भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का एकीकृत जनजातीय विकास संस्थाओं और एकीकृत जनजातीय विकास परियोजनाओं के राष्ट्रीय सम्मेलन में सम्बोधन(HINDI)
नई दिल्ली : 03.06.2026
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जनजातीय समुदायों के समग्र विकास को समर्पित संस्थाओं के इस नेशनल कॉन्क्लेव में आज आपके बीच आकर मुझे बहुत खुशी हो रही है।
यह सम्मेलन tribal change agents का सम्मेलन है। आप सब पर जनजातीय समुदायों के कल्याण और विकास कार्यक्रमों को उनके गांव और घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी है। ऐसा करके आप सब जनजातीय समुदायों के भाई-बहनों के जीवन में बहुत अच्छा बदलाव ला सकते हैं।
Field level तक tribal development की जिम्मेदारी निभाने वाले लोगों को एक national platform पर एक साथ लाने के लिए मैं जनजातीय कार्य मंत्री, श्री जुएल ओराम जी और उनकी पूरी टीम की सराहना करती हूं। राज्य स्तर पर तथा project level पर काम करने वाले सभी लोग जब एक बड़े उद्देश्य के साथ एक साथ विचार-विमर्श करेंगे तो निश्चय ही अनेक उपयोगी समाधान सामने आएंगे। हम वर्ष 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। जनजातीय लोगों के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं लेकिन उनको इस बारे में आज भी जानकारी नहीं है। आदिवासी समुदाय सांस्कृतिक रूप से धनी है। वे स्वावलंबी हैं, स्वाभिमानी हैं। आदिवासी समुदाय को देश की प्रगति के लिए मुख्य धारा में लाना होगा। मुझे खुशी है कि सरकार उनके द्वार तक योजनाओं को ले जा रही है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि इस conclave में tribal development से जुड़ी संस्थाओं और मानव संसाधन के विकास से लेकर वित्तीय व्यवस्थाओं तक; तथा monitoring से लेकर scheme delivery तक, अत्यंत महत्वपूर्ण आयामों पर चर्चा होगी। मुझे आशा है कि सभी agencies और projects में कार्यरत लोग सुविचारित निर्णयों के आधार पर आगे बढ़ेंगे। इससे जनजातीय समुदायों के प्रत्येक व्यक्ति तक विभिन्न योजनाओं का लाभ पहुंच सकेगा।
देवियो और सज्जनो,
जनजातीय समुदायों के अनेक गांव और बस्तियां दूर-दराज के क्षेत्रों में, जंगलों और पहाड़ी इलाकों में होते हैं। ऐसे इलाकों को विकास की मुख्यधारा से पूरी तरह जोड़ना आपका कर्तव्य है। अंतिम गांव और अंतिम बस्ती के अंतिम घर तक विकास कार्यक्रमों को पहुंचाना आपका उत्तरदायित्व है।
PM-JANMAN योजना के तहत जनजातीय समुदायों में भी सबसे पिछड़े समूहों के 20 हजार से अधिक गांवों तक विकास कार्यक्रमों को पहुंचाने का लक्ष्य है। हम सब जानते हैं कि 75 PVTGs के लोगों के पास जमीन नहीं होती है। इसलिए उनके लिए घर बनाना सरकार का दायित्व है। भारत के समग्र विकास के लिए इनको आगे बढ़ाना आवश्यक है। मैं जनजातीय समुदाय के लोगों से कहती हूं कि आपको चलना सीखना होगा, दौड़ना सीखना होगा, उड़ना सीखना होगा। लेकिन कैसे चलना है वह उन्हें हमें सिखाना होगा। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान से भी जनजातीय क्षेत्रों में सराहनीय प्रगति हो रही है। मैं सोचती हूं कि इन महत्वाकांक्षी योजनाओं के लाभ को प्रभावी रूप से जन-जन तक पहुंचाने का कार्य करके आप सब बहुत संतोष का अनुभव करेंगे, सार्थकता का अनुभव करेंगे।
Public Administration तथा Management के क्षेत्र में एक बात कही जाती है: Learn from the field before deciding for the field. मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि इस national conclave की तैयारी की प्रक्रिया में state level workshops आयोजित किए गए तथा field level के विषयों को समझा गया। मुझे बताया गया है कि उन सभी अनुभवों पर समग्र रूप से विचार करके एक national roadmap बनाया जाएगा।
आप सबको इस बात पर ध्यान केन्द्रित करना है कि हर project की file और document का उद्देश्य किसी मनुष्य की सहायता करना है। सभी agencies और projects से जुड़े लोगों को यह सोचना है कि प्रत्येक गर्भवती मां को पर्याप्त पोषण मिले, प्रत्येक जनजातीय बच्चे को अच्छे स्कूल में शिक्षा मिले, प्रत्येक जनजातीय युवा को गरिमापूर्ण आजीविका प्राप्त हो और प्रत्येक जनजातीय परिवार कल्याण तथा विकास के कार्यक्रमों से लाभान्वित हो। ऐसी संवेदनशील सोच के साथ सभी agencies और projects से जुड़े लोगों को काम करना है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि आधुनिक विकास के प्रयासों के साथ- साथ जनजातीय समुदायों की संस्कृतियों और ज्ञान-परंपराओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जनजातीय समुदाय की कला और उत्पादों का सही मूल्यांकन किया जाना चाहिए। मेरा अनुरोध कि उनकी कलाओं से कैसे उनका व्यक्तिगत और आर्थिक विकास किया जाए, यह देखना चाहिए। इस विशेषता को संरक्षित रखना है तथा इसे सभी देशवासियों में प्रसारित करना है।
हर वर्ष 15 नवंबर को भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के दिन ‘जनजातीय गौरव दिवस’ मनाने की परंपरा अब सुदृढ़ हो चुकी है। आजकल जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा ‘जनजातीय गरिमा उत्सव’ मनाया जा रहा है। उत्सव मनाने के साथ-साथ उनकी गरिमा भी बढ़ानी है। इस उत्सव के अंतर्गत कल तक ‘Birsa Lives in New Bharat Week’ मनाया गया। जनजातीय गौरव के अनेक ऐतिहासिक, परंपरागत, प्राकृतिक और आधुनिक आयाम हैं। इस संदर्भ में, मैं जनजातीय समुदायों में खेल-कूद की प्रतिभा का उल्लेख करना चाहूंगी। इस वर्ष ‘खेलो इंडिया जनजातीय खेल 2026’ का आयोजन किया गया था। जनजातीय लोग खेल-कूद में बहुत ही talented होते हैं। उनको खेलने में खुशी मिलती है। उनको प्रोत्साहित करने की जरूरत है। इससे वे खुद के साथ-साथ देश का भी नाम रोशन करेंगे। इस आयोजन की प्रक्रिया में जमीनी स्तर के जनजातीय खिलाड़ियों को भी पहचान मिली, प्रोत्साहन मिला। खेल-कूद में आगे रहने वाले व्यक्ति और समुदाय समग्र विकास की दौड़ में भी आगे रहते हैं।
व्यक्ति और समाज की प्रगति में शिक्षा के महत्व पर जितना भी जोर दिया जाए वह कम है। जनजातीय समुदाय के बच्चों और युवाओं की शिक्षा और कौशल विकास को आप सब तन-मन-धन से अपना योगदान दीजिए। मुझे यह तथ्य साझा करके प्रसन्नता होती है कि लगभग 500 एकलव्य मॉडल रेजीडेंशियल स्कूल स्थापित किए जा चुके हैं। कल ही राष्ट्रपति भवन में, मुझे जनजातीय समुदाय के लगभग 200 ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं से मिलने का अवसर प्राप्त हुआ जिन्हें जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा विशेष छात्रवृत्तियां प्रदान की गई हैं। उनमें अनेक युवा विश्व-स्तर पर अपनी पहचान बनाने की क्षमता रखते हैं। ऐसे युवाओं को निरंतर प्रोत्साहित करना सभी देशवासियों का कर्तव्य है, विशेषकर आप सबका जो जनजातीय समुदाय के कल्याण तथा विकास के लिए ही कार्यरत हैं।
शिक्षा और स्वास्थ्य के बल पर ही किसी भी व्यक्ति या समुदाय का विकास संभव होता है। जनजातीय समुदायों के स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियों में sickle cell anaemia पर नियंत्रण पाना एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है। राष्ट्रीय sickle cell anaemia उन्मूलन मिशन के तहत सात करोड़ से अधिक screening की जा चुकी है। इस मिशन को पूरी तरह से सफल बनाने के लिए आप सब हर संभव प्रयास कीजिए।
देवियो और सज्जनो,
सभी देशवासी वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। जनजातीय समुदायों का समग्र विकास इस लक्ष्य का अभिन्न अंग है। जनजातीय समुदायों का समग्र विकास ही देश के विकास को समावेशी विकास का स्वरूप प्रदान करेगा। मैं आशा करती हूं कि इस conclave से जो सुझाव, निष्कर्ष और roadmap सामने आएंगे उनसे जनजातीय समुदायों के समग्र विकास की योजनाओं को जमीनी स्तर पर कार्यरूप दिया जा सकेगा। मुझे विश्वास है कि आप सब अपनी निष्ठा और प्रयासों से प्रत्येक जनजातीय परिवार के जीवन में विकास का दीपक जलाएंगे। जनजातीय विकास के अभियान को अंत्योदय की भावना के साथ आगे बढ़ाना है ताकि कोई भी जनजातीय परिवार या व्यक्ति कल्याण और विकास की परिधि से बाहर न रहे।
मेरी शुभकामना है कि इस सम्मेलन के सभी प्रतिभागी व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से जनजातीय कल्याण और विकास के सराहनीय उद्देश्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण योगदान दें। मैं आप सबके स्वर्णिम भविष्य की मंगलकामना करती हूं।
धन्यवाद!
जय हिंद!
जय भारत!
