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अभिभाषण

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का 10वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस समारोह में सम्बोधन

नई दिल्ली : 25.01.2020
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1. निर्वाचन आयोग के 71वें स्थापना दिवस और 10वें राष्ट्रीय मतदाता दिवस के विशेष अवसर पर मैं सभी मतदाताओं को, भारत निर्वाचन आयोग तथा राज्य निर्वाचन आयोगों के सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को हार्दिक बधाई देता हूँ। आज मतदाता पहचान पत्र प्राप्त करने वाले युवाओं, खासकर बेटियों को विशेष रूप से मैं बधाई देता हूँ। आप सब उस पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं जो हमारे लोकतन्त्र के स्वर्णिम भविष्य का निर्माण करेगी। मैं आज के सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई देता हूँ और हमारी निर्वाचन प्रक्रिया में असाधारण योगदान देने के लिए आप सबकी सराहना करता हूँ।

2. कल हम सब अपना 71वां गणतन्त्र दिवस मनाएंगे। हमारे लोकतान्त्रिक गणतन्त्र के आदर्श को कार्यरूप देने के लिए संविधान निर्माताओं द्वारा, संविधान में ही एक स्वायत्त निर्वाचन आयोग तथा वयस्क मताधिकार का प्रावधान किया गया है।

3. आप सबको मैं स्मरण कराना चाहता हूँ कि आजादी के तुरंत बाद, सभी नागरिकों को वयस्क मताधिकार प्रदान करने की काफी आलोचना भी हुई थी क्यों कि उस समय तक लोकतन्त्र केवल सम्पन्न और विकसित देशों तक ही सीमित था। ऐसी आशंका व्यक्त की गई थी कि केवल 16 प्रतिशत साक्षरता तथा गरीबी के कारण वयस्क मताधिकार का प्रयोग सफल नहीं हो सकेगा। यहाँ तक कि भारत में वयस्क मताधिकार दिए जाने को "the biggest gamble in history” कहा गया था। परंतु हमारे मतदाताओं ने इसे विश्व इतिहास में लोकतन्त्र का सबसे बड़ा और सफल प्रयोग सिद्ध कर दिखाया। संविधान निर्माताओं द्वारा सामान्य व्यक्ति पर जो दृढ़ विश्वास जताया गया था उस पर वे खरे उतरे।

4. पहले आम चुनाव से लेकर पिछले वर्ष सम्पन्न हुए 17वें आम चुनाव तक, भारत के मतदाताओं ने हमारे लोकतन्त्र की साख पूरे विश्व में बढ़ाई है। इसके लिए मैं देश के सभी मतदाताओं का अभिनंदन करता हूँ।

5. परंतु आज भी हमारे कुछ मतदाता अपने मताधिकार के महत्व को नहीं समझ पाते हैं। उन्हें यह मालूम होना चाहिए कि दुनिया के अधिकांश लोकतान्त्रिक देशों में मताधिकार प्राप्त करने के लिए सामान्य लोगों को आंदोलन करने पड़े थे तथा अनेक कुर्बानियाँ भी देनी पड़ी थीं। यहाँ तक कि इंग्लैंड जैसे पुराने लोकतन्त्र में, मताधिकार प्राप्त करने के लिए, महिलाओं को 20वीं सदी में, लगभग तीन दशकों के लंबे संघर्ष के बाद पुरुषों के बराबर मताधिकार मिल पाया। जबकि हमारे संविधान निर्माताओं ने, बिना किसी भेदभाव के, यह अमूल्य अधिकार सभी वयस्क भारतवासियों को संविधान लागू होने के साथ-साथ ही दिया है। और इसीलिए, निर्वाचन आयोग द्वारा नए मतदाताओं को दिए गए बैज पर लिखा गया कथन बहुत ही सार्थक है – ‘Proud to be a voter - Ready to vote’.

6. ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’, मताधिकार के प्रयोग के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने और मतदान द्वारा हमारे लोकतन्त्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि मतदाता दिवस से जुड़े आयोजन केवल राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं बल्कि राज्य, जिला और पोलिंग स्टेशन तक के स्तर पर किए जाते हैं।

देवियो और सज्जनो,

7. पिछले वर्ष सम्पन्न हुए 2019 के आम चुनाव में लगभग एक करोड़ दस लाख लोगों की तैनाती से युक्त इलेक्शन मशीनरी द्वारा 91 करोड़ मतदाताओं के लिए मतदान की व्यवस्था की गई। निर्वाचन आयोग ने इस चुनाव को ‘देश का महा त्यौहार’ के नाम से प्रचारित किया ताकि लोग उत्साहित होकर, लोकतन्त्र के इस महायज्ञ में भागीदारी करें। मुझे बताया गया है कि लगभग 10 लाख 35 हजार पोलिंग स्टेशन बनाए गए। सुदूर पहाड़ियों पर बसे आखरी गांवों तक, समुद्री द्वीपों में, पूर्वोत्तर के दुर्गम क्षेत्रों में और रेगिस्तानी इलाकों में चुनाव की व्यवस्था करना कितना कठिन हो सकता है इसका अंदाजा लगाना भी सामान्य व्यक्ति के लिए मुश्किल है। लेकिन हमारे निष्ठावान चुनावकर्मियों ने तमाम चुनौतियों के बावजूद सफलतापूर्वक चुनाव सम्पन्न करवाए। हमारे चुनाव अधिकारियों व कर्मचारियों ने अद्भुत निष्ठा और बहादुरी का परिचय दिया है।

8. हमारे मतदाताओं ने किसी भी तरह की कठिनाई की परवाह किए बिना अपना मतदान किया। अनेक मतदाताओं ने आतंक और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में निडरता के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मैं पूरे देश की ओर से उन सभी 61 करोड़ 30 लाख मतदाताओं की सराहना करता हूँ, जिन्होंने 17वें लोकसभा चुनाव में मतदान करके एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

9. इस लोकसभा चुनाव में, महिलाओं ने पुरुषों के लगभग बराबर मतदान किया। मुझे बताया गया है कि महिलाओं और पुरुषों के बीच का फर्क केवल शून्य दशमलव एक प्रतिशत यानि ज़ीरो पॉइंट वन परसेंट था। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि 17 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत पुरुषों से अधिक था। लोकसभा के इतिहास में पहली बार सबसे बड़ी संख्या में 78 महिला सांसदों का चुना जाना नए भारत की उज्ज्वल तस्वीर प्रस्तुत करता है। आज यहाँ पहली बार मतदाता बनी बेटियाँ आसमा, कोमल और विधि गुप्ता जो अल्प-संख्यकों, अनुसूचित जनजातियों तथा दिव्यांग-जनों का भी प्रतिनिधित्व करती हैं, महिला सशक्तीकरण की मुहिम को और मजबूत बनाएँगी, यह मेरा विश्वास है।

10. निर्वाचन आयोग द्वारा दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिकों और महिलाओं के लिए मतदान को सुगम बनाने के विशेष प्रयास किए जाने की मैं सराहना करता हूँ। मुझे बताया गया है कि 65 लाख से अधिक दिव्यांगजनों की देशव्यापी सूची बनाई गई है ताकि उनके लिए पहले से ही विशेष सुविधाओं की तैयारी रहे। उनकी सुविधा के लिए सुगम्य बूथ बनाए जाते हैं तथा वालंटियरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। दृष्टि बाधित मतदाताओं के लिए ब्रेल प्रिंट से युक्त ईवीएम की व्यवस्था की जाती है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि, अब दिव्यांगजन को पोस्टल वोटिंग की सुविधा भी उपलब्ध करा दी गई है।

11. इसी प्रकार, 80 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं को पोस्टल वोटिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। अनेक वरिष्ठ मतदाताओं ने लोकतन्त्र के प्रति निष्ठा के असाधारण उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। अभी-अभी जो पुस्तकें मुझे भेंट की गई हैं वे दोनों ही मतदाताओं को प्रेरित करने की दृष्टि से बहुत उपयोगी हैं। ‘The Centenarian Voters: Sentinels of our Democracy’ नामक पुस्तक में देश के विभिन्न हिस्सों से, 100 वर्ष से अधिक आयु के कुछ मतदाताओं के बारे में विस्तार से परिचय दिया गया है। उदाहरण के लिए, अरुणाचल प्रदेश में जोंग-फोहाटे गाँव की 107 वर्ष की नाथोंग-सावेन ने भी 2019 के लोकसभा चुनाव में पहाड़ी से नीचे उतर कर मतदान किया। वे पूरे गाँव के लिए प्रेरणा का स्रोत बनीं और उस गाँव में महिलाओं ने शत-प्रतिशत मतदान किया। इसी तरह, गुजरात में बारडोली की 101 वर्ष की वृदधा खैरानबीबी पीर-महमद शेख ने पिछले लोकसभा चुनाव में मतदान किया और कहा कि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में, मतदान करना हमारा कर्तव्य है और हम जब तक जीवित रहें, हमें मतदान अवश्य करना चाहिए। हम सभी को इन बुजुर्गों से प्रेरणा लेनी चाहिए।

12. मैं विश्व के लोकतांत्रिक देशों की अपनी यात्राओं के दौरान भारत के विशाल और विविधतापूर्ण लोकतंत्र के विषय में बड़े गर्व के साथ चर्चा करता हूँ। पिछले लोकसभा चुनावों के बाद की मेरी यात्राओं के दौरान, यूरोप में स्विट्जरलैंड, आइसलैंड और स्लोवेनिया से लेकर अफ्रीका में बेनिन तक, अनेक देशों में, भारत के आम चुनाव के विशाल पैमाने की चर्चा जब मैंने की तो वे हमारी सफलता से बहुत प्रभावित हुए। हमारा लोकतंत्र, हमारी चुनाव प्रक्रिया और हमारे मतदाता, ये सभी, विश्व समुदाय में भारत को गौरवपूर्ण स्थान दिलाते हैं।

13. लोकतंत्र, सबकी भागीदारी से मजबूत बनता है और आगे बढ़ता है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि मतदाताओं की भागीदारी को और बढ़ाने के लिए, निर्वाचन आयोग द्वारा ‘Electoral Literacy for Stronger Democracy’ यानि ‘सशक्त लोकतन्त्र के लिए निर्वाचन साक्षरता’ कार्यक्रम के तहत सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं। स्कूल और कॉलेज स्तर पर Electoral Literacy Club बनाए गए हैं। औपचारिक शिक्षा व्यवस्था से वंचित लोगों के लिए ‘चुनाव पाठशालाएँ’ आयोजित की जा रही हैं। निर्वाचन आयोग के प्रयासों में स्थानीय भाषाओं का प्रयोग करना विशेष रूप से सराहनीय है। यह प्रसन्नता की बात है कि समय के अनुसार निर्वाचन आयोग ने सोशल मीडिया पर अपनी उपस्थिति बढ़ाई है। इससे विशेषकर युवा मतदाताओं के बीच निर्वाचन संबंधी जागरूकता बढ़ेगी।

14. मीडिया, सिविल सोसाइटी, युवा स्वयंसेवी संगठन, राज्य, जिला और स्थानीय प्रशासन, अनेक सरकारी विभाग और एजेंसियां, औद्योगिक संस्थान, शिक्षण संस्थान, पुलिस बल और अर्ध-सैनिक बल तथा अनेक अन्य समूहों के लोग अपने सम्मिलित प्रयासों से हमारी चुनाव प्रक्रिया को सफल बनाते हैं। वे सभी प्रशंसा के पात्र हैं। उनमें से जो व्यक्ति और संस्थान आज पुरस्कृत हुए हैं वे सबके लिए प्रेरणा का संचार करेंगे, ऐसा मेरा विश्वास है।

15. आज ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ के अवसर पर, सभी मतदाताओं को, निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए शपथ में निहित लक्ष्यों और आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लेना चाहिए। मैं सभी देशवासियों, विशेषकर मतदाताओं को यह शुभकामना देता हूँ कि वे अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन करते हुए अपने जीवन पथ पर आगे बढ़ें और साथ ही, वे भारत की लोकतान्त्रिक परम्पराओं को मजबूत बनाने में सफलतापूर्वक अपना योगदान देते रहें।

धन्यवाद

जय हिन्द!

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