राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम पुरस्कार प्रदान करने के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण

मुझे आज राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम पुरस्कारों को प्रदान करने के मौके पर यहां आकर प्रसन्नता हो रही है, जो भारत में व्यवसायिक पुरस्कारों का एक महत्त्वपूर्ण अवसर है। 30 वर्ष पूर्व स्थापित ये पुरस्कार, खादी एवं ग्रामोद्योग सहित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम सेक्टर में विशिष्ट उपलब्धि प्राप्त करने वालों तथा इस सेक्टर के विकास को बढ़ावा देने के लिए बैंकों को म

मैं, सबसे पहले भारतीय नौसेना और महादेई के कप्तान को, अकेले, बिना रुके, बाहरी सहायता रहित, पूरे विश्व की नौ परिक्रमा, सागर परिक्रमा-II के सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर बधाई देता हूं। विश्व के कुछ सबसे जोखिम भरे महासागरों में अकेले, बिना सहायता के समुद्र में निरंतर 150 दिन से अधिक लम्बी समुद्री यात्रा करना एक असाधारण कार्य है। पहली बार एक भारतीय समुद्री यात्री की यह 





