भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का अलचिकि शताब्दी महोत्सव के अवसर पर संबोधन (HINDI)

आज अलचिकि लिपि के शताब्दी महोत्सव में शामिल होकर मुझे अत्यंत आनंद का अनुभव हो रहा है।

आज अलचिकि लिपि के शताब्दी महोत्सव में शामिल होकर मुझे अत्यंत आनंद का अनुभव हो रहा है।

जोहार!
इस जनजातीय सांस्कृतिक समागम तथा जतरा का आयोजन करने में योगदान देने वाले सभी लोगों की मैं हृदय से सराहना करती हूं। झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा को जोड़ने वाले इस क्षेत्र की नदियां, पहाड़, पठार और जंगल देश की प्राचीनतम परम्पराओं के पोषक और साक्षी रहे हैं।
मैं आप सबको नए वर्ष की शुभकामनाएँ देती हूँ और यह मंगलकामना करती हूँ कि वर्ष 2026 सबके जीवन में सुख और समृद्धि लेकर आए।

भारतीय रक्षा लेखा सेवा में आपके चयन के लिए मैं आप सभी को हार्दिक बधाई देती हूँ। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि राष्ट्र के प्रति सेवा, उत्तरदायित्व और समर्पण की यात्रा की शुरुआत है। आप एक ऐसी सेवा में आए हैं जिसकी भारत की रक्षा तैयारियों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका है।

संघ लोक सेवा आयोग और राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्षों के सम्मेलन के इस उद्घाटन सत्र में उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। लोक सेवा आयोगों की कई दशकों से चली आ रही, एक लंबी परंपरा रही है। मुझे यह देखकर प्रसन्नता हो रही है कि आयोग अपने विकास के विभिन्न चरणों के दौरान सामने आई आवश्यकताओं के अनुसार कार्य करते रहे हैं।
मैं आदि जगद्गुरु श्री शिवरात्रिश्वर शिवयोगी महास्वामीजी की जयंती मनाने के लिए यहां एकत्र आप सब को हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं। इस महान संत के सम्मान में आयोजित इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में शामिल होकर मैं धन्य महसूस कर रही हूं। उनका जीवन, दृष्टिकोण और शिक्षाएं एक हजार वर्ष से अधिक समय के बाद भी अनगिनत लोगों को प्रेरित और मार्गदर्शन कर रही हैं।

मुझे सेनापति में आप सबके बीच उपस्थित होकर अत्यंत प्रसन्नता हो रही है, यह क्षेत्र अपने प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध संस्कृति और गौरवशाली आदिवासी विरासत के लिए जाना जाता है।
आज देश नुपी लाल स्मृति दिवस मना रहा है। नुपी लाल महिलाओं के लिए सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन लाने की क्षमता का एक उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
देवियो और सज्जनो,

मानव अधिकार दिवस के इस अवसर पर आप सभी के साथ उपस्थित होकर मुझे प्रसन्नता हो रही है। यह अवसर हमें याद दिलाता है कि सार्वभौमिक मानव अधिकार अहरणीय हैं और ये एक न्यायपूर्ण, समतावादी और करुणामय समाज की नींव हैं।