भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का Siachen Base Camp में संबोधन

आप सभी जवानों और अधिकारियों से यहां आकर मिलने की मेरी इच्छा आज पूरी हो रही है। मैं आप सबसे मिलकर बेहद खुशी का अनुभव कर रही हूं।

आप सभी जवानों और अधिकारियों से यहां आकर मिलने की मेरी इच्छा आज पूरी हो रही है। मैं आप सबसे मिलकर बेहद खुशी का अनुभव कर रही हूं।
आज हम सब राष्ट्रपति निलयम में देश की समृद्ध संस्कृति और ‘विविधता में एकता’ का उत्सव मना रहे हैं। हम यहां पूर्वोत्तर भारत की अनूठी कला-संस्कृति को जीवंत रूप में देख रहे हैं। मुझे यहां के pavilions में उत्कृष्ट हस्तशिल्प, हथकरघा और अन्य कलाओं का प्रदर्शन देखने को मिला। पूर्वोत्तर के GI उत्पादों से लेकर असम के माजुली मास्क, त्रिपुरा के रिगनाई कपड़ा, अरुणाचल प्रदेश के मोंपा वस्त्र और मिजोरम के पुंचेई कपड़ा, प्रत्येक उत्पाद अपने आप में अनूठा है। नागालैंड के कारीगरों द्वारा नेटल यार्न की hand-spinning, मणिपुर के lotus silk निकालने की प्रक्रिया, मेघालय की खेनेग कढ़ाई और सिक्किम की थंगका पेंटिंग को
सबसे पहले मैं, उन सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देती हूं जिन्हें इस दीक्षांत समारोह में उपाधियां प्रदान की गई हैं।
अपनी असाधारण उपलब्धियों के लिए पदक हासिल करने वाले सभी विद्यार्थियों की प्रसन्नता से मुझे भी आनंद मिलता है।
मैं, विद्यार्थियों को उनके जीवन और करियर में एक प्रमुख उपलब्धि हासिल करने के मुकाम तक पहुँचाने के लिए संकाय-सदस्यों और विश्वविद्यालय की पूरी टीम के योगदान की प्रशंसा करती हूं।
मैं, हमारे ही परिवार-जनों को मिले संतुष्टि के भाव को समझ सकती हूं जिन्होंने छात्रों की हर प्रकार से मदद की है।
आज के सभी पुरस्कार विजेताओं को मैं हार्दिक बधाई देती हूं। मुझे बताया गया है कि बहुत सी फिल्मों पर विचार करने के बाद आज की पुरस्कृत फिल्में चुनी गई हैं। सिनेमा पर सर्वश्रेष्ठ लेखन एवं समीक्षा के लिए भी अनेक पुस्तकों और समीक्षकों का आकलन किया गया है। इसके लिए मैं निर्णायक मण्डल के अध्यक्षों सहित, सभी सदस्यों की सराहना करती हूं।

आज ‘आदि गौरव सम्मान’ प्राप्त करने वाले सभी व्यक्तियों और संस्थाओं को मैं बहुत-बहुत बधाई देती हूं। व्यक्तिगत सम्मान प्राप्त करने वाले लोगों में महिलाओं की संख्या अधिक है। यह आदिवासी समाज के लिए, राजस्थान के लिए और पूरे देश के लिए गौरव की बात है। यह मैं इसलिए कह रही हूं कि महिलाओं का विकास, किसी भी समाज के विकास का आईना है। इस सम्मान समारोह से यह भी सिद्ध हुआ

‘स्वच्छ और स्वस्थ समाज के लिए आध्यात्मिकता’ विषय पर आयोजित इस ग्लोबल समिट में आप सब के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। जिस संस्था का लक्ष्य है: “स्व परिवर्तन से विश्व परिवर्तन”, उसके द्वारा इस विषय पर ग्लोबल समिट का आयोजन सर्वथा उचित है।
आज उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को मैं हार्दिक बधाई देती हूं। आज स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को मैं विशेष शुभकामनाएं देती हूं। मुझे बताया गया है कि आज M. Phil. उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है। मैं आशा करती हूं कि आने वाले समय में अन्य पाठ्यक्रमों में भी छात्राओं की समुचित भागीदारी होगी।
देवियो और सज्जनो,

आज इस संस्थान की शताब्दी के उत्सव से जुड़े समारोह में भाग लेकर, मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। इस संस्थान के शतायु होने पर, मैं आप सभी को हार्दिक बधाई देती हूं।

आज इस दीक्षांत समारोह में आप सब के बीच आकर मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है। यह ख़ुशी की बात है कि विश्वविद्यालय की स्थापना के 60वें वर्ष को हीरक-जयंती के रूप में मनाया जा रहा है। मैं उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देती हूं। सभी पदक विजेताओं को मैं विशेष बधाई देती हूं। वे सभी शिक्षकगण, माता-पिता, अभिभावकगण भी बधाई के पात्र हैं जिन्होंने आपको आगे बढ़ने के ल
श्री महाकालेश्वर की दैवी ज्योति से प्रकाशित तथा पावन शिप्रा नदी के आशीर्वाद से सिंचित इस धरती को मैं सादर नमन करती हूं। प्राचीन काल में इस क्षेत्र को अवन्तिका कहा जाता था। पवित्र ‘द्वादश-ज्योतिर्लिंग-स्तोत्रम्’ में प्रार्थना की जाती है:
अवन्ति-कायां विहिता-वतारम्
वन्दे महाकाल-महा-सुरेशम् ।
अर्थात
अवन्तिका में अवतार लेने वाले ... देवाधिदेव महाकाल की हम वंदना करते हैं।