भारत की माननीया राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का भारतीय विदेश सेवा (2025 बैच) के प्रशिक्षु अधिकारियों से मुलाकात के अवसर पर संबोधन

राष्ट्रपति भवन : 27.08.2026

डाउनलोड : भाषण भारत की माननीया राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का भारतीय विदेश सेवा (2025 बैच) के प्रशिक्षु अधिकारियों से मुलाकात के अवसर पर  संबोधन(हिन्दी, 151.9 किलोबाइट)

भारतीय विदेश सेवा के प्रिय प्रशिक्षु अधिकारियों,

राष्ट्रपति भवन में आप सभी का हार्दिक स्वागत है!

भारतीय विदेश सेवा में चयनित होने के लिए मैं आप सभी को बधाई देती हूं। इस प्रतिष्ठित सेवा के अधिकारियों के रूप में, आपको विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने, राष्ट्र हित को आगे बढ़ाने तथा विश्व के विभिन्न देशों के साथ भारत के संबंधों को सुदृढ़ करने का विशेषाधिकार और दायित्व प्राप्त होगा। इस बैच ने सेवा में जो विविधता लाई है, उसे देखकर मुझे प्रसन्नता हो रही है। भारतीय विदेश सेवा तब परिपूर्ण और समृद्ध होती है जब यह भारत को बनाने वाले इसके विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं, संस्कृतियों, अनुभवों और आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करती है। राजनयिकों के तौर पर यह विविधता आपकी सबसे बड़ी शक्तियों में से एक होगी।

मैं, विशेष रूप से भूटान की शाही सरकार के विदेश और बाह्य व्यापार मंत्रालय के दो अधिकारियों का स्वागत करती हूं, जो अपने समकक्ष भारतीय अधिकारियों के साथ प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। भारत और भूटान के बीच विशेष और अटूट संबंध हैं जो आपसी विश्वास, सम्मान और साझा मूल्यों पर आधारित हैं। आपकी यहां उपस्थिति दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों को दर्शाती है।

मुझे विदेश सेवा संस्थान में आपको प्रशिक्षण के दौरान हुए अनुभवों के बारे में जानकर प्रसन्नता हुई है। मुझे विश्वास है कि प्रशिक्षण के दौरान आप सब रणनीतिक सोच, सांस्कृतिक समझ, समझौता-वार्ता और प्रभावी संप्रेषण-कला में पारंगत हुए होंगे। यह आप सबके राजनयिक करियर के लिए बहुत आवश्यक है।

प्रिय प्रशिक्षु अधिकारियों,

आप ऐसे महत्वपूर्ण समय में अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं जब भारत अपनी विकास यात्रा के एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है। आज विश्व व्यवस्था में भारत का उभरना अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य की प्रमुख वास्तविकताओं में से एक है। लेकिन, भारत के परिवर्तन को केवल आर्थिक विकास के आधार पर नहीं आंका जा सकता। इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि भारत लोकतांत्रिक विकल्पों, सामाजिक बहुलता और संस्थागत निरंतरता को बनाए रखते हुए व्यापक स्तर पर विकास कर रहा है।

भारत की वैश्विक सहभागिता सदैव देशवासियों की आकांक्षाओं के अनुरूप होनी चाहिए: राष्‍ट्रहित सर्वोपरि। यह आपके पेशेवर जीवन का एक स्थायी सिद्धांत बना रहना चाहिए। जैसे-जैसे भारतवर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' बनने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है, राजनय की भूमिका भी बढ़ती जा रही है। मैं आपके साथ पेशेवर उत्कृष्टता और कूटनीतिक व्यवहार के संबंध में कुछ विचार साझा करना चाहूंगी, जो मुझे आशा है कि आगे की आपकी यात्रा में आपका मार्गदर्शन करेंगे।

राजनयिकों को अपनी सहभागिता केवल सरकारी कार्यालयों तथा आधिकारिक बैठकों तक सीमित नहीं रखनी चाहिए। आपको विश्वविद्यालयों, कारोबारी जगत, शोधकर्ताओं, नवप्रवर्तकों, सांस्कृतिक संस्थानों, सिविल सोसायटी तथा स्थानीय समुदायों से भी जुड़ाव बढ़ाना चाहिए।

साथ ही, आपको प्रवासी भारतीय समुदाय के साथ भी सार्थक रूप से जुड़े रहना चाहिए। विदेश यात्राओं के दौरान भारतीय समुदाय के साथ मेरी मुलाकातें मुझे हमेशा उनकी उपलब्धियों पर गर्व की अनुभूति कराती है-

चाहे वह व्यवसाय, शिक्षा, संस्कृति या सार्वजनिक जीवन का हो। आपको विशेष रूप से प्रवासी भारतीय समुदाय के युवा सदस्यों को भारत से जुड़े रहने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए और उनके लिए ऐसे अवसरों की तलाश करनी चाहिए जिनके माध्यम से वे भारत की विकास यात्रा में योगदान दे सकें।

भारत की आर्थिक प्रगति विश्व के साथ हमारे जुड़ाव के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रही है। आपको निवेश, प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में उभर रहे अवसरों के प्रति सजग रहना चाहिए और ऐसे साझेदारी संबंध विकसित करने चाहिए जो भारत के राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ा

प्रिय प्रशिक्षु अधिकारियों,

कूटनीति का स्वरूप स्वयं भी तेजी से बदल रहा है। प्रौद्योगिकी ने राष्ट्रों के बीच संवाद के तौर-तरीकों, कारोबार के संचालन और नागरिकों द्वारा सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच के तरीकों को बदल दिया है। विदेशों में स्थित भारत के मिशनों को भी इस परिवर्तन के अनुरूप निरंतर आगे बढ़ना होगा।

प्रौद्योगिकी का उपयोग केवल संचार के साधन के रूप में नहीं, बल्कि सुशासन और अधिक सार्थक संवाद के माध्यम के रूप में भी किया जाना चाहिए। आपको मिशनों की डिजिटल उपस्थिति को सुदृढ़ करना चाहिए और साइबर सुरक्षा और निजता का ध्यान रखते हुए एआई और डेटा- आधारित उपकरणों सहित नई प्रौद्योगिकियों की संभावनाओं का पता लगाना चाहिए। लेकिन हमेशा याद रखें:- प्रौद्योगिकी को कभी भी मानवीय संवेदनशीलता का स्थान नहीं लेना चाहिए।

मैं आपसे आग्रह करती हूं कि यह सुनिश्चित करें कि जरूरत के समय भारतीय मिशन हमारे नागरिकों के लिए हमेशा सुलभ और तत्पर रहें। आपको हाल के वर्षों में हमारे द्वारा चलाए गए बड़े पैमाने के निकासी एवं मानवीय सहायता अभियानों के माध्यम से स्थापित इस परंपरा को आगे बढ़ाना चाहिए। प्रत्येक भारतीय को, जिसे सहायता की जरूरत है, यह अनुभव होना चाहिए कि उनका मिशन सहज-सुलभ, संवेदनशील और विश्वसनीय है।

प्रिय प्रशिक्षु अधिकारियों,

भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी न केवल ऐसे देश का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसकी सभ्यतागत यात्रा हजारों वर्ष में विकसित हुई है, बल्कि आप एक युवा, गतिशील और आकांक्षी भारत का भी प्रतिनिधित्व करते हैं। शांति, बहुलतावाद, संवाद, सह-अस्तित्व और विविधता के प्रति सम्मान, भारत के ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के सभ्यतागत लोकाचार में गहराई से समाहित हैं। संघर्ष और अनिश्चितता से घिरे आज के विश्व में इन मूल्यों की प्रासंगिकता निरंतर बनी हुई है।

सांस्कृतिक कूटनीति आपके दायित्वों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। मैं आपसे आग्रह करती हूं कि भारत की समृद्ध कला एवं सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ उसकी क्षमताओं और उपलब्धियों को विश्व के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए रचनात्मक और महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण अपनाएं।

प्रिय प्रशिक्षु अधिकारियों,

जिस दुनिया में आप कार्य करेंगे, वह असाधारण गति से बदल रही है। आपको चुस्त, जिज्ञासु और निरंतर सीखने के लिए तत्पर रहना होगा।

सबसे बढ़कर, आपको सदैव विनयशील बने रहना होगा। जब ​​आप विदेश जाएं, तो सदैव याद रखें कि आप केवल भारत सरकार का ही नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों और उनकी आशाओं और आकांक्षाओं का भी प्रतिनिधित्व करते हैं।

मैं आपसे आग्रह करती हूं कि सत्यनिष्ठा, शुचिता और पेशेवर आचरण के उच्चतम मानदंडों को सदैव बनाए रखें। आपका आचरण हमारे देश की प्रतिष्ठा को प्रभावित करता है।

मुझे पूरा विश्वास है कि यह बैच भारतीय विदेश सेवा की गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाने के साथ-साथ भारतीय कूटनीति की नई पीढ़ी को आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

आप भारत की विशिष्टता और गरिमा के साथ सेवा करें। आप विश्वभर के साथ मैत्री और पारस्परिक समझ के सेतु बनाने में अपना योगदान दें और सदैव तिरंगे को ऊंचा लहराते रहें।

मैं आप सभी के उज्ज्वल, सफल और संतोषपूर्ण करियर की कामना करती हूं।

धन्यवाद,
जय हिंद!

समाचार पत्रिका के लिए सदस्यता लें

सदस्यता का प्रकार
वह न्यूज़लेटर चुनें जिसकी आप सदस्यता लेना चाहते हैं।
सब्सक्राइबर का ईमेल पता