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Speeches

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का रांची विश्वविद्यालय के 33वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर सम्बोधन

रांची : 30.09.2019
भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का रांची विश्वविद्यालय के 33वें दीक्षां

1. दीक्षांत समारोह के इस अवसर पर उपस्थित सभी पदक विजेताओं, शिक्षकों, अन्य सभी विद्यार्थियों और अभिभावकों को मेरी बहुत-बहुत बधाई। आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे बहुत हर्ष का अनुभव हो रहा है।

2. आज के दीक्षांत समारोह में 9 बेटों और 47 बेटियों ने स्वर्ण पदक प्राप्त किए हैं। मैं उन सभी को विशेष बधाई देता हूं। स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली बेटियों की संख्या बेटों की तुलना में पांच गुना से भी अधिक है। यह आप सबके विश्वविद्यालय, अध्यापकों, अभिभावकों और सभी छात्रों के लिए गर्व की बात है। बेटियों के इस प्रदर्शन में भविष्य के बेहतर समाज और देश की झलक दिखाई देती है।

3. मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि इस विश्वविद्यालय के अनेक भूतपूर्व विद्यार्थियों ने अपनी अलग पहचान बनाई है। मुझे बताया गया है कि यहां के पूर्व छात्र श्री एम.वाई. इकबाल भारत के उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश के गौरवशाली पद तक पहुंचे। झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास ने भी इसी विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की है।

4. धरती आबा बिरसा मुंडा, वीर सिदो-कान्हू, तिलका मांझी और नीलांबर-पीताम्बर के इस क्षेत्र में आकर संघर्ष और त्याग के उन आदर्शों की बरबस याद आती है। इस क्षेत्र में लगभग 60 वर्ष पहले रांची विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। इस विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे यहां के परंपरागत आदर्शों के अनुरूप झारखंड और पूरे देश के विकास में अपना योगदान देते रहेंगे।

5. इस क्षेत्र की अनेक विभूतियों ने यहां का सम्मान बढ़ाया है। 1971 के युद्ध में असाधारण पराक्रम के लिए ‘परमवीर चक्र’ से सम्मानित होने वाले शहीद एल्बर्ट एक्का इसी क्षेत्र के सपूत थे। यहीं के जयपाल सिंह मुंडा 1928 के ओलंपिक खेलों में पहला स्वर्ण पदक जीतने वाली भारत की हॉकी टीम के कप्तान थे। वे संविधान सभा के सदस्य भी रहे। महेंद्र सिंह धोनी ने रांची का नाम पूरे क्रिकेट जगत में रोशन किया है। झारखंड की बेटी दीपिका कुमारी पर पूरे देश को गर्व है।

प्यारे विद्यार्थियो,

6. झारखंड में देश की 40 प्रतिशत खनिज संपदा पाई जाती है। इस राज्य में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के अनेक बड़े उद्योग स्थापित हैं। जमशेदजी टाटा ने पहला बड़ा स्टील प्लांट इसी क्षेत्र में लगाया था। झारखंड में अनेक पर्यटन स्थल हैं। यहां उच्च-स्तरीय शिक्षण संस्थान भी हैं। झारखंड राज्य की ऐसी अनेक विशेषताओं तथा आप जैसे युवाओं की प्रतिभा के बल पर, यहां आधुनिक प्रगति के नए आयाम स्थापित किए जा सकते हैं।

7. आप सबके विश्वविद्यालय का ध्येय वाक्य है ‘तेजस्वि नावधीतम् अस्तु’। इसका अर्थ है कि ‘हमारा अध्ययन प्रभावी बने’। आप सबने जो शिक्षा प्राप्त की है उसकी सार्थकता विश्वविद्यालय से निकलने के बाद विभिन्न कार्यक्षेत्रों तथा समाज और देश के लिए आपके योगदान पर निर्भर करेगी।

8. आज का युग अपार अवसरों और चुनौतियों से भरा हुआ है। जो युवा सजग और सक्रिय हैं उनके लिए आज की टेक्नॉलॉजी और अर्थ-व्यवस्था ऐसे अनेक नए अवसर प्रदान करती है जो पिछली पीढ़ियों को उपलब्ध नहीं थे। स्व-रोजगार को बढ़ावा देने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा अनेक कदम उठाए गए हैं। आप सबको इन अवसरों का भरपूर उपयोग करते हुए जॉब क्रिएटर बनना है और दूसरों को भी आगे बढ़ाना है।

9. यह प्रसन्नता की बात है कि जन-जातीय समुदाय के समग्र विकास के लिए ‘विकास भारती, बिशुनपुर’ जैसे संस्थान इस क्षेत्र में सक्रिय हैं। इसी प्रकार, झारखंड के कई जिलों में स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा के क्षेत्रों में रामकृष्ण मिशन ने बहुत योगदान दिया है। मैं चाहूंगा कि रांची विश्वविद्यालय और यहां के विद्यार्थी ऐसे संस्थानों से प्रेरणा लें, और समावेशी विकास में प्रभावी भूमिका निभाएं।

10. इस क्षेत्र के प्रख्यात समाज सुधारक और स्वतन्त्रता सेनानी जतरा टाना भगत का जन्म भी गुमला में ही हुआ था। उन्होंने अंग्रेजों के शोषण के खिलाफ अहिंसापूर्ण आंदोलन का नेतृत्व किया था। जैसा कि सभी जानते हैं, टाना भगतों ने भारत के स्वतन्त्रता आंदोलन में गांधीजी का अनुसरण किया। इस क्षेत्र की ऐसी विरासतों और मूल्यों को आगे बढ़ाना भी आप सभी का दायित्व है।

11. मैंने हमेशा यह महसूस किया है कि प्रकृति के साथ तालमेल रखते हुए अपनी आवश्यकताओं को पूरा करना हम सबको आदिवासी समाज से सीखना चाहिए। आदिवासी संस्कृति और सभ्यता के बारे में शोधकार्य को प्रोत्साहित करके यह विश्वविद्यालय बहु-आयामी योगदान दे सकता है।

12. मुझे बताया गया है कि झारखंड की भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए, आपके विश्वविद्यालय में, सन 1980 में स्थापित किए गए जन-जातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग में, पांच जन-जातीय भाषाओं - कुडुख, मुंडारी, संथाली, हो एवं खड़िया की पढ़ाई होती है। आदिवासी भाषा व संस्कृति की जानकारी का उपयोग, जन-जातीय जीवन से जुड़ने और उस समुदाय को विकसित करने में होना चाहिए।

13. आदिवासी बच्चों, युवाओं और बेटियों की शिक्षा और कौशल के विकास के लिए पूरे देश में साढ़े चार सौ से अधिक नए ‘एकलव्य मॉडल रेजीडेंशियल स्कूल’ केंद्र सरकार द्वारा स्थापित किए जा रहे हैं। इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की शुरुआत झारखंड में ही इसी 12 सितंबर को की गई थी।

14. सभी गरीब भाई-बहनों के कल्याण के लिए अनेक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय योजनाओं की शुरुआत झारखंड में हुई है। ‘आयुष्मान भारत’ नामक दुनिया की सबसे बड़ी ‘स्वास्थ्य बीमा योजना’ का आरंभ झारखंड में हुआ था। देश के करोड़ों किसानों को पेंशन देने की ‘किसान मानधन योजना’ इसी महीने झारखंड में ही शुरू की गई। स्व-रोजगार में लगे देश के करोड़ों भाई-बहनों के लिए ‘राष्ट्रीय पेंशन योजना’ का शुभारंभ भी झारखंड से हुआ है। मुझे पूरा विश्वास है कि समावेशी विकास और कल्याण की इन योजनाओं को निरंतर आगे बढ़ाने में राज्य सरकार द्वारा प्रभावी प्रयास किए जाते रहेंगे।

15. संवेदनशील और समावेशी विकास के कार्यक्रमों के साथ-साथ झारखंड में इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास भी तेजी से हो रहा है। ‘नेशनल वाटर-वे वन’ के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में साहिबगंज में ‘मल्टी-मोडल टर्मिनल’ के बन जाने से झारखंड के विकास को एक नई गति प्राप्त होगी। मैं चाहूंगा कि आप सभी युवा, फिजिकल और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्रों में हो रहे विकास का उपयोग करने के लिए तत्पर रहें।

प्यारे विद्यार्थियो,

16. दो दिन बाद, यानि 2 अक्तूबर को सभी भारतवासी तथा विश्व समुदाय के अनेक लोग हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाएंगे। गांधीजी ने रांची और आसपास के क्षेत्र की अनेक यात्राएं की थीं। सन 1925 में, उन्होंने हजारीबाग के सेंट कोलंबस कॉलेज के प्रांगण में इस क्षेत्र के विद्याथियों को संबोधित किया था। उनका वह भाषण आज के आप सभी विद्यार्थियों के लिए भी उतना ही प्रासंगिक है। गांधीजी ने विद्यार्थियों द्वारा समाज सेवा पर बल दिया था। उन्होंने यह भी कहा था कि समाज सेवा के लिए सबसे पहली जरूरत चरित्र-बल की है। मैं मानता हूं कि जब आप सब अपने समाज और देश के प्रति संवेदनशील रहेंगे तो आप सहज ही समाज-कल्याण और राष्ट्र-निर्माण के लिए प्रेरित होंगे।

प्यारे विद्यार्थियो,

17. आज मेरे सामने सभी प्रतिभाशाली और स्वस्थ युवा बैठे हैं। हमारे छात्रगण आधुनिक व्यसन से परिचित होंगे इसका नाम है e-cigarette. मुझे प्रसन्नता है कि जब इस पर प्रतिबंध लगा तो आपके राज्य ने इसमें पहल की। इसके लिए मैं राज्य सरकार एवं यहाँ की जनता को बधाई देता हूँ। आप जानते हैं कि WHO की advisory पर अप्रैल 2019 में झारखंड ने एवं सितम्बर 2019 में देश ने e-cigarette आदि को प्रतिबंधित कर दिया। इसके शिकार अक्सर युवा वर्ग ही होते हैं। e-cigarette हानिकारक है। इसको बनाना, बेचना, इस्तेमाल करना, स्टोर करना और विज्ञापन देना अपराध घोषित किया गया है। कई देश और भारत के करीब 16 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश इसे प्रतिबंधित कर चूके हैं। मुझे लगता है कि आप इसके प्रभाव में नहीं आएंगे। आपको अपनी स्वास्थ्य एवं पढ़ाई पर ध्यान देते रहना है, जिससे उज्ज्वल भारत और झारखंड का निर्माण संभव हो सके।

प्यारे विद्यार्थियो,

18. इस वर्ष गांधी जयंती के दिन हम सब ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के संकल्प को सिद्ध करने का उत्सव भी मनाएंगे। इस सफलता में झारखंड ने प्रभावी योगदान दिया है। 2 अक्तूबर, 2014 को झारखंड में ‘ओडीएफ़ कवरेज’ केवल 16 प्रतिशत के करीब था। यह आज शत-प्रतिशत हो गया है। इस सफलता सहित, ऐसी अनेक उपलब्धियों के लिए राज्यपाल श्रीमती द्रौपदी मुर्मू, मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास, झारखंड राज्य सरकार की पूरी टीम और राज्य के सभी नागरिकों को मैं हार्दिक बधाई देता हूं।

19. पूरे देश में कॉर्पोरेट सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी यानि सीएसआर की चर्चा होती है। मैंने जून, 2018 में आयोजित ‘राज्यपाल सम्मेलन’ में यह अनुरोध किया था कि विश्वविद्यालयों को भी यूनिवर्सिटीज़ सोशल रेस्पॉन्सिबिलिटी यानि यूएसआर के लिए योगदान देना चाहिए। प्रत्येक विश्वविद्यालय से लगभग दो माह के अंतराल पर कम से कम पांच छात्र-छात्राएं गांवों में जाएं, और यदि संभव हो सकें तो वहां रात्रि में रुकें और गांव वालों के साथ बैठकर चर्चा करें। वे गांव की साफ-सफाई, सम्पूर्ण साक्षरता, सभी बच्चों के टीकाकरण तथा न्यूट्रीशन जैसी कल्याणकारी योजनाओं के बारे में ग्रामवासियों के साथ संवाद बनाएं। साथ ही, केंद्र तथा राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में भी ग्रामवासियों को जानकारी प्रदान करें। मैं रांची विश्वविद्यालय प्रशासन से यूएसआर पर विशेष ध्यान देने का अनुरोध करूंगा।

प्यारे विद्यार्थियो,

20. मुझे विश्वास है कि इस विश्वविद्यालय से प्राप्त शिक्षा का भरपूर उपयोग आप सब अपने विकास और देश की प्रगति के लिए करेंगे। मेरी शुभकामना और आशीर्वाद है कि आप सभी सफलता के पथ पर हमेशा आगे बढ़ते रहें।

धन्यवाद

जय हिन्द!

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