कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम ली जे म्युंग के सम्मान में आयोजित भोज में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का अभिभाषण(HINDI)

राष्ट्रपति भवन : 20.04.2026

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नमस्कार! अन्न्योंगहासेयो!

आज राष्ट्रपति भवन में आपका और आपके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। आपकी यह यात्रा हमारी साझेदारी के एक नए अध्याय का आरंभ करती है।

महामहिम, यद्यपि यह हमारा पहला प्रत्यक्ष संवाद है, फिर भी आपके आत्मविश्वास, संघर्ष और धैर्य से प्रेरित जीवन-प्रसंग के माध्यम से मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि मैं आपको पहले से जानती हूं। साधारण पृष्ठभूमि से उठकर कोरिया गणराज्य के सर्वोच्च पद तक पहुंचने की आपकी यात्रा अत्यंत प्रेरणादायक है। ऐसे समय में, जब विश्वभर में लोकतांत्रिक संस्थाओं की निरंतर परीक्षा हो रही है, चुनावों का सफल आयोजन और आपका राष्ट्रपति पद ग्रहण करना कोरियन जनता के लोकतांत्रिक विश्वास की सशक्त अभिव्यक्ति है।

महामहिम, इतिहास हमें यह सिखाता है कि राष्ट्रों के बीच स्थायी संबंध अल्पकालिक हितों से नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सभ्यतागत संबंधों से संचालित होते हैं, जिनके केंद्र में लोगों के आपसी संबंध, आपसी समझ और विश्वास होता है। इसी भावना के अनुरूप, बौद्ध धर्म सहित नियमित सांस्कृतिक आदान-प्रदान, साझा मूल्यों और लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता हमारे संबंधों की मजबूत आधारशिला है।

कोरिया युद्ध के दौरान भारत की मानवीय सहायता से लेकर, व्यापार, technology और संस्कृति में हमारे बढ़ते सहयोग तक, यह संबंध एक गतिशील और बहुआयामी साझेदारी में विकसित हुआ है। वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की कोरिया यात्रा हमारे संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुई, जब इसे Special Strategic Partnership के स्तर तक उन्नत किया गया।

भारत के लोग Korea को केवल एक विश्वसनीय रणनीतिक और आर्थिक साझेदार के रूप में ही नहीं, बल्कि नवाचार में अग्रणी और एक प्रभावशाली सांस्कृतिक शक्ति के रूप में भी देखते हैं। LG, Hyundai और Samsung जैसे Korean brands जहां भारत में घर-घर में प्रसिद्ध हैं, वहीं जीवंत “K-Wave” ने भी अनेक भारतीयों के जीवन को प्रभावित किया है।

देवियो और सज्जनो,

आज, दोनों पक्षों ने व्यापार, technology, ship-building, port development, digital सहयोग, small & medium industry, steel, शिक्षा, अनुसंधान, संस्कृति तथा people-to-people contacts सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के लिए महत्वाकांक्षी एजेंडा निर्धारित किया है।

मैं इसे हमारे भविष्य के विकास के लिए एक बहुत बड़ा अवसर मानती हूं। भारत की विकास यात्रा के इस निर्णायक चरण में, हमारी सबसे बड़ी शक्ति, हमारे लोग हैं। हम एक युवा राष्ट्र हैं, जहां औसत आयु लगभग 28 वर्ष है। हमारी 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 वर्ष से कम आयु की है और यही हमारी आर्थिक गतिशीलता और नवाचार की शक्ति है। हमारे पास skill, speed और scale है, जबकि कोरिया के पास high-tech manufacturing में विशेषज्ञता है। यदि हम अपनी शक्तियों को मिलाएं, तो हम अपने युवाओं के लिए अनेक अवसर सृजित कर सकते हैं।

अयोध्या और कोरिया के बीच प्राचीन संबंध, हमारे anti-colonial संघर्ष और भगवान बुद्ध की साझा आध्यात्मिक विरासत ने हमें सदियों से एक साथ बांधे रखा है। हमारे देशवासियों में एक-दूसरे की संस्कृति, कला, संगीत और खान-पान के प्रति प्रेम और रुचि है। मुझे आशा है कि कोरिया से आए हमारे मित्र, आज राष्ट्रपति भवन में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की एक सुंदर झलक देख सकेंगे।

महामहिम,

वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की परिवर्तनकारी यात्रा में आगे बढ़ते हुए, हम “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “हम्क्के” (Hamkke - अर्थात ‘साथ मिलकर’) की भावना के साथ, कोरिया के लोगों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आज आपकी गरिमामय उपस्थिति हमें इस दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करती है।

इन्हीं शब्दों के साथ, महामहिम, देवियो और सज्जनो, आइए हम सब मिलकर:

- कोरिया गणराज्य के महामहिम राष्ट्रपति जी एवं First Lady के अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण,

- कोरिया गणराज्य के लोगों की निरंतर प्रगति और समृद्धि, तथा - भारत और कोरिया गणराज्य के बीच मित्रता को हमेशा बनाये रखने के लिए,

अपनी शुभकामनाएं व्यक्त करें।

धन्यवाद।

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