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भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के 50वें दीक्षांत समारोह में सम्बोधन

आज पवित्र शहर अमृतसर में आप सब के बीच उपस्थित होकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। स्वर्ण मंदिर, दुर्ग्याणा मंदिर और जलियांवाला बाग के इस शहर का हम सभी देशवासियों के दिलों में महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के शहर में स्थित विश्वविद्यालय में अध्ययन और अध्यापन का अवसर मिलना आप सबके लिए सौभाग्य की बात है।

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का राष्ट्रपति भवन में ‘भारत की शास्त्रीय भाषाओं के ग्रंथ कुटीर’ के उद्घाटन के अवसर पर संबोधन

सबसे पहले मैं आप सभी को वसंत के आगमन तथा बसंत पंचमी के पावन दिन की शुभकामनाएं व्यक्त करती हूं। आज सभी देशवासी विद्या की देवी मां सरस्वती की आराधना करते हैं। मैं मां शारदा को सादर नमन करती हूं। आज वाग्देवी सरस्वती की पूजा के पवित्र दिन, राष्ट्रपति भवन में ‘भारत की शास्त्रीय भाषाओं के ग्रंथ कुटीर’ के उद्घाटन समारोह में आप सब के बीच उपस्थित होकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। यह कुटीर भारत की शास्त्रीय भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में राष्ट्रपति भवन की ओर से किया जा रहा सामूहिक प्रयास है। इस ग्रंथ कुटीर के निर्माण में योगदान देने वाले सभी व्यक्तियों, संस्थानों, विश्वविद्यालयों, शोध

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का 16वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर संबोधन

आज राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर मैं सभी देशवासियों को बधाई देती हूं। मतदाता पहचान पत्र प्राप्त करने वाले, यहां उपस्थित युवा मतदाताओं सहित, पूरे देश के युवा मतदाताओं को मैं विशेष बधाई देती हूं। यह पहचान पत्र आपको विश्व के सबसे बड़े और जीवंत लोकतन्त्र में सक्रिय भागीदारी का अमूल्य अधिकार प्रदान करता है। मुझे विश्वास है कि देश के सभी युवा मतदाता बहुत जिम्मेदारी के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे तथा राष्ट्र के निर्माण में अपनी भागीदारी निभाएंगे।

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष महामहिम एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष महामहिम उर्सुला वॉन डेर लेयेन के सम्मान में आयोजित भोज में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का अभिभाषण

राष्ट्रपति भवन में आप सभी का स्वागत करना मेरे लिए अत्यंत प्रसन्नता की बात है। आज हमारे बीच European Council तथा European Commission के अध्यक्षों की उपस्थिति और भारत के 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उनकी सहभागिता न केवल हमारी मित्रता को दर्शाती है बल्कि भारत और European Union के बीच साझेदारी की गहराई का भी प्रतीक है।

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का संसद के समक्ष अभिभाषण

माननीय सदस्यगण,

1. संसद के इस समवेत सत्र को संबोधित करते हुए मुझे अत्यंत खुशी हो रही है। बीता वर्ष भारत के तेज विकास और विरासत के उत्सव के रूप में स्मरणीय रहा है। ये कालखंड अपने साथ अनेक प्रेरणाएं लेकर आया है। इस समय वंदे मातरम् के 150 वर्ष होने पर पूरे देश में समारोह आयोजित हो रहे हैं। सभी देशवासी इस महान प्रेरणा के लिए, ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जी को नमन कर रहे हैं। मैं आप सभी संसद सदस्यों को बधाई देती हूं कि इस पुण्य अवसर पर संसद में विशेष चर्चा का आयोजन किया गया।

माननीय सदस्यगण,

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का गणतन्त्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का गणतन्त्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन

मेरे प्यारे देशवासियो,

नमस्कार!

देश और विदेश में रहने वाले, हम भारत के लोग, उत्साह के साथ, गणतन्त्र दिवस का उत्सव मनाने जा रहे हैं। मैं, आप सभी को गणतन्त्र दिवस के राष्ट्रीय पर्व की हार्दिक बधाई देती हूं।

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार-2024 वितरण समारोह में संबोधन (HINDI)

 नमस्कार!

आज पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी व्यक्तियों और संस्थानों को मैं हार्दिक बधाई देती हूं।

जल के महत्व को समझाने के लिए, हजारों वर्ष पहले, हमारे पूर्वजों ने ऋग्वेद में कहा था:

अप्सु अन्तः अमृतम्

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का संविधान दिवस के अवसर पर सम्बोधन (HINDI)

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का  संविधान दिवस के अवसर पर सम्बोधन (HINDI)

संविधान दिवस के अवसर पर, मैं सभी देशवासियों को भारत के संवैधानिक लोकतंत्र की अद्वितीय सफलता पर हार्दिक बधाई देती हूं। आज के दिन मैं उन संविधान निर्माताओं को सादर नमन करती हूं जिन्होंने विश्व इतिहास के सबसे विशाल लोकतन्त्र के सबसे बड़े लिखित संविधान को स्वरूप दिया। कार्यपालिका, विधायिका एवं न्यायपालिका ने संविधान के आदर्शों का पालन और मर्यादाओं का निर्वहन किया है। इसके लिए मैं इन तीनों स्त

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का ब्रह्म कुमारी के ‘विश्व एकता और विश्वास के लिए राजयोग ध्यान’ के वार्षिक अभियान के उद्घाटन समारोह में सम्बोधन

आज ब्रह्म कुमारी के ‘विश्व एकता और विश्वास के लिए राजयोग ध्यान’ के वार्षिक अभियान के शुभारंभ के अवसर पर आप सब के बीच उपस्थित होकर मुझे प्रसन्नता हो रही है। भारत की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति ने सदैव विश्व को "वसुधैव कुटुम्बकम्" का संदेश दिया है — अर्थात संपूर्ण विश्व हमारा परिवार है। आज जब विश्व कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब यह विचार और अधिक प्रासंगिक बन गया है। मुझे विश्वास है कि इस महान संकल्प को सिद्ध करने में इस अभियान का प्रभावी योगदान रहेगा। मैं इस अभियान के शुभारंभ

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का FOOTWEAR DESIGN & DEVELOPMENT INSTITUTE के दीक्षांत समारोह में संबोधन (HINDI)

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का  FOOTWEAR DESIGN & DEVELOPMENT INSTITUTE के दीक्षांत  समारोह में संबोधन (HINDI)

Footwear Design & Development Institute के दीक्षांत समारोह में आकर मुझे प्रसन्नता हो रही है। आज उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को मैं बधाई देती हूं। विद्यार्थियों की इस सफलता में योगदान के लिए मैं उनके शिक्षकों तथा अभिभावकों की सराहना करती हूं।

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