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Speeches

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद, गोरखपुर के ‘संस्थापक सप्ताह समारोह’ के मुख्य महोत्सव में सम्बोधन

गोरखपुर : 10.12.2018
भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद, गोरखपुर

1. नाथ-परंपरा के महान योगी, गुरु गोरक्षनाथ की स्मृति से जुड़े, राप्ती और रोहिन नदियों के संगम क्षेत्र में बसे, गोरखपुर नगर में आना, सबके लिए बड़े सौभाग्य की बात होती है। उससे भी बढ़ कर, शिक्षा से जुड़े हुए कार्यक्रम में भाग लेना, और भी सुखद संयोग है।

2. विगत पूरे सप्ताह के दौरान आयोजित कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को मेरी हार्दिक बधाई। पारितोषिक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थी-गण, विशेष बधाई के पात्र हैं।

3. स्वाभिमान और आत्म-गौरव के लिए सदैव सचेत रहने वाले, पूर्वी उत्तर प्रदेश और गोरखपुर परिक्षेत्र को, अठारह सौ सत्तावन के स्वाधीनता संग्राम के बाद, विदेशी शासन की क्रूरता और उदासीनता का सामना करना पड़ा था।

4. बीसवीं सदी में, भारतीय दर्शन और क्रिया योग के प्रति, देश और विदेश में आकर्षण उत्पन्न करने वाले, परमहंस योगानंद का जन्म गोरखपुर में ही हुआ था। हज़रत रोशन अली शाह जैसे संतों; मोहम्मद सैयद हसन, बाबू बंधु सिंह और राम प्रसाद बिस्मिल जैसे शहीदों की स्मृतियों से जुड़ा यह गोरखपुर क्षेत्र, बाबा राघव दास जैसे राष्ट्र-सेवी संत और महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की कर्म-स्थली भी रहा है। मुंशी प्रेमचंद के कथा-संसार में हमें गोरखपुर, खासकर यहाँ के ग्रामीण अंचल, की झलक दिखाई देती है। फिराक ‘गोरखपुरी’ ने इस शहर के नाम को, उर्दू साहित्य में अमर कर दिया है।

5. गोरखपुर में स्थित ‘गीता प्रेस’ ने, आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों को प्रसारित करने वाला प्रामाणिक साहित्य उपलब्ध कराके, अपना अतुलनीय योगदान दिया है। गीता प्रेस से नियमित रूप से प्रकाशित होने वाली, मासिक पत्रिका ‘कल्याण’ ने, एक बहुत बड़े पाठक वर्ग को, भारत की अमूल्य विरासत से जोड़ रखा है।‘कल्याण’ के प्रथम संपादक, विद्वान मनीषी हनुमान प्रसाद पोद्दार जी ने, लोगों के संस्कार-निर्माण द्वारा, समाज को सात्विक ऊर्जा प्रदान की है। मुझे बताया गया है कि सन 1923 में स्थापित किए गए इस प्रेस में छपी पुस्तक-प्रतियों की कुल संख्या अब 62 करोड़ से भी अधिक हो चुकी है।

6. इस क्षेत्र में, तथा पूरे उत्तर प्रदेश में, समग्र विकास हेतु, पूरी कर्म-निष्ठा के साथ नेतृत्व प्रदान करने के लिए, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी प्रशंसा के पात्र है। प्रदेश के मुख्यमंत्री का पदभार संभालने से पहले, एक सक्रिय सांसद के रूप में, गोरखपुर को उनका निरंतर, नेतृत्व लगभग दो दशकों से, प्राप्त हो रहा था। उन्होंने निरंतर राष्ट्रीय और प्रादेशिक मुद्दों के साथ-साथ, इस क्षेत्र की समस्याओं की ओर, सबका ध्यान आकृष्ट किया और उनके समाधान के लिए सक्रिय योगदान दिया है।

7. यह उत्तर प्रदेश के निवासियों का सौभाग्य है कि, आप सबको, राज्यपाल श्री राम नाईक जी के रूप में, एक ऐसे वरिष्ठ एवं अनुभवी व्यक्तित्व का मार्गदर्शन प्राप्त है, जिनकी योग्यता तथा सार्वजनिक जीवन में विपुल योगदान की जितनी भी प्रशंसा की जाए, वह कम है।

8. शिक्षा विकास की कुंजी होती है। भारत के विकास का अर्थ है, भारत में शिक्षा का विकास। शिक्षा ही अच्छे व्यक्ति और समाज के निर्माण की आधारशिला भी है। सही मायने में, उसी समाज और व्यक्ति को शिक्षित माना जा सकता है, जहां प्रेम, करुणा, और सद्भाव जैसे मूल्यों को सर्वाधिक महत्व दिया जाता है। शिक्षा के इस व्यापक अर्थ के अनुसार, गौतम बुद्ध और संत कबीर महान शिक्षक थे। यह इस अंचल का सौभाग्य है कि गौतम बुद्ध से जुड़े कुशीनगर, श्रावस्ती, कपिलवस्तु और लुम्बिनी तथा कबीर से जुड़ा मगहर, जो संत कबीर नगर में है, गोरखपुर के ही परिक्षेत्र में स्थित हैं।

9. भक्ति आंदोलन से लेकर, अठारह सौ सत्तावन के स्वाधीनता संग्राम तक, ‘नाथ-पंथ’ के योगी जन-जागरण के सूत्रधार रहे हैं। समाज की एकता, देश की अखंडता और इस क्षेत्र के लोगों को अज्ञानता व अशिक्षा से मुक्ति दिलाने के लिए, गोरखनाथ पीठ से जुड़े महानुभावों ने, परिस्थिति व तत्कालीन समय के अनुसार, महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

10. आजादी की लड़ाई के दौरान, राष्ट्रीय-स्वाभिमान से जुड़ी आधुनिक शिक्षा प्रदान करने का एक अभियान शुरू हुआ। महामना मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित ‘बी.एच.यू.’ से लेकर महंत दिग्विजय नाथ द्वारा ‘महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद’ की स्थापना, उसी शिक्षा-अभियान के ज्वलंत उदाहरण हैं। सन 1932 में, इस ‘परिषद’ की स्थापना, गोरखपुर तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में शिक्षा के विकास को गति और दिशा प्रदान करने में मील का पत्थर साबित हुई है।

11. ‘परिषद’ ने, अपने दो महत्वपूर्ण महाविद्यालयों का, गोरखपुर विश्वविद्यालय में पूर्ण विलय करके, निर्माणाधीन विश्वविद्यालय को एक बना-बनाया परिसर उपलब्ध कराया था। आज इसका नाम ‘दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय’ है।

12. संयोग से, ‘परिषद’ के सेवा-कार्यों को भी, योगी आदित्यनाथ जी अपना मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। मुझे बताया गया है कि उनकी सक्रियता के कारण ही गोरखपुर नगर को ‘गुरु श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय’ जैसा एक बड़ा एवं अत्याधुनिक चिकित्सा केंद्र प्राप्त हुआ है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि आज ‘परिषद’ द्वारा शिक्षा एवं समाज सेवा के लिए कार्यरत, 44 संस्थान चलाए जा रहे हैं।

13. गोरखपुर में, ‘मदन मोहन मालवीय यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलॉजी’ और ‘बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज’ द्वारा तकनीकी और मेडिकल शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यहाँ AIIMS का निर्माण भी प्रगति पर है, जिसके पूरी तरह से विकसित हो जाने के बाद, इस क्षेत्र में, चिकित्सा और मेडिकल एजुकेशन के स्तर में वृद्धि होगी। यहाँ, टेक्निकल, मेडिकल और प्रोफेशनल एजुकेशन के क्षेत्र में अनेक निजी संस्थान भी अपना योगदान दे रहे हैं। मुझे विश्वास है कि, इन संस्थानों में, शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष ज़ोर दिया जाएगा, और युवाओं को, समय की मांग के अनुसार, और अधिक समर्थ बनाया जाएगा।

14. यह स्पष्ट ही है कि इस ‘परिषद’ के संस्थापकों ने, बहुत सोच-समझकर, इसे महाराणा प्रताप के नाम से स्थापित किया था। जैसा हम सभी जानते हैं कि असाधारण राष्ट्र-गौरव, वीरता, और आत्म-सम्मान के प्रतीक, महाराणा प्रताप ने, जन-भावना की रक्षा करने के लिए, हँसते-हँसते, वनवासी जीवन के असहनीय कष्टों को सहन किया था। उन्होने समाज के प्रत्येक वर्ग को साथ लेकर, आजीवन संघर्ष करते हुए, पराक्रम और बलिदान के एक ऐसे स्वर्णिम अध्याय की रचना की है, जो सदैव हम सब के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। आप सब के कार्यों की सार्थकता की पुष्टि तभी होगी, जब उनमें, महाराणा प्रताप के जीवन-आदर्शों के अनुपालन की झलक दिखाई पड़े।

15. मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि ‘परिषद’ द्वारा सन 1981 से हर वर्ष यह ‘संस्थापक सप्ताह समारोह’ मनाया जाता है, जिसमें हजारों विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगिताओं तथा शोभा-यात्रा में भाग लेते हैं। संस्कृति के प्रति आदर, राष्ट्र के प्रति समर्पण तथा सामाजिक कार्यों के लिए तत्परता पर बल देकर, ‘परिषद’ द्वारा, युवाओं के व्यक्तित्व निर्माण में सराहनीय योगदान दिया जा रहा है। यह समारोह, इस ‘परिषद’ के संस्थानों से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के लिए, संस्थापकों के आदर्शों के प्रति अपनी आस्था को दोहराने का भी अवसर है।

16. मुझे विश्वास है कि महान विभूतियों के नाम से आज पदक प्राप्त करने वाले सभी युवा, देश के भविष्य के लिए अपना सार्थक योगदान देंगे। साथ ही, वे अपने संगी-साथियों में प्रेरणा का भी संचार करेंगे।

17. देश में युवाओं की सबसे बड़ी संख्या, उत्तर प्रदेश में ही है। यह अपने-आप में एक बहुत बड़ी संपदा है। इस ‘यंग वर्क-फोर्स’ के बल पर प्रदेश की उपजाऊ जमीन, प्रचुर जल-संसाधन, बहुत बड़ा घरेलू बाज़ार तथा अच्छी कनेक्टिविटी जैसी अनेक विशेषताओं का पूरा लाभ उठाया जा सकता है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि प्रदेश में ‘इन्फोर्मेशन टेक्नॉलॉजी’ और ‘स्टार्ट-अप’ को प्रोत्साहित करने के लिए, नई नीति लागू की गई है। इस नीति के तहत, उत्तर प्रदेश ‘स्टार्ट-अप फंड’, ‘आई.टी. पार्क्स’ तथा, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के सुधारों पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है। युवाओं को ‘जॉब क्रिएटर’ बनने के लिए प्रोत्साहन और सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। इन प्रयासों से, प्रदेश के विकास में, युवाओं की भागीदारी, और बढ़ेगी।

18. पूर्वांचल क्षेत्र के विकास के बिना, उत्तर प्रदेश के समग्र विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है। मुझे विश्वास है कि अपने पूर्वांचल के विकास से समृद्ध होकर, उत्तर प्रदेश, प्रगति के पथ पर और तेज गति से आगे बढ़ेगा।

19. लगभग एक दशक पहले, सन 2007 में, ‘महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद’ का ‘हीरक जयंती’ वर्ष था। प्रायः सभी संस्थान, ऐसे अवसरों पर, अपनी उपलब्धियों का उत्सव मनाते हैं, और अपने भविष्य के लक्ष्य निश्चित करते हैं। आज से लगभग डेढ़ दशक बाद सन 2032 में इस ‘परिषद’ का ‘शताब्दी-वर्ष’ मनाया जाएगा। मेरा सुझाव है कि, ‘परिषद’ के ‘शताब्दी-वर्ष’ तक, सुविचारित योजनाओं और प्रयासों के बल पर, गोरखपुर को‘ सिटी ऑफ नॉलेज’ के रूप में स्थापित करने का, आप सभी को संकल्प लेना चाहिए। आप लोगों की कर्मठता को देखकर, मुझे पूरा विश्वास है कि आप सभी, इस लक्ष्य को प्राप्त करने में अवश्य सफल होंगे।

20. मैं एक बार फिर, पारितोषिक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को विशेष बधाई देता हूँ, तथा आप सभी के, उज्ज्वल भविष्य के लिए, अपनी शुभकामनाएँ देता हूँ।

धन्यवाद

जय हिन्द !

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