भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का जनजातीय कार्य मंत्रालय के flagship scholarship योजनाओं के लाभार्थियों के एक समूह को संबोधन(HINDI)
राष्ट्रपति भवन : 02.06.2026
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देश के विभिन्न क्षेत्रों से यहां आए प्रतिभावान युवाओं के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है।
आप आज ‘जनजातीय गरिमा उत्सव’ के अंतर्गत मनाए जा रहे ‘Birsa Lives in New Bharat Week’ में यहां आए हैं। यह सभी देशवासियों के लिए अद्भुत प्रेरणा का विषय है कि भगवान बिरसा मुंडा ने 25 वर्ष से भी कम अवधि के जीवन काल में उलगुलान का नेतृत्व किया। ‘जनजातीय गरिमा उत्सव’ के अंतर्गत भगवान बिरसा मुंडा की विरासत का स्मरण करने और जनजातीय युवाओं को विकसित भारत के लक्ष्य में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित करने के लिए मैं, जनजातीय कार्य मंत्री, श्री जुएल ओराम जी और उनकी टीम की सराहना करती हूं।
आप में से कुछ युवाओं ने अभी अपने अनुभव साझा किए। आपने बताया कि कैसे भारत सरकार की scholarship schemes ने आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। हमारे देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। बस आवश्यकता है सही मार्गदर्शन, सहयोग और उचित मंच प्रदान करने की। आज आपकी उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि यदि अवसर मिले तो हमारे गांवों, दूरस्थ क्षेत्रों और जनजातीय अंचलों से ऐसे युवा निकलकर आएंगे, जो भारत का नाम उज्ज्वल करेंगे।
भारत सरकार जनजातीय समुदायों के युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए अनेक योजनाओं के माध्यम से निरंतर प्रयास कर रही है। छात्रवृत्ति योजनाएं केवल आर्थिक सहायता नहीं हैं। ये युवाओं के सपनों को पंख देने का माध्यम हैं। वे उन युवाओं के जीवन में नई संभावनाओं का द्वार खोलती हैं, जिनमें प्रतिभा तो होती है, परंतु संसाधनों का अभाव उन्हें आगे बढ़ने से रोकता है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि आपमें से अनेक युवाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त की है। कई युवाओं को अन्य देशों के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में भी अध्ययन का अवसर प्राप्त हुआ है। आपने कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए जो उपलब्धियां हासिल की है, वे लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
प्रिय युवाओं,
शिक्षा सशक्तीकरण का महत्वपूर्ण साधन है। शिक्षा ही वह शक्ति है जो व्यक्ति को आत्मनिर्भर, जागरूक और सक्षम बनाती है। मेरी जीवन यात्रा में भी शिक्षा का अहम योगदान है। इसलिए मैं जब भी जनजातीय समाज के लोगों से मिलती हूं उन्हें शिक्षा के महत्व को समझाने का प्रयास करती हूं। आपकी शिक्षा और आपका अनुभव उन बच्चों के लिए प्रेरणा बनना चाहिए, जो सीमित संसाधनों के साथ बड़े सपने देख रहे हैं। जब आप आगे बढ़ेंगे और दूसरों को भी साथ लेकर चलेंगे, तभी सच्चे अर्थों में राष्ट्र का समावेशी विकास संभव होगा।
मुझे इस बात की खुशी है कि यहां उपस्थित युवा अपने परिश्रम और सरकार के सहयोग से अच्छे-अच्छे पदों पर कार्य कर रहे हैं। मैं हमेशा कहती हूं हम जिस स्तर से यहां पहुंचे हैं उसको भूलना नहीं चाहिए। हमने जो कष्ट झेलें हैं वो और लोग न झेलें इसके लिए हमें प्रयास करना चाहिए। बड़ा बनना अच्छी बात है लेकिन समाज में पीछे रह गए लोगों को कभी भूलना नहीं चाहिए। अपने सामर्थ्य के अनुसार उनको आगे बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। देश का समग्र विकास तब होगा जब देश के सभी स्तर के लोग आगे बढ़ेंगे।
जीवन में अनेक चुनौतियां आती हैं। आपको भी कभी-कभी परिस्थितियाँ कठिन लगेंगी और आपका आत्मविश्वास डगमगाएगा। लेकिन ऐसी परिस्थितियों में आपको नैतिकता का साथ नहीं छोड़ना है और आगे बढ़ते रहना है।
जनजातीय समाज के हमारे पूर्वजों ने अपनी संस्कृति और अस्मिता की रक्षा के लिए अनेक संघर्ष किए हैं और बलिदान दिए हैं। यह प्रसन्नता का विषय है कि जनजातीय कार्य मंत्रालय जनजातीय समुदायों की समृद्ध विरासत, अदम्य साहस और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान का सम्मान करने के उद्देश्य से ‘जनजातीय गरिमा उत्सव’ मना रहा है। युवाओं की जिम्मेदारी है कि विकास की धारा में शामिल होते हुए भी वे उस विरासत को सहेजें और उसका सम्मान करें।
युवा, हमारे राष्ट्र की शक्ति, आशा और उज्ज्वल भविष्य के प्रतीक हैं। मेरी सभी युवाओं, विशेषकर जनजातीय समुदाय के युवाओं, से अनुरोध है कि उन्हें अपनी जड़ों और अपने लोगों को नहीं भूलना चाहिए। युवा शक्ति विरासत पर गर्व करते हुए आधुनिक शिक्षा और तकनीक के बल पर आगे बढ़े तब सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण होगा।
हम भारत को वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इस लक्ष्य की प्राप्ति में आप जैसे युवाओं की अहम भूमिका है। मुझे विश्वास है कि आप जिस भी क्षेत्र में कार्य करेंगे वहां समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान देते रहेंगे।
मैं आप सभी के उज्ज्वल भविष्य की हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं।
धन्यवाद, जय हिन्द! जय भारत!
