भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का नासिक त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ 2027 के शुभारंभ समारोह में सम्बोधन(HINDI)
नासिक : 31.10.2026
(124.06 KB)सभी देशवासियों के कल्याण हेतु, मैं प्रभु श्रीराम और प्रभु श्री त्र्यंबकराज से प्रार्थना करती हूं।
आज, सभी देशवासी, आधुनिक भारत की एकता के शिल्पकार, लौह-पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती मना रहे हैं। कृतज्ञ देशवासियों के साथ, भारतमाता के उस महान सपूत को, मैं सादर नमन करती हूं।
देवियो और सज्जनो,
इस परम पावन स्थली पर आकर, मुझे आत्मिक प्रसन्नता और संतोष का अनुभव हो रहा है।
आज मध्याह्न के कुछ क्षणों बाद ही बृहस्पति ने सिंह राशि में प्रवेश किया है। देव-गुरु बृहस्पति सिंहस्थ हुए हैं। इस पवित्र अवसर पर, रामतीर्थ की इस अमृत-स्थली पर, सिंहस्थ महाकुंभ 2027 से जुड़े धर्म ध्वजारोहण तथा अन्य पवित्र अनुष्ठानों में भाग लेने का अवसर मुझे प्राप्त हुआ है। कुशावर्त तीर्थ पर जाने तथा वहां ध्वज स्तम्भ पूजन का सुयोग भी मुझे प्राप्त हुआ है।
त्र्यंबकेश्वर-ज्योतिर्लिंग के दर्शन-पूजन से मैं स्वयं को कृतार्थ अनुभव करती हूं। इन सब आयोजनों के लिए, मैं महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडणवीस जी तथा उनकी पूरी टीम को धन्यवाद देती हूं।
नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ की परंपरा जितनी प्राचीन है उतनी ही समृद्ध भी है। हरिद्वार में गंगा तट पर, प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर, उज्जैन में शिप्रा नदी के तट पर तथा यहां गोदावरी के तट पर आयोजित कुम्भ समागम पूरे विश्व में विख्यात हैं। सदियों से, इन समागमों का निरंतर आयोजन, हमारे देश की पौराणिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक परम्पराओं की शक्ति का प्रमाण है। कुम्भ समागमों की प्राचीन एवं अद्भुत परंपरा से पूरा विश्व समुदाय चकित रहता है।
लगभग 1400 वर्ष पूर्व सम्राट हर्षवर्धन के कुम्भ जैसे धार्मिक मेलों में श्रद्धापूर्वक शामिल होने के उल्लेख ह्वेनसांग के यात्रा वृत्तान्त में प्राप्त होते हैं। सदियों से, असंख्य श्रद्धालुओं का नियत तिथियों पर कुम्भ मेलों में एकत्र होना भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक एकता और निरंतरता का जीवंत प्रमाण है। ये मेले आस्था और सामाजिक समरसता के उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। मुझे विश्वास है कि नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ 2027 हमारी प्राचीन विरासत को आधुनिक आयामों से जोड़ेगा। यह आयोजन हमारी युवा पीढ़ी को भारत की महान विरासत और जीवन-मूल्यों से जोड़ने का एक बहुत अच्छा अवसर सिद्ध होगा।
देवियो और सज्जनो,
महाराष्ट्र की यह भूमि, अमृत-भूमि है। मेरा परम सौभाग्य है कि आज यहां की पवित्र माटी का पावन स्पर्श मुझे प्राप्त हुआ है।
यह शिव-भूमि है। नासिक-त्र्यंबकेश्वर से मानवता के कल्याण हेतु भगवान शंकर के आशीर्वाद की धारा बहती है। आज यहां त्र्यंबकेश्वर-ज्योतिर्लिंग के दर्शन को मैं महादेव की बहुत बड़ी कृपा मानती हूं। मैं देवाधिदेव महादेव को सादर प्रणाम करती हूं।
यह तपो-भूमि है। स्वयं प्रभु श्रीराम ने इस क्षेत्र में तपस्वी का जीवन बिताया था। धर्म के साक्षात स्वरूप प्रभु श्रीराम के चरणों में, मैं श्रद्धापूर्वक शीश नवाती हूं।
यह मां गोदावरी के उद्गम की भूमि है। मां गोदावरी का मां गंगा की बड़ी बहन के रूप में सम्मान किया जाता है। गंगा-यमुना-गोदावरी जैसी नदी माताओं ने भारत की सभ्यता और संस्कृति का निर्माण भी किया है और संरक्षण भी। यहां से देश के पूर्वी तट तक, मां गोदावरी अपनी पवित्र धाराओं से धन-धान्य का आशीर्वाद देती हैं। मैं मां गोदावरी को सादर नमन करती हूं। आज सायंकाल ‘महा गोदावरी आरती’ में भाग लेने का अवसर मुझे मिलेगा। इसके लिए मैं सभी आयोजकों को धन्यवाद देती हूं।
देवियो और सज्जनो,
यह वीर-भूमि है। छत्रपति शिवाजी महाराज की वीरता, आत्म-गौरव एवं देश- प्रेम की गाथाएं सभी देशवासियों को प्रेरित करती हैं। शौर्य का प्रतीक, महाराष्ट्र का सबसे ऊंचा साल्हेर दुर्ग इसी क्षेत्र में है। स्वातंत्र्य वीर सावरकर की जन्मस्थली पर स्थित, ‘सावरकर वाड़ा’ और ‘अभिनव भारत केंद्र’ भारतमाता की संतानों के लिए तीर्थ-स्थल की तरह हैं। देश-प्रेम की जो धारा नासिक से प्रवाहित हुई उसमें चापेकर बंधु, आनंद कन्हेरे और दादासाहेब पोटनीस जैसे भारतमाता के सपूतों का अमूल्य योगदान रहा है।
यह सामाजिक समरसता और सद्भावना की भूमि है। महाराष्ट्र की धरती से संत एकनाथ, संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम, संत नामदेव, महात्मा ज्योतिबा फुले और बाबासाहब भीमराव आंबेडकर जैसी अनेक विभूतियों ने भेद-भाव मुक्त सामाजिक एकता का संदेश प्रसारित किया। महिलाओं की शिक्षा तथा वंचित वर्गों के उत्थान के लिए महाराष्ट्र ने देश को राह दिखाई है। मुझे यह जानकर बहुत प्रसन्नता हुई है कि आज सायंकाल सम्पन्न होने वाली श्री गोदावरी आरती में लगभग 650 गांवों से आमंत्रित, जनजातीय समुदायों के हजारों भाई-बहन भागीदारी करेंगे।
महाराष्ट्र उद्योग भूमि है। देश के कुल औद्योगिक उत्पादन में महाराष्ट्र का योगदान लगभग 15 प्रतिशत है। भारत आज विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था है। इस सफलता के पीछे महाराष्ट्र का बहुत बड़ा योगदान है। इस योगदान के लिए राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्मा जी के मार्गदर्शन में तथा मुख्यमंत्री श्री देवेन्द्र फडणवीस जी के नेतृत्व में प्रगति के पथ पर राज्य और देश को आगे बढ़ाने वाले महाराष्ट्र के निवासियों को मैं साधुवाद देती हूं।
आजकल, पूरे विश्व में, extreme weather conditions के कारण, लोगों को अनेक संकटों का सामना करना पड़ रहा है। हमारे देश में भी, महाराष्ट्र सहित कई क्षेत्रों में, सूखे की स्थिति के कारण, बहुत से लोग, विशेषकर हमारे किसान भाई-बहन, प्रभावित हुए हैं। केंद्र एवं राज्य सरकार पूरी तरह से प्रयासरत हैं कि इन समस्याओं का सामना करने में, देशवासियों को, विशेषकर किसानों को, सम्मान सहित सहायता प्राप्त हो।
स्वच्छता एवं पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता पर जितना जोर दिया जाए वह कम है। मैं सभी देशवासियों से अनुरोध करती हूं कि वे व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर पर्यावरण के संरक्षण हेतु निरंतर प्रयास करते रहें। मैं आशा करती हूं कि यहां आयोजित होने वाले महाकुंभ के दौरान मेला प्रबंधन के प्रयासों और जनभागीदारी के बल पर स्वच्छता और waste management के उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किए जाएंगे।
मैं प्रभु श्रीराम, प्रभु श्री त्र्यंबकेश्वर तथा मां गोदावरी से प्रार्थना करती हूं कि सभी देशवासियों का भविष्य मंगलमय हो। मैं नासिक त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ महाकुंभ 2027 की अभूतपूर्व सफलता की मंगलकामना करती हूं।
धन्यवाद!
जय हिन्द!
जय भारत!
