भारत के राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम विदाई संदेश
प्यारे देशवासियो,
प्यारे देशवासियो,
प्रिय राज्यपालो और उपराज्यपालो,
1. सर्वप्रथम,अत्यंत सुखमय, स्वस्थ और शांतिपूर्ण नववर्ष के लिए मेरी शुभकामनाएं स्वीकार करें। मैं प्रार्थना करता हूं कि वर्ष2016 अपने साथ हमारे लिए नवीन ऊर्जा और उत्साह लेकर आए तथा हमारे राष्ट्र की प्रगति और समृद्धि के लिए अपना कर्तव्य निभाने में मदद करे।
1. मुझे परोपकारी उद्योगपति,बी.एम बिरला द्वारा1955में स्थापित तथा बाद में उनके सुपुत्र जी.पी.बिरला तथा अब श्री सी.के.बिरला द्वारा आगे बढ़ाए जा रहे बिरला प्रौद्योगिकी संस्थान मेसरा के हीरक जयंती समारोह तथा विशेषकर अपने पूर्व छात्रों के26वें दीक्षांत समारोह के आयोजन के दौरान इस प्रात: आपके बीच उपस्थित होकर प्रसन्नता हो रही है।
1. मेरे लिए इस प्रख्यात संस्थान के छठे स्थापना दिवस और तीसरे दीक्षांत समारोह पर भी आपके बीच होना सचमुच बड़ी प्रसन्नता की बात है। यह संस्थान जनवरी, 2010में स्थापित हुआ था और अपने समर्पित दल के साथ अल्पावधि में इसने देश के अग्रणी संस्थाओं में अपना स्थान बनाया है।
1. मैं आज शिव नाडर विश्वविद्यालय देश को समर्पित करने और एचसीएल नागरिक अनुदान सहायता पुरस्कार प्रदान करने के लिए आपके बीच आकर प्रसन्न हूं। आरंभ में मैं श्री शिव नाडर,एचसीएल के संस्थापक अध्यक्ष को उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में उनकी दूरदृष्टि के लिए बधाई देता हूं। दो दशक पहले आरंभ किया गया उनका फाउंडेशन आज परिवर्तनीय शिक्षा के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मंच बन गया है।
केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियो,
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानो,राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थानो,भारतीय विज्ञान शिक्षा और अनुसंधान संस्थानो तथा उच्च शिक्षा संस्थानो और सिविल सेवा अकादमियो के निदेशको,
संकाय सदस्यो,
मेरे प्रिय विद्यार्थियो,
आज आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण ने करदाताओं को न्याय प्रदान करके राष्ट्र सेवा के75वर्ष पूरे किए हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर,मैं आप सभी को बधाई तथा आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण परिवार को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं और यह कामना करता हूं कि आने वाले वर्षों में और अधिक सार्थक व उपयोगी राष्ट्रसेवा करते रहें। आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण के स्थापित मॉडल को अप्रत्यक्ष कर, प्रशासन,रेल और विदेशी
महामहिम, राष्ट्रपति फ्रांस्वां ओलांद,
भारत और फ्रांस के शिष्टमंडलों के विशिष्ट सदस्य,
विशिष्ट अतिथिगण,
देवियो और सज्जनो,