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Speeches

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का चौधरी हरमोहन सिंह यादव के जन्म-शताब्दी समारोह के अवसर पर संबोधन

कानपुर : 24.11.2021
भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का चौधरी हरमोहन सिंह यादव के जन्म-शताब्

श्री हरमोहन सिंह यादव जी के जन्म-शताब्दी समारोह के संबंध में श्री सुखराम सिंह यादव दिल्ली में मुझसे आकर मिले थे। उन्होंने चौधरी हरमोहन सिंह यादव जन कल्याण समिति द्वारा किए जा रहे गरीब-हितैषी कार्यों के बारे में मुझे बताया और इस समारोह के लिए आमंत्रित किया। मैं श्री हरमोहन सिंह जी की सादगी, समाज सुधार संबंधी विचारों और कार्यों से भली-भांति अवगत रहा हूं इसलिए, आज उनकी जन्म-शताब्दी के इस कार्यक्रम में शामिल होकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई है।

हम सब जानते हैं कि आज़ादी के बाद का समय, नए भारत के निर्माण की दृष्टि से बहुत चुनौतीपूर्ण समय था। वह भारत के लिए, पुन: उठकर खड़े होने का समय था। राष्ट्र-निर्माण के इस कार्य में ग्रामीण और कृषि विकास की तथा ग्राम-पंचायतों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होने वाली थी। इन परिस्थितियों में, भारत के गांव-गांव से श्री हरमोहन सिंह यादव जैसे समाज-सेवी देश के विकास के लिए आगे आए।

श्री हरमोहन सिंह को वर्ष 1952 में, ग्राम प्रधान चुना गया। उसके बाद वे, जन-सेवा के मार्ग पर लगातार आगे बढ़ते गए और उन्होंने, ग्राम सभा से लेकर राज्य सभा तक की सफल यात्रा पूरी की। वे, दो बार राज्य सभा के सदस्य रहे और हम दोनों ने अनेक बार संसद के कार्य-कलापों में साथ-साथ भाग लिया। राज्य सभा के काम-काज में भाग लेने के लिए, मेरा, कानपुर से दिल्ली और दिल्ली से कानपुर आना-जाना होता रहता था। हम दोनों प्राय: रेलगाड़ी में एक साथ यात्रा करते थे। इन यात्राओं के दौरान, मुझे उन्हें निकटता से जानने और उनके अनुभवों से समृद्ध होने का अवसर प्राप्त हुआ।

श्री हरमोहन सिंह का जीवन सादगी और जन-सेवा का उत्तम उदाहरण है। वे हर स्तर पर लोगों, विशेषकर किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए प्रयत्नशील रहे। विधान-सभा से लेकर राज्य-सभा तक में खेती-किसानी के बारे में उनके विचारों को बहुत गंभीरता से सुना जाता था।

श्री हरमोहन सिंह के घर के दरवाजे सभी के लिए खुले रहते थे। वर्ष 1984 में, उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। अपनी जान जोखिम में डालकर भी उन्होंने उन्मादी भीड़ का डटकर मुकाबला किया और बड़ी संख्या में लोगों की प्राण-रक्षा की। अपने इस सराहनीय कार्य से उन्होंने, अमर शहीद श्री गणेश शंकर विद्यार्थी की परंपरा को आगे बढ़ाया। वर्ष 1991 में, भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री आर. वेंकटरमण ने असाधारण वीरता और निडरता के लिए श्री हरमोहन सिंह यादव को शौर्य-चक्र से सम्मानित किया। ऐसे असाधारण शौर्यवान, श्रेष्ठ समाज-सेवी और जन-सेवक की स्मृति को मैं नमन करता हूं।

देवियो और सज्जनो,

श्री हरमोहन सिंह जी के जन्म-शताब्दी समारोह में हम लोग जहां पर एकत्र हैं, वह एक शिक्षा संस्थान है, विद्या का मंदिर है। उनकी प्रेरणा और प्रयासों से इस संस्थान सहित अनेक शैक्षिक संस्थानों की स्थापना की गई, जिनसे इस क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार को बढ़ावा मिला। वे यह जानते थे कि शिक्षा हर परिवार की, हर समाज की प्रगति का आधार होती है। वे यह भी समझते थे कि शिक्षा दूसरों के जीवन में सुधार लाने और अपने समाज को, अपनेदेश को बेहतर बनाने का सर्वश्रेष्ठ साधन है।

शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने अनेक विशिष्ट उपलब्धियां हासिल की हैं और प्रदेश के शैक्षिक मानचित्र पर कानपुर का विशेष स्थान है। आई.आई.टी. और एनएसआई जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान, तीन-तीन विश्वविद्यालय, तीन मेडिकल कॉलेज और सैकड़ों शिक्षा संस्थानों के कारण कानपुर में जितनी अधिक शैक्षिक सुविधाएं मौजूद हैं, देश के प्रति उतनी ही अधिक जिम्मेदारी भी इस पर है। यहां पर, कुछ शिक्षा संस्थाएं तो 100 वर्ष से भी अधिक समय से काम कर रही हैं। मुझे प्रसन्नता है कि कल मैं एच.बी.टी.यू. के शताब्दी समारोह में शामिल रहूंगा और वहां शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से भेंट करूंगा। भारत की विकास यात्रा में शिक्षकों और युवाओं की प्रभावशाली भूमिका रही है और आने वाले समय में, देश के भविष्य को संवारने में भी उनकी महत्वपूर्ण भागीदारी होगी।

देवियो और सज्जनो,

आज मैं आपके साथ, जन-जागरण के एक महत्वपूर्ण प्रकल्प के बारे में भी बात करना चाहता हूं। आप जानते हैं कि भारत की आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने वाले हैं और इस समय पूरे देश में आज़ादी का अमृत महोत्सवमनाया जा रहा है। आज़ादी की लड़ाई में हजारों सेनानियों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। इनमें से अनेक बलिदानियों के नाम हम जानते हैं, लेकिन बहुतों के नाम इतिहास के पन्नों में कहीं गुम हो गए हैं। दो वर्ष तक चलने वाले इस महोत्सव के दौरान हम स्वाधीनता संग्राम के इन गुमनाम सेनानियों के योगदान का स्मरण करेंगे।

भारत के स्वाधीनता संग्राम में उत्तर प्रदेश और कानपुर के लोगों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कानपुर में 1857 के स्वाधीनता संग्राम का नेतृत्व करने वाले नानाजी पेशवा, तात्या टोपे और अजीम उल्ला खान की वीरता की गाथा आपने सुनी होगी, लेकिन अजीजन बाई और मैनावती जैसों के योगदान से लोग अच्छी तरह परिचित नहीं हैं। हमारी वर्तमान और भावी पीढ़ियों के समक्ष स्वाधीनता संग्राम की इन वीरांगनाओं के त्याग और बलिदान की प्रेरक गाथा रखी जानी चाहिए।

इसी प्रकार, चंद्र शेखर आज़ाद और सरदार भगत सिंह के साथ नगर के जुड़ाव को बहुत लोग जानते हैं, परन्तु उनके अभिन्न सहयोगी रहे जयदेव कपूर और शिव वर्मा के बारे में कम लोग जानते हैं। वे यहीं डी.ए.वी. कॉलेज में पढ़ते थे। यहीं कानपुर में जन्मे स्वाधीनता सेनानी श्री बिजय कुमार सिन्हा और डॉ. गया प्रसाद के बारे में भी लोग बहुत कम जानते हैं। यहां पर मैंने कुछ नामों का ही उल्लेख किया है। न जाने कितने ऐसे स्वाधीनता सेनानियों के महत्वपूर्ण योगदान से भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हो सकी थी। इसलिए, हम सबका कर्तव्य है कि ऐसे गुमनाम स्वाधीनता सेनानियों के योगदान के बारे में जानकारी लोगों के सामने लाई जाए।

देवियो और सज्जनो,

आज भारत को और भारतीयों को पूरी दुनिया में आदर प्राप्त हो रहा है। इस महान देश का राष्ट्रपति होने के नाते मैं जहां-कहीं भी जाता हूं, वहां मुझे लोगों का स्नेह और सम्मान प्राप्त होता है। परंतु, कानपुर की बात ही अलग है। आप लोगों का स्नेह और लगाव मेरे लिए बहुत मायने रखता है। मेरी पढ़ाई-लिखाई यहीं हुई और इसी धरती के आशीर्वाद से मैं देश का प्रथम नागरिक बना। कानपुर मेरा अपना है और मैं कानपुर का अपना हूं। यहां की स्मृति, मेरे हृदय से न तो कभी दूर हुई है और न होगी।

देवियो और सज्जनो,

किसी भी राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव, अतीत के अनुभव और पूर्वजों की विरासत से मजबूती प्राप्त करती है। एक सुदृढ़, यशस्वी, विकसित और समृद्ध भारत के निर्माण में हम सब की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। हमें मिल-जुलकर प्रयास करने चाहिए। हमारे देश का हर एक हाथ - देश की उन्नति में एक साथ उठना चाहिए। विश्व के अग्रणी राष्ट्रों की पंक्ति में शामिल होने के लिए 130 करोड़ देशवासियों के क़दम एक साथ आगे बढ़ने चाहिए।

अपने गांव, समाज और देश की प्रगति में तथा किसान-मजदूर और गरीबों के उत्थान में महत्वपूर्ण योगदान करने वाले लोकप्रिय जन-सेवक श्री हरमोहन सिंह यादव की स्मृति को संजोने का सबसे अच्छा तरीका यही होगा कि हम सब भी राष्ट्र-निर्माण के लिए अपने देशवासियों के साथ, क़दम से क़दम मिलाकर आगे बढ़ें।

मेरी शुभकामनाएं आप सबके साथ हैं।

धन्यवाद
जयहिन्द!
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