भारत के राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी द्वारा पापुआ न्यू गिनिया की राजकीय यात्रा के अवसर पर प्रेस के लिए संयुक्त वक्तव्य
भारत गणराज्य के माननीय राष्ट्रपति, श्री प्रणब मुखर्जी ने पापुआ न्यू गिनिया स्वतंत्र राष्ट्र के महामहिम गवर्नर जनरल,ग्रैंड चीफ सर माइकल ओगियो, जीसीएल, जीसीएमजी,केएसटी. जे., के निमंत्रण पर28 अप्रैल, 2016पापुआ न्यू गिनिया की दो दिवसीय राजकीय यात्रा की ।
2.महामहिम गवर्नर जनरल ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का गवर्नमेंट हाउस में स्वागत किया। दोनों नेताओं के विचार-विमर्श में हार्दिकता तथा दोनों देशों और उनकी जनता के रिश्ते को परिभाषित करने वाली मैत्री और सहयोग के संबंधों को घनिष्ठ बनाने की साझी आकांक्षा मौजूद थी।

महामहिम लेफ्टिनेंट जनरल मान्यवर सर जेरी मेटपरे, महामहिमगण, विशिष्ट अतिथि, देवियो और सज्जनो, शुभ संध्या।
मैं इस संध्या पर भारतीय निर्यात संगठन परिसंघ (फियो) की स्वर्ण जयंती के अवसर पर यहां आकर बहुत प्रसन्न हूं।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस समारोह की इस संध्या में आपके बीच होने में मुझे हर्ष है।18 वर्ष पूर्व का 11मई का यह दिन भारत की प्रौद्योगिकीय क्षमताओं के विकास के संबंध में महत्वपूर्ण हैं। वर्ष1998 में इस दिन भारत ने पोखरण में सफलतापूर्वक परीक्षण द्वारा परमाणु प्रौद्योगिकी में एक बड़ी खोज की थी। यह दिन हमारे मिसाइल और उड़ान प्रौद्योगिकियों की उपलब्धियों से भी संबंधित है।
1.हमारे देश के योग्य नर्सिंग कर्मियों को वर्ष2016 का राष्ट्रीय फ्लोरेंस नाइटेंगल पुरस्कार प्रदान करना वास्तव में मेरे लिए एक सुखद अवसर है। ये पुरस्कार अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के अवसर पर प्रदान किए जाते हैं। सर्वप्रथम,मैं इस मौके पर संपूर्ण नर्सिंग समुदाय को अपनी हार्दिक बधाई देता हूं।
1.मुझे स्मार्ट राष्ट्रपति संपदा के लिए इंटेलिजेंट ऑपरेशन्स सेंटर के उद्घाटन करने और मोबाइल एप‘मॉनिटर’को लॉन्च करने पर बड़ी प्रसन्नता हुई है। सर्वप्रथम मैं राष्ट्रपति भवन की टीम और आईबीएम की टीम को अवधारणा,सहयोग और इस महत्वपूर्ण परियोजना के तीव्र कार्यान्वयन के लिए बधाई देना चाहूंगा जिसका उद्देश्य संपदा को एक स्मार्ट टाउनशिप में परिवर्तित करना है।
1.मैं आपको आपके स्वागत योग्य शब्दों के लिए धन्यवाद देता हूं। मैं ग्वांग्झू में चीन की राजकीय यात्रा आरंभ करके बहुत प्रसन्न हूं। यह ऐतिहासिक शहर भारतीय व्यवसाय के लिए सदैव एक महत्वपूर्ण विश्राम स्थल रहा है। भारत और चीन के बीच विद्यमान आज के संपन्न व्यापार और आर्थिक संबंध,जो आज बने हुए हैं की स्थापना यहीं से हुई। दूसरी शताब्दी बी सी ई की हं शू (हन वंश की पुस्तक) में दक्षिणी भा
1.मैं चीन के विशिष्ट सांस्कृतिक और अग्रणी शैक्षिक व्यक्तियों के एकत्रित समूह को संबोधित करने में अपने आप को सम्मानित महसूस कर रहा हूं।
1.मैं आपके स्वागत भरे शब्दों के लिए आपको धन्यवाद देता हूं। उच्च शिक्षा के इस सुविख्यात संस्थान में आने पर मुझे बड़ी प्रसन्नता है। पेकिंग विश्वविद्यालय अपने विद्वानों के पांडित्य और उत्साहपूर्ण नेतृत्व के लिए पूरे विश्व में जाना जाता है। मैं इसके प्रबंधन और संकाय के सदस्यों से मिलने और आपको,जो चीन के भावी नेता हैं,और ऊर्जा और आत्मविश्वास विखेरती आपकी खुली मुस्कान स्थान को देख
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