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उत्कल विश्वविद्यालय के 45वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण

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मुझे, उत्कल विश्वविद्यालय के 45वें दीक्षांत समारोह के लिए यहां आकर तथा प्रख्यात शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों तथा विद्यार्थियों को संबोधित करके बहुत प्रसन्नता हो रही है। कटक में एक किराए के भवन में 1943 में शुरू हुआ यह विश्वविद्यालय आज पूर्वी क्षेत्र में उच्च शिक्षा का एक महत्त्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। इस समय विश्वविद्यालय में 27 स्नातकोत्तर विभाग, दो विधि कॉलेज, ए

चतुर्थ सार्वजनिक क्षेत्र दिवस के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण

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मुझे चतुर्थ सार्वजनिक क्षेत्र दिवस के अवसर पर आपके बीच आकर बहुत खुशी हो रही है, जो कि हमारे देश की आर्थिक प्रगति में सार्वजनिक क्षेत्र की बहुमूल्य साझीदारी को मान्यता प्रदान करने का अवसर है। आज जब हम उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए कुछ चुनिंदा केंद्रीय सार्वज्निक क्षेत्र के उद्यमों को पुरस्कृत कर रहे हैं, यह समय सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत करने की हमारी प्रतिबद्धता

भारतीय राजस्व सेवा के 65वें बैच के दीक्षांत समारोह के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण

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नमस्कार!

मुझे भारतीय राजस्व सेवा के 65वें बैच के दीक्षांत समारोह के अवसर पर आप सबके बीच आकर खुशी हो रही है। सबसे पहले, मैं उन सभी अधिकारियों को बधाई देना चाहूंगा, जिन्होंने अपना व्यावसायिक प्रशिक्षण पूरा किया है।

भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोहों के अवसर पर 2 मई, 2013 को भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण

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मुझे आज भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के स्वर्ण जयंती समारोहों के लिए यहां उपस्थित होकर बहुत खुशी हो रही है। यह अवसर विदेश व्यापार और अतंरराष्ट्रीय कारोबार में इस संस्थान द्वारा दिए गए व्यापक बौद्धिक योगदान की सराहना करने का अवसर है।

अधिवक्ताओं के कल्याण, बार के सदस्यों, विशेषकर कनिष्ठ सदस्यों, अक्षमताग्रस्त सदस्यों और महिला सदस्यों, के कार्यकलापों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण

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मुझे विधिक समुदाय के सदस्यों के कल्याणकारी कार्यकलापों पर अखिल भारतीय संगोष्ठी के उद्घाटन के अवसर पर यहां उपस्थित होने पर प्रसन्नता हो रही है और मैं इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करने की पहल के लिए दिल्ली बार काउंसिल को बधाई देता हूं।

‘कान्टेम्पराइजिंग टैगोर एंड द वर्ल्ड’ की प्रथम प्रति स्वीकार करने के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण

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सबसे पहले मैं ‘कान्टेम्पराइजिंग टैगोर एंड द वर्ल्ड’ नामक पुस्तक की प्रथम प्रति स्वीकार करने के लिए मुझे आमंत्रित करने के लिए, इस समारोह के आयोजकों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं।

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