटन करने के लिए आज कोडुंगलूर के इस ऐतिहासिक शहर में आकर प्रसन्नता हो रही है।
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