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अभिभाषण

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का श्री गुरु नानक देव जी की 550वीं पावन जयंती पर सम्बोधन

12.11.2019
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भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का श्री गुरु नानक देव जी की 550वीं पावन

1. लोदी की पवित्र भूमि से मैं आज सभी देशवासियों और विदेशों में बसे भारत के लोगों को श्री गुरु नानक देव जी के 550वें ‘प्रकाश पर्व’ की हार्दिक बधाई देता हूं।

2. आज के दिन सुल्तानपुर लोदी में होना बड़े सौभाग्य की बात है। यही वह भूमि है जहां श्री गुरु नानक देव जी को ज्ञान प्राप्त हुआ। इस क्षेत्र में गुरु नानक देव जी की आध्यात्मिक यात्रा से जुड़े पवित्र स्थान मौजूद हैं।

3. सुल्तानपुर में अपना देवत्व स्वरूप प्राप्त करने के बाद गुरु नानक देव जी ज्ञान की मशाल लेकर पूरी दुनिया में उजाला करने के लिए निकल पड़े। ये धरती गुरु नानक द्वारा मानवता को प्रकाशित करने की यात्रा का प्रस्थान बिन्दु है। मैं इस पुण्य भूमि को नमन करता हूं।

4. इतिहासकारों का अनुमान है कि सन 1496 में 27 वर्षीय गुरु नानक देव जी ने सुल्तानपुर से विदाई ली। वे लगातार 23 वर्षों तक घूम-घूम कर जन-साधारण को ‘सरबत दा भला’ का संदेश देते रहे।

बहनो और भाइयो,

5. गुरु नानक देव जी ने बराबरी, भाईचारा, नेकी और सदाचार की सीख देकर लोगों को जात-पांत और कर्मकांड से मुक्त करने का प्रयास किया। अपनी बात लोगों के दिलों तक पहुंचाने के लिए उन्होंने संगीत की मिठास में रची-बसी सरल भाषा में उपदेश दिए।

6. गुरु नानक देव जी ने गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ परम ज्ञान पाने की राह दिखाई है। उन्होंने इस मिथक को तोड़ा कि यदि मोक्ष चाहिए तो परिवार छोड़ना होगा। उन्होंने अपनी ही जिंदगी के जरिए लोगों के सामने मेहनत और बैराग के संगम की मिसाल पेश की। यही कारण है कि गुरु नानक देव जी हम सबके दिलों में बसते हैं।

7. गुरु नानक देव जी के अनुयायी गुरुद्वारों में श्रद्धा के साथ अरदास, परिक्रमा और अन्य धार्मिक नियमों का पालन करते हैं। लेकिन साथ ही साथ, उनके सच्चे अनुयायी, सबकी भलाई करते हैं, सबके साथ भाई चारा रखते हैं तथा मेहनत और ईमानदारी से काम करते हैं।

8. परिश्रम पर आधारित अध्यात्म की शिक्षा का ही यह नतीजा है कि गुरु नानक देव जी को मानने वाले, पूरी दुनिया में, अपनी सफलता के लिए जाने जाते हैं। साथ ही, वे सांझी-वालता के लिए भी सराहे जाते हैं। सफलता का ऊंचा मुकाम हासिल करने वाले लोगों को गुरुद्वारों में, बिना किसी स्वार्थ के, बेहिचक, हर तरह की सेवा करते हुए देखा जाता है। गुरु नानक देव जी के श्रद्धालु ‘नाम जपो, किरत करो और वंड छको’ के उपदेश पर अमल करते हैं।

बहनो और भाइयो,

9. गुरु नानक देव जी ने हमेशा ये समझाया कि परमात्मा कण-कण में, और हर जगह मौजूद है। जनम-साखियों में उनकी मक्का यात्रा का वर्णन मिलता है। इस यात्रा के साथ जुड़ी एक प्रचलित कथा है, जिसका सार है कि कोई भी दिशा या स्थान ऐसा नहीं है, जहां परमात्मा मौजूद न हो।

10. गुरु नानक देव जी से लेकर गुरु गोविंद सिंह जी तक, निडरता के साथ, इंसाफ की तरफदारी करने के लिए, और सच्चाई को पाने की, एक महान परंपरा है। सिख परंपरा में ‘पीरी’ यानि रूहानी बुलंदी और ‘मीरी’ यानि बहादुरी, दोनों पर ज़ोर दिया गया है। गुरु गोविंद सिंह जी भक्ति और शक्ति का स्वरूप थे। शुभ कर्मों से कभी न डिगने का और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करने का उनका संकल्प ही उनकी प्रार्थना थी:

देहि शिवा वर मोहे इहै, सुभ कर्मन तें कबहूं न टरौं।

11. इस महान गुरु परंपरा से जो सीख मिली है उसे अपने जीवन में ढालकर ही, हम सब, अपने देश को और पूरी दुनिया को बेहतर बनाने में अपना योगदान दे सकते हैं। ऐसा करके ही, हम सब, सच्चे पातशाह गुरु नानक देव जी के प्रति सच्चा सम्मान व्यक्त सकते हैं। आइए, हम सब पूरी मानवता के कल्याण के लिए गुरु नानक देव जी का आशीर्वाद लें:

नानक नाम जहाज,

चढ़े सो उतरे पार।

धन्यवाद

जय हिन्द!

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