भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का बस्तर के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात के अवसर पर संबोधन (HINDI)
राष्ट्रपति भवन : 30.07.2026
(106.72 KB)बस्तर संभाग से आए हुए बस्तर पंडुम 2026 के विजेता दल, निर्णायक मंडल में शामिल परगना मांझी, चालकी, समाज प्रमुख तथा अन्य सम्मानित अतिथियों का मैं हार्दिक स्वागत करती हूं। बस्तर के लोगों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के इस प्रयास के लिए और उनके प्रोत्साहन के लिए मैं केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी और उनकी पूरी टीम की सराहना करती हूँ।
इस वर्ष फरवरी में आयोजित बस्तर पंडुम का शुभारंभ करने का अवसर मुझे प्राप्त हुआ था। यह उत्सव छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव है। इस वर्ष तिरपन हजार से अधिक लोगों ने इसमें भाग लिया। उस अवसर पर जनजातीय नृत्य, गीत- संगीत, शिल्पकला, चित्रकला, जनजातीय साहित्य तथा अन्य विधाओं के प्रदर्शनों को देखकर मैं अत्यंत प्रभावित हुई थी। मुझे विश्वास है कि स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और युवाओं की प्रतिभा तथा सृजनशीलता बस्तर की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाएगी।
‘पंडुम’ शब्द का प्रयोग बस्तर की जनजातीय बोलियों में उत्सव, पर्व और सामूहिक आनंद के अर्थ में किया जाता है। बस्तर पंडुम केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि बस्तर की गौरवशाली परंपराओं और सांस्कृतिक अस्मिता का उत्सव है। इसका उद्देश्य बस्तर की वास्तविक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करना है।
बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने युवाओं को अपनी परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत से पुनः जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। साथ ही, पर्यटन को बढ़ावा मिलने तथा स्थानीय स्तर पर नए रोजगार के अवसर सृजित होने से क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी नई गति मिली है।
देवियो और सज्जनो,
बस्तर संभाग में मांझी और चालकी सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे समाज और प्रशासन के बीच एक प्रभावी सेतु के रूप में कार्य करते हैं। वे बस्तर पंडुम और बस्तर दशहरा जैसे आयोजनों की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। मुझे विश्वास है कि आप सभी अपने समर्पण और नेतृत्व से समाज में सुख- शांति और समृद्धि के लिए कार्य करते रहेंगे।
सरकार के प्रयासों और बस्तर के लोगों की सक्रिय भागीदारी से आज बस्तर क्षेत्र विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। लोग हिंसा के वातावरण से निकलकर शिक्षा, रोजगार और विकास के नए अवसरों से जुड़ रहे हैं। यह परिवर्तन बस्तर के उज्ज्वल भविष्य का शुभ संकेत है। दूर-दराज के गांवों तक सड़क, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाएं पहुंच रही हैं। लंबे समय तक बंद रहे विद्यालयों में फिर से बच्चों की चहल-पहल दिखाई दे रही है और शिक्षा का प्रकाश घर-घर तक पहुंच रहा है। आज बस्तर में आशा, विश्वास और प्रगति का एक नया वातावरण निर्मित हो रहा है। यह परिवर्तन पूरे देश के लिए प्रसन्नता और गर्व का विषय है।
देवियो और सज्जनो,
मुझे प्रसन्नता है कि हमारे जनजातीय युवा शिक्षा, खेल, विज्ञान, कला और उद्यमिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रहे हैं। यह उनकी क्षमता, परिश्रम और दृढ़ संकल्प का प्रमाण है। मुझे विश्वास है कि जनजातीय समाज के भाई-बहन अपनी सांस्कृतिक अस्मिता का संरक्षण करते हुए विकास की इस यात्रा में अपनी भागीदारी को बढ़ाएंगे तथा राष्ट्र- निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देते रहेंगे।
हम सभी का दायित्व है कि समाज में सद्भाव और सहयोग की भावना को और मजबूत करें। विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों तथा वंचित वर्गों के सम्मान और सशक्तीकरण के लिए मिलकर कार्य करें। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण, जल-संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाएं।
मुझे विश्वास है कि छत्तीसगढ़ के लोग अपनी सामूहिक शक्ति, परिश्रम और संकल्प के बल पर विकास, शांति और समृद्धि के नए आयाम स्थापित करेंगे। मैं बस्तर और छत्तीसगढ़ की निरंतर प्रगति की हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं। आप सभी के उज्ज्वल भविष्य की मैं मंगलकामना करती हूँ।
धन्यवाद!
जय हिन्द!
जय भारत!
