भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के 50वें दीक्षांत समारोह में सम्बोधन(HINDI)

अमृतसर : 15.01.2026

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आज पवित्र शहर अमृतसर में आप सब के बीच उपस्थित होकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। स्वर्ण मंदिर, दुर्ग्याणा मंदिर और जलियांवाला बाग के इस शहर का हम सभी देशवासियों के दिलों में महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के शहर में स्थित विश्वविद्यालय में अध्ययन और अध्यापन का अवसर मिलना आप सबके लिए सौभाग्य की बात है।

मुझे बताया गया है कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना श्री गुरु नानक देव जी के 500वें प्रकाश वर्ष में हुई थी। गुरु नानक जी की शिक्षाएं और मूल्य इस विश्वविद्यालय के मार्गदर्शक सिद्धान्त हैं। गुरु नानक देव जी की शिक्षाएं हमारी साझा धरोहर हैं तथा उनके विचार और आदर्श पूरी मानवता के कल्‍याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने मानवता को ‘नाम जपो, किरत करो और वंड छको’ का महामंत्र दिया। इसका अर्थ है - ईश्वर का नाम जपो, ईमानदारी और मेहनत से अपना काम करो, और जो आपके पास है, दूसरों के साथ मिल- बांटकर उसका उपयोग करो। उनके ये आदर्श लोगों को समाज के कमजोर वर्ग के प्रति संवेदनशील बनने और जन-कल्याण के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित करते हैं। उनके आदर्शों को अपने जीवन में ढालकर हम समाज में व्याप्त अनेक समस्याओं का समाधान प्राप्त कर सकते हैं। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, उन महान संत की शिक्षाओं और मूल्यों का अनुसरण करते हुए शिक्षा की ज्योति जला रहा है।

गुरु नानक जी ने महिलाओं को समाज में समान अधिकार देने की शिक्षा दी थी। आज उपाधि और पदक पाने वाले विद्यार्थियों में बेटियों का वर्चस्व देखकर मुझे यह विश्वास हो रहा है कि गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, गुरु नानक जी द्वारा दी गई शिक्षा के अनुसार महिला सशक्तीकरण के लिए प्रयासरत है। महिलाओं को पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के अवसर मिलें, यह समाज और राष्ट्र के हित में है और इसके लिए सभी को प्रयास करना चाहिए।

प्यारे विद्यार्थियो,

दीक्षांत समारोह का यह अवसर आपके जीवन में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह उपलब्धि वर्षों की आपकी साधना का परिणाम है। मैं आज पदक और उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देती हूं। यह उपलब्धि आपके माता-पिता, अभिभावकों और शिक्षकों की भी है, जिनके मार्गदर्शन और प्रोत्साहन ने आपकी शैक्षणिक यात्रा को दिशा दी है। यह अवसर उनके प्रति आभार प्रकट करने का भी है।

औपचारिक शिक्षा पूर्ण होने के बाद आप अलग-अलग दिशाओं में अपनी यात्रा शुरू करेंगे। कुछ विद्यार्थी सरकारी या निजी क्षेत्र में सेवा देंगे, अन्य उच्च शिक्षा या शोध में आगे बढ़ेंगे, कई विद्यार्थी अपना उद्यम स्थापित करेंगे या फिर शिक्षण में अपना भविष्य बनाएँगे। सभी क्षेत्रों में अलग–अलग प्रकार की योग्यता और कौशल की आवश्यकता होती है, लेकिन कुछ गुण ऐसे हैं जो हर क्षेत्र में प्रगति के लिए समान रूप से आवश्यक और सहायक होते हैं। वे हैं

सदैव सीखते रहने की इच्छा और प्रवृत्ति;

विपरीत और कठिन परिस्थितियों में भी नैतिक मूल्यों, सत्यनिष्ठा और ईमानदारी का दृढ़ता से पालन;

परिवर्तन को स्वीकार करने का साहस;

असफलताओं से सीखकर आगे बढ़ने का संकल्प;

टीमवर्क और सहयोग की भावना;

समय और संसाधनों का अनुशासित ढंग से प्रयोग; तथा ज्ञान और क्षमता का उपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के व्यापक हित में करना

ये सभी गुण आपको केवल एक अच्छा professional ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक भी बनाएँगे।

प्यारे विद्यार्थियो,

शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं है। यह समाज और राष्ट्र की सेवा करने का भी साधन है। आपकी शिक्षा में समाज का भी योगदान है जो आपके उपर एक ऋण है। यह ऋण आप कैसे लौटाएँगे यह आपको तय करना है। विकास यात्रा में आपसे पीछे रह गए लोगों को साथ लाने का आपका प्रयास, एक अच्छा तरीका हो सकता है।

पिछले एक दशक में भारत ने technology-development और entrepreneurship-culture के क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज Agriculture से AI तक और Defence से Space तक उद्यम के अनेक अवसर युवाओं के लिए उपलब्ध हो रहे हैं। Research को बढ़ावा देकर, Industry-Academia सहयोग को मजबूत करके तथा socially-relevant innovations को प्रोत्साहित करके हमारे उच्च शिक्षण संस्थान इस प्रगति को और गति प्रदान कर सकते हैं। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि इस विश्वविद्यालय का Golden Jubilee Center for Entrepreneurship and Innovation स्थानीय और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देने हेतु कार्यरत है।

पंजाब एक कृषि प्रधान राज्य है। यहां कृषि-व्यवसाय में research और innovation की अपार संभावनाएं हैं। मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि गुरु नानक देव विश्वविद्यालय इस क्षेत्र में सजग प्रयास कर रहा है।

यह बहुत ही प्रसन्नता की बात है कि शिक्षा के साथ-साथ यह विश्वविद्यालय खेल-कूद को भी प्रोत्साहित करने में आगे रहता है। इस विश्वविद्यालय के खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय खेल-प्रतिस्पर्धाओं के विभिन्न मंचों पर भारत का नाम ऊंचा किया है। मैं खिलाड़ियों और विश्वविद्यालय की पूरी टीम की सराहना करती हूं।

देवियो और सज्जनो,

विश्वविद्यालय केवल उपाधि प्रदान करने के केंद्र नहीं होते, बल्कि वे समाज- निर्माण के केंद्र भी होते हैं। पिछले कुछ वर्षों में पंजाब में नशाखोरी की समस्या एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी है, जिसका सबसे अधिक प्रभाव युवाओं पर पड़ रहा है। यह समस्या स्वास्थ्य के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक और नैतिक ताने-बाने को भी प्रभावित कर रही है। इसका स्थायी समाधान एक स्वस्थ समाज के लिए आवश्यक है। इस संदर्भ में गुरु नानक देव विश्वविद्यालय जैसे शिक्षण संस्थानों की भूमिका अहम है। इस विश्वविद्यालय के सभी भागीदारों को भटके हुए युवाओं को सही दिशा दिखाने के यथासंभव प्रयास करने चाहिए।

अगले दो दशक, वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। आज के युवा अगले दो दशकों में विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे होंगे, नेतृत्व कर रहे होंगे। युवा शक्ति की ऊर्जा को देश के विकास में लगाने के लिए हमारे उच्च शिक्षण संस्थाओं को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है।

प्यारे विद्यार्थियो,

भारत का भविष्य ऐसे युवाओं पर निर्भर है जो वैज्ञानिक सोच रखने वाले हों, ज़िम्मेदारी से कार्य करें और निःस्वार्थ भाव से सेवा करें। मेरा सभी युवाओं से अनुरोध है कि आप जो भी कार्य चुनें, यह सुनिश्चित करें कि आपका योगदान राष्ट्र को सुदृढ़ बनाएगा और मानवीय मूल्यों को मजबूत करेगा। मुझे विश्वास है कि आप भारत को और अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी और प्रगतिशील राष्ट्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य के साथ जीवन में आगे बढ़ेंगे। मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

धन्यवाद,
जय हिंद!
जय भारत!

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