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संसद के समक्ष भारत के राष्ट्रपति का अभिभाषण

माननीय सदस्यगण,

1. मैं, राष्ट्रपति के रूप में पहली बार दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए इस सत्र में आपका स्वागत करता हूं। मैं आशा करता हूं कि यह सत्र सफल एवं उपयोगी होगा।

2. जब मैं आपको संबोधित कर रहा हूं, मैं जानता हूं कि एक महत्वाकांक्षी भारत का उदय हो रहा है, एक ऐसा भारत जहां अधिक अवसर, अधिक विकल्प, बेहतर आधारभूत संरचना तथा अधिक संरक्षा एवं सुरक्षा होगी। हमारे युवा जो हमारी सबसे बड़ी राष्ट्रीय धरोहर हैं, आत्मविश्वास और साहस से परिपूर्ण हैं। मुझे इसमें कोई संदेह नहीं कि इनका जोश, इनकी ऊर्जा और इनका उद्यम भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।

बांग्लादेश ‘मुक्ति युद्ध सम्मान’ की प्राप्ति के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का स्वीकृति एवं राजभोज अभिभाषण

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महामहिम श्री मोहम्मद ज़िल्लुर रहमान, बांग्लादेश जन गणराज्य के राष्ट्रपति,

महामान्या शेख हसीना, बांग्लादेश जन गणराज्य की प्रधानमंत्री,

महामान्या डॉ दिपु मोनी विदेश मंत्री,

महामहिम कैप्टन ए.बी ताजुल इस्लाम, मुक्ति युद्ध कार्य राज्यमंत्री,

बांग्लादेश के कुमुदिनी कल्याण ट्रस्ट में भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण

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श्री राजीव शाहा, प्रबंधन निदेशक, कुमुदिनी कल्याण ट्रस्ट,

श्रीमती शाहा,

सुश्री प्रतिभा मुत्सुद्दी, निदेशक भारतेश्वरी होम,

कुमुदिनी कल्याण ट्रस्ट के ट्रस्टी और सदस्यगण,

मेरे प्यारे विद्यार्थियो,

7वें द्विवार्षिक जमीनी नवाचार पुरस्कार प्रदान करने तथा नवाचार प्रदर्शनी के उद्घाटन के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण

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मुझे इस अवसर पर यहां उपस्थित होकर, राष्ट्रीय नवाचार फाउंडेशन के इस कार्यक्रम में शामिल होने पर बहुत खुशी हो रही है, जो कि जमीनी नवान्वेषकों की उपलब्धियों को मान्यता देने के लिए आयोजित किया जा रहा है। आरंभ में, मैं राष्ट्रीय नवाचार फाउंडेशन को बधाई देता हूं।

स्वर्गीय पंडित रवि शंकर को सांस्कृतिक सौहार्द के लिए प्रथम टैगोर पुरस्कार प्रदान करने के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण

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मैं, सांस्कृतिक सौहार्द के लिए प्रथम टैगोर पुरस्कार, महान भारतीय सितार आचार्य, स्वर्गीय पंडित रवि शंकर को प्रदान करके गौरव का अनुभव कर रहा हूं, जिनके संगीत ने विश्व को मंत्रमुग्ध कर दिया और करता रहेगा।

स्वामी विवेकानंद की 150वीं जन्म जयंती के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण

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मुझे स्वामी विवेकानंद की 150वीं जन्म जयंती के अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में आपके बीच आकर प्रसन्नता हो रही है। इससे हमें स्वामी विवेकानंद के उपदेशों तथा उनके द्वारा सिखाए गए मूल्यों पर चिंतन करने तथा उनके बारे में अपनी समझ को ताजा करने का मौका मिला है।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में वर्ष 2012 के लिए स्त्री शक्ति पुरस्कार प्रदान करने के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण

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देवियो और सज्जनो,

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के इस समारोह में आपके साथ शामिल होकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। मैं इस अवसर पर देश के सभी हिस्सों में महिलाओं को हार्दिक बधाई देता हूं। मैं उन्हें अपने महान देश के निर्माण में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए धन्यवाद देता हूं।

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