संसद के समक्ष भारत के राष्ट्रपति का अभिभाषण
माननीय सदस्यगण,
1. मैं, राष्ट्रपति के रूप में पहली बार दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए इस सत्र में आपका स्वागत करता हूं। मैं आशा करता हूं कि यह सत्र सफल एवं उपयोगी होगा।
2. जब मैं आपको संबोधित कर रहा हूं, मैं जानता हूं कि एक महत्वाकांक्षी भारत का उदय हो रहा है, एक ऐसा भारत जहां अधिक अवसर, अधिक विकल्प, बेहतर आधारभूत संरचना तथा अधिक संरक्षा एवं सुरक्षा होगी। हमारे युवा जो हमारी सबसे बड़ी राष्ट्रीय धरोहर हैं, आत्मविश्वास और साहस से परिपूर्ण हैं। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि इनका जोश, इनकी ऊर्जा और इनका उद्यम भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।









