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Speeches

भारत के राष्‍ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्‍द का 34वें सूरजकुण्ड अन्तरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला, 2020 के उद्घाटन के अवसर पर सम्‍बोधन

सूरजकुण्ड, फरीदाबाद : 01.02.2020
भारत के राष्‍ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्‍द का 34वें सूरजकुण्ड अन्तरराष्ट्रीय हस्

1. सूरजकुण्ड अन्तरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला, 2020 के उद्घाटन समारोह में आप सबके बीच आकर मुझे बहुत खुशी हो रही है। यह मेला भारत के लोगों के कला-कौशल, प्रतिभा और उद्यमशीलता के प्रदर्शन का एक स्थापित मंच बन गया है। मैं देश के विभिन्न राज्यों और विदेश से आये सभी शिल्पकारों और कलाकारों को बधाई देता हूं।

2. मुझे बताया गया है कि 1987 में इस मेले का पहली बार आयोजन किया गया था।मेले का आयोजन विलुप्त हो रहे हस्तशिल्प और हथकरघा की विशेष कला-विधाओं को संरक्षित करने और बढ़ावा देने तथा कारीगरों को उनके काम को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से उचित मंच प्रदान करने के लिए किया जाता रहा है।पिछले तैतीस वर्षों से निरन्तर, इस मेले में आगंतुकों और शिल्पकारों की संख्या बढ़ती गई है। इस मेले की बढ़ती लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि यह मेला वास्तव मेंभारत के हस्तशिल्प,हथकरघा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की विविधता को उपयोगी व रोचक तरीके से प्रदर्शित करता है। यह मेला केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के पर्यटकों का ध्यान आकर्षित करता है।

3. हम सभी जानते हैं, भारत त्योहारों और मेलों का देश है। इस मेले में शिल्पकारों और हथकरघा कारीगरों के अलावा विविध अंचलों के पहनावों, लोक-कलाओं और लोक-व्यंजनों के अतिरिक्त, लोक-संगीत और लोक-नृत्यों का भी संगम होता है। इस मेले में भारत के गांव की खुशबू और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक परम्परा के विविध रंग, यहां आने वालों को हमेशा आकर्षित करते हैं।

देवियो और सज्जनो,

4. इस मेले में प्रत्येक वर्ष भारत का कोई एक राज्य "थीम स्टेट" और कोई एक देश ‘पार्टनर नेशन’ होता है। किसी एक राज्य को थीम बना कर उसकी कला, संस्कृति, सामाजिक परिवेश और परंपराओं को प्रदर्शित किया जाता है। इस वर्ष हिमाचल प्रदेश "थीम स्टेट" और उज्बेकिस्तान ‘पार्टनर नेशन’ है। इस मेले में देवभूमि हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक कला को विशेष रुप से दर्शाया जा रहा है।

5. This fair also presents an excellent opportunity to witness the rich culture and the traditional art forms of Uzbekistan. India and Uzbekistan share strong cultural and diplomatic ties. Our geographical boundaries are not contiguous but our hearts are united together. Due to close partnership between the two countries in the areas of culture, art and agriculture, the people of Uzbekistan and India enjoy the warmth of closeness.

देवियो और सज्जनो,

6. हिमाचल का कुल्लू दशहरा हो या हरियाणा का यह सूरजकुण्ड मेला, पिछले कुछ वर्षों में इन त्योहारों और मेलों ने देश और विदेश के पर्यटकों को आकर्षित किया है।भारत के सभी त्योहार और मेले हमारी सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पारंपरिक उल्लास के प्रतीक तो हैं ही, इनका हमारी अर्थव्यवस्था से भी गहरा सम्बन्ध है।

7. इस मेले में शिल्पकारों और बुनकरों की उत्साही भागीदारी को देखकर मुझे खुशी हो रही है। इस तरह के अवसर पर साधारण शिल्पकार और कारीगर को भी अपने हुनर की वास्तविक पहचान और कीमत मिल पाती है। यह मेला उन्हें अपने उत्पादों को सीधे ग्राहकों को प्रदर्शित करने और बेचने का एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है। इस मेले ने भारत की विभिन्न लुभावनी शिल्प परंपराओं को विलुप्त होने से भी बचाया है। अनेक शिल्पकारों, कारीगरों और बुनकरों के लिए यह मेला वर्ष भर की उनकी आय का प्रमुख स्रोत होता है।

8. यह मेला कई मायनों में अलग है। परांपरागत झोपड़ी नुमा दुकान ग्रामीण भारत को दर्शाती है। वहीं ग्राहकों द्वारा किया जा रहा डिजिटल पेमेंट नये भारत की एक तस्वीर प्रस्तुत करता है। मैं मेला के मोबाइल एप्लिकेशन, अन्य डिजिटल प्लेटफार्म और ऑनलाइन टिकटिंग सुविधाओं की व्यवस्था की सराहना करता हूं।

देवियो और सज्जनो,

9. इस वर्ष हम राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 150वीं जयन्ती मना रहे है। देश और दुनिया में उनके अमूल्य विचारों को पहुंचाने का यह एक स्वर्णिम अवसर है। सूरजकुण्ड मेला को देखने लाखों लोग आयेंगे। स्वच्छता, खादी-उत्पादों और हथकरघा से बनी वस्तुओं के प्रसार के लिए पूज्य बापू के संदेश को इस मेले में आसानी से लाखों लोगों तक पहुंचाया जा सकता है।

10. ऐसे मेले आर्थिक आत्मनिर्भरता में भी योगदान देते हैं। हम सबको देश के शिल्पकारों द्वारा बनाई गई वस्तुओं पर गर्व करना चाहिए। कल मैंने संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा था ‘उज्ज्वल कल के लिए लोकल’ का  मूल मंत्र हमें अपनाना चाहिए। मैं संसद में किए गए अपने इस आग्रह को दोहराता हूं कि पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक, देश के प्रत्येक जनप्रतिनिधि को और सभी राज्य सरकारों द्वारा ‘उज्ज्वल कल के लिए लोकल’ को एक आंदोलन में परिवर्तित किया जाए। स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देकर आप सब अपने क्षेत्र के शिल्पकारों तथा लघु उद्यमियों की बहुत बड़ी मदद करेंगे।

11. मुझे बताया गया है कि बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे और युवा इस मेले को देखने आते हैं। मुझेयह जानकर प्रसन्नता हुई है किबच्चों को, मेले में, निशुल्क प्रवेश मिलता है। बच्चों को कला, संस्कृति तथा लोक-परम्पराओं की जानकारी मिलती है।युवाओं और बच्चों को मेले जैसे आयोजन द्वारा विरासत से जोड़ना सराहनीय गतिविधि है।इस मेले में आने वाले लाखों आगंतुकों को हमारे महान राष्ट्र के अद्वितीय सांस्कृतिक परिदृश्य की झलक मिलती है और यहां उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कला और शिल्प की विविधता का परिचय भी मिलता है।

12. केंद्र सरकार की विभिन्न जन-कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से अल्प-संख्यक वर्ग के युवाओं, विशेषकर महिलाओं, को स्वावलंबी बनाने के लिए हुनर और रोजगार के अनेक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। उनमें से एक ‘हुनर हाट’ दस्तकारों, शिल्पकारों व खानसामों को रोजगार के अवसर मुहैया कराने में एक मजबूत अभियान साबित हुआ है।हुनर हाट के जरिए अल्पसंख्यक वर्ग के 2 लाख 65 हजार हुनरमंद कारीगरों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।

13. इस मेले के सफल आयोजन के लिए मैं हरियाणा के राज्यपाल श्री सत्यदेव नारायण आर्य और मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल को हार्दिक बधाई देता हूं। हिमाचल प्रदेश की प्रभावशाली प्रगति के लिए मुख्यमंत्री श्री जयराम ठाकुर बधाई के हकदार हैं। इस वर्ष, इस मेले में, हिमाचल प्रदेश द्वारा दूसरी बार भागीदारी करना, इस मेले की उपयोगिता के साथ ही, हिमाचल प्रदेश की लोकप्रियता को भी रेखांकित करता है।

14. देश के सभी हिस्सों से यहां आए हुए शिल्पकारों और प्रतिभाशाली कलाकारों की मेहनत और लगन की मैं प्रशंसा करता हूं। साथ ही, केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकारों, विशेषकर सूरजकुंड मेला प्राधिकरण की टीम को इस आयोजन के कुशल प्रबंधन के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूं।

15. मुझे विश्वास है कि इस बार का सूरजकुण्ड मेला भी आर्थिक, सामाजिक, कला एवं व्यापार के क्षेत्र में प्रभावशाली योगदान देगा और यह परंपरा निरंतर मजबूत बनेगी।

धन्‍यवाद।

जय हिन्‍द!

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