भारत की माननीय राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का प्रथम एशियाई बौद्ध शिखर सम्मेलन में संबोधन

मेरी कामना है कि यहाँ बुद्ध को अर्पित किए गए पुष्प हमारी सद्भावना की सुवास को चारों दिशाओं में फैलाएँ! जो दीप हमने यहाँ जलाए हैं, वे चारों दिशाओं को ज्ञान के प्रकाश से जगमग करें!