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भारत की माननीया राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का आईएनएस द्रोणाचार्य को राष्ट्रपति ध्वज प्रदान करने के अवसर पर संबोधन

मुझे प्रसन्नता है कि भारत की राष्ट्रपति के रूप में केरल की मेरी पहली यात्रा पर मेरा भारतीय नौसेना के एक प्रमुख तोपखाना प्रशिक्षण प्रतिष्ठान आईएनएस द्रोणाचार्य को राष्ट्रपति ध्वज प्रदान करने के लिए कोच्चि आना हुआ।

सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में, मुझे युद्ध और शांति दोनों में राष्ट्र की असाधारण सेवा करने पर आईएनएस द्रोणाचार्य को राष्ट्रपति ध्वज प्रदान करने में प्रसन्नता हो रही है।

मैं आज आपकी प्रभावशाली उपस्थिति और समन्वित ड्रिल प्रदर्शन के लिए सभी कर्मियों को बधाई देती हूं। इससे पता चलता है की आप सभी को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

भारत की माननीया राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में 124वें प्रारंभिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने वाले राज्य के सिविल सेवा अधिकारियों द्वारा मुलाक़ात के अवसर पर संबोधन

प्रिय अधिकारियों,

मैं आप सभी को पदोन्नति और भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में प्रवेश पर बधाई देती हूं। IAS अधिकारियों के रूप में, आप बड़ी जिम्मेदारी और अधिकार के साथ देशवासियों की सेवा करेंगे। अपनी जिम्मेदारियों के प्रभावी निर्वहन के लिए आपको राष्ट्रीय दृष्टिकोण रखना जरूरी है।

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का ईशा योग केंद्र में महाशिवरात्रि समारोह के अवसर पर संबोधन

ओम नम शिवाय! जो 'शिव' अर्थात 'शुभ'- इस ब्रह्मांड में मंगलकारी, उदार, परोपकारी हैं, उनको मैं नमन करती हूँ।

मैं आज बहुत ही धन्य महसूस कर रही हूं। आज सुबह, मुझे माँ मीनाक्षी के दर्शन करने का सौभाग्य मिला। मैंने देवी मां से सभी की भलाई के लिए प्रार्थना की।

भारतीय नौसेना सामग्री प्रबंधन सेवा के अधिकारियों, केंद्रीय अभियांत्रिकी सेवा (सड़क) के सहायक कार्यकारी अभियंताओं और भारतीय डाक एवं दूरसंचार लेखा और वित्त सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों द्वारा मुलाक़ात के अवसर पर भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का स

सरकारी सेवाओं में आपके चयन पर मैं,आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ देती हूं।


प्रतिष्ठित सेवाओं में अपने चयन के साथ आपने एक महत्वपूर्ण व्यक्तिगत उपलब्धि प्राप्त कर ली है। यह महत्वपूर्ण होगा कि आप,अपने समक्ष आने वाले बड़े उद्देश्यों और अवसरों को ध्यान में रखें।

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का संसद के समक्ष अभिभाषण

माननीय सदस्यगण,

1. संसद के इस समवेत सत्र को संबोधित करते हुए मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। कुछ ही महीने पहले देश ने अपनी आज़ादी के 75 वर्ष पूरे करके आज़ादी के अमृतकाल में प्रवेश किया है। आज़ादी के इस अमृतकाल में हजारों वर्षों के गौरवशाली अतीत का गर्व जुड़ा है, भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम की प्रेरणाएं जुड़ी हैं और भारत के स्वर्णिम भविष्य के संकल्प जुड़े हैं।

भारत की माननीया राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का 17वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन में समापन संबोधन

मुझे, 17वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन में शामिल होकर और समापन अवसर पर आपसे बातचीत करते हुए प्रसन्नता हो रही है। मुझे आप सभी से व्यक्तिगत रूप से मिलकर बहुत प्रसन्नता हो रही है, इसलिए भी कि यह सम्मेलन चार वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित किया जा रहा है। मैं इस अवसर पर आप सभी को एक खुशहाल और सफल नव वर्ष की शुभकामनाएं देती हूं।

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