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भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का संसद के समक्ष अभिभाषण

माननीय सदस्यगण,

1. संसद की इस बैठक को संबोधित करते हुए मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है।

अभी दो माह पहले हमने संविधान को अपनाने की 75वीं वर्षगांठ मनाई है, और कुछ दिन पहले ही भारतीय गणतंत्र ने 75 वर्षों की यात्रा भी पूरी की है। ये अवसर लोकतन्त्र की जननी के रूप में भारत के गौरव को नयी ऊंचाई देगा। मैं सभी देशवासियों की तरफ से बाबासाहेब आंबेडकर समेत सभी संविधान निर्माताओं को नमन करती हूं।

माननीय सदस्यगण,

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन

मेरे प्यारे देशवासियो, 

नमस्कार! 

इस ऐतिहासिक अवसर पर आप सबको संबोधित करते हुए मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर, मैं, आप सबको हार्दिक बधाई देती हूं। आज से 75 वर्ष पहले, 26 जनवरी के दिन ही, भारत गणराज्य का आधार ग्रंथ यानी भारत का संविधान, लागू हुआ था।

लगभग तीन वर्ष के विचार-विमर्श के बाद, संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 के दिन संविधान को अंगीकृत किया था। इसी उपलक्ष में 26 नवंबर का दिन, वर्ष 2015 से संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है।

भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का केएलई कैंसर अस्पताल के उद्घाटन के अवसर पर संबोधन

मैं, इस अवसर को बहुत महत्वपूर्ण मानती हूँ, क्योंकि यह कैंसर रोगियों की देखभाल से जुड़ा है, जो वास्तव में एक बहुत ही नेक काम है। मैं इस कैंसर अस्पताल की स्थापना से जुड़े सभी लोगों को बधाई देती हूँ। इस अस्पताल में एक ही स्थान पर व्यापक कैंसर चिकित्सा सेवाएँ प्रदान की जाती हैं। मुझे बताया गया है कि इस अस्पताल में इस्तेमाल की जाने वाली अत्याधुनिक तकनीकों से कैंसर का शीघ्र और सटीक उपचार हो पाएगा और उनका कम से कम दुष्प्रभाव होगा। मुझे विश्वास है कि विभिन्न प्रकार की विशेषताओं वाला यह कैंसर अस्पताल ज़रूरतमंदों को उच्च गुणवत्ता वाला कैंसर उपचार करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। 

भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (निम्हांस) की स्वर्ण जयंती समारोह में संबोधन

आज एक ऐतिहासिक अवसर है और इस अवसर पर आप सभी के बीच आकर मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान, यानी निम्हांस, अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा है। यह जयंती न केवल इस प्रतिष्ठित संस्थान के लिए बल्कि पूरे देश के लिए महत्वपूर्ण है। मैं, इस अवसर पर संस्थान के पूर्व और वर्तमान संकाय सदस्यों, प्रशासकों और विद्यार्थियों को बधाई देती हूँ। मानसिक स्वास्थ्य के महान उद्देश्य के प्रति आप सब के समर्पण से निम्हांस ने हमारे समाज में एक अनुकरणीय भूमिका निभाई है। रोगी की सम्पूर्ण देखभाल तथा नवोन्मेषी अनुसंधान और गहन शैक्षणिक कार्यक्रम से यह संस्थान मानसिक स्वास्थ्य औ

भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का रक्षा प्रबंधन महाविद्यालय, सिकंदराबाद को राष्ट्रपति-निशान प्रदान करने के अवसर पर संबोधन

मुझे इस त्रि-सेवा प्रशिक्षण संस्थान को राष्ट्रपति निशान प्रदान करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यह अवसर हमारे सशस्त्र बलों के भविष्य के रणनीतिक अघिकारी तैयार करने में रक्षा प्रबंधन महाविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका को याद करने का भी अवसर है। 

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का AIIMS – मंगलगिरि के प्रथम दीक्षांत समारोह में सम्बोधन

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का AIIMS – मंगलगिरि के प्रथम दीक्षांत समारोह में सम्बोधन

मंगलगिरि के इस पवित्र स्थल पर मैं ‘पानकाल-स्वामी’ को सादर नमन करती हूं। मेरी प्रार्थना है कि भगवान लक्ष्मी नरसिम्ह स्वामी का आशीर्वाद सभी देशवासियों को सदैव प्राप्त होता रहे। यहां अध्ययन-अध्यापन करने वाले आप सभी विद्यार्थियों और प्राचार्यों का यह सौभाग्य है कि आपको भगवान विष्णु के पानकम् का मधुर प्रसाद मिलता रहता है।

Dear students,

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का श्री वारणा महिला सहकारी उद्योग समूह के स्वर्ण जयंती समारोह में सम्बोधन

आज श्री वारणा समूह के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में आप सब को संबोधित करके मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। इस अवसर पर वारणा क्षेत्र के सर्वांगीण विकास में अपना योगदान देने के लिए मैं इस समूह से जुड़े सभी लोगों की सराहना करती हूं। मैं वारणा समूह के संस्थापक श्री विश्वनाथराव कोरे उर्फ तात्यासाहेब कोरे जी को आदर के साथ याद करती हूं जिनकी दूरदर्शिता और मेहनत से वारणा घाटी की बंजर भूमि आज हरी-भरी है। यह बहुत ही खुशी की बात है कि उनके पौत्र श्री विनय विलासराव कोरे जी, तात्यासाहेब के संकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं।

देवियो और सज्जनो,

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