राजकीय टी डी मेडिकल कॉलेज के स्वर्ण जयंती समारोहों के उद्घाटन के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण

सबसे पहले मैं उन सभी युवा और उदीयमान वैज्ञानिकों तथा इंस्पायर पुरस्कार विजेताओं को बधाई देता हूं जो देश के विभिन्न स्थानों से यहां आए हैं। प्यारे युवा विद्यार्थियो, मैं आप में भारत का भविष्य देखता हूं, यह निश्चित है कि भावी भारत का स्वरूप देश के युवाओं द्वारा निर्धारित होगा। विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा नवान्वेषण विकास की नई इबारत लिखेंगे।


मैं, सबसे पहले भारतीय नौसेना और महादेई के कप्तान को, अकेले, बिना रुके, बाहरी सहायता रहित, पूरे विश्व की नौ परिक्रमा, सागर परिक्रमा-II के सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर बधाई देता हूं। विश्व के कुछ सबसे जोखिम भरे महासागरों में अकेले, बिना सहायता के समुद्र में निरंतर 150 दिन से अधिक लम्बी समुद्री यात्रा करना एक असाधारण कार्य है। पहली बार एक भारतीय समुद्री यात्री की यह 




