मानवाधिकार दिवस समारोह के अवसर पर भारत के राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी का अभिभाषण
मुझे, आज भारत के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा आयोजित मानवाधिकार दिवस समारोह में भाग लेकर बहुत खुशी हो रही है। मुझे इस सभा को संबोधित करते हुए बहुत खुशी हो रही है जो कि सार्वभौमिक महत्त्व तथा समसामयिक प्रासंगिकता के अवसर को मनाने के लिए यहां इकट्ठा हुई है। यह दिन विश्व के सभी नागरिकों के लिए मानवाधिकारों की प्राप्ति के लिए मनुष्य के प्रयासों में एक प्रमुख उपलब्धि का दिन







मुझे कविगुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर को नोबल पुरस्कार प्राप्त होने के शताब्दी समारोहों का उद्घाटन करते हुए बहुत प्रसन्नता हो रही है, जो कि विश्व भारती, शांतिनिकेतन तथा चीन अध्ययन संस्थान, दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘टैगोर और विश्व के बीच एकात्मता : चीन के विशेष संदर्भ सहित, संस्कृति और साहित्य’ नामक इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी से शुरू हो रहे हैं।
मैं आज अपने कॉलेज में आकर खुशी और पुरानी यादों से उद्वेलित अनुभव कर रहा हूं जहां मैंने अपनी युवावस्था के बेहतरीन चार साल बिताए थे। ऐसा लगता है मानो यह कल ही की बात है जब वर्ष 1952 में मुझे आईएससी में दाखिला मिला था। मेरी पंजीकरण संख्या थी 5057। उस समय पंजीकरण शुल्क 2/- रुपए था। वर्ष 1953-56 के दौरान मैंने बी.ए.