भारत की माननीय राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का उत्तर मैसिडोनिया की असेंबली में संबोधन
स्कोप्ये : 21.07.2026
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(हिन्दी, 150.61 किलोबाइट)
मैं आज आपके समक्ष विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के 1.4 अरब भाई-बहनों की ओर से अपनी गहन सद्भावना व्यक्त करने के लिए उपस्थित हूं। मेरे साथ हमारे राज्य मंत्री और दो प्रतिष्ठित भारतीय संसद सदस्य भी उपस्थित हैं।
मैं अपनी मेजबान, उत्तर मैसिडोनिया की महामहिम राष्ट्रपति की सहृदयता और आतिथ्य के लिए उनके प्रति आभार व्यक्त करती हूं। मैं माननीय स्पीकर का भी आभार मानती हूं कि आपने मुझे इस प्रतिष्ठित सदन को संबोधित करने का अवसर दिया।
प्रिय मित्रो,
हम भारत में, उत्तर मैसिडोनिया गणराज्य को कोई दूर का देश नहीं, बल्कि एक सुस्थिर, बहुध्रुवीय, और समृद्ध वैश्विक भविष्य की संरचना का एक महत्वपूर्ण स्तंभ मानते हैं।
हमारे संबंधों की शुरुआत दो हजार वर्ष से भी पहले हुई थी। इस क्षेत्र के योद्धाओं और व्यापारियों के ऐतिहासिक अभियानों ने व्यापार, दर्शन, और कला के लिए महत्वपूर्ण मार्गों की राह प्रशस्त की, जिससे हमारी शुरुआती सभ्यताएं आपस में जुड़ीं।
आज, यह ऐतिहासिक संबंध सांस्कृतिक मेल-मिलाप के माध्यम से फल-फूल रहा है। आपकी समृद्ध परंपराओं में भारत की बहुलतावादी संस्कृति की गूंज सुनाई देती है। चाहे योग की सर्वमान्य अभिव्यक्ति के माध्यम से हो, सिनेमा के लिए एक जैसा अनुराग हो या शैक्षणिक विचार-विनिमय के माध्यम से हो, हमारे लोग एक-दूसरे को प्राचीन, जीवंत संस्कृतियों के संरक्षणकर्ताओं के रूप में जानते हैं। कल मुझे स्कोप्ये की सबसे विख्यात पुत्री, मदर टेरेसा को श्रद्धांजलि देने का सौभाग्य मिलेगा। मदर टेरेसा ने भारत को अपना घर बनाया था। मैं उत्तर मैसिडोनिया के लोगों को महात्मा गांधी की एक सुंदर प्रतिमा सौपूंगी जिनके शांति और अहिंसा के शाश्वत आदर्श हमें एक सूत्र में बांधते हैं।
जब मैं इस सदन के चारों ओर देखती हूं, तो मुझे यह स्मरण हो आता है कि किसी राष्ट्र की वास्तविक जनभावना उसकी संसद में व्यक्त होती है। लोकतंत्र सिर्फ शासन चलाने की प्रणाली नहीं है, बल्कि भारत और उत्तर मैसिडोनिया को जोड़ने वाला एक साझा विश्वास है। हमारी संसदें हमारे लोगों की आजादी की रक्षक हैं, हमारे कानूनों की शिल्पकार हैं और हमारी राष्ट्रीय चेतना के दर्पण हैं।
यही कारण है कि संसदीय राजनय महत्वपूर्ण है। हमारे संसद सदस्यों के बीच आपसी बातचीत और संवाद से ऐसे संस्थागत विश्वास का निर्माण होता है जो राजनीतिक दौर बदलने के बाद भी कायम रहता है। हमारे युवा विधि-निर्माताओं को नई दिल्ली और स्कोप्ये के बीच यात्रा करने दें। उन्हें मिलने दें और संसदीय परिपाटियों एवं लोक नीति प्रतिपादन में सर्वश्रेष्ठ कार्य-पद्धतियों को साझा करने दें।
प्रिय मित्रो,
भारत की संसद 1.4 अरब से ज्यादा नागरिकों की आकाक्षाओं को प्रतिबिंबित करती है और असाधारण विविधता वाले देश को लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति देती है। हमारे संविधान से मार्गदर्शन प्राप्त करने वाली हमारी संसद इस सिद्धांत को अभिव्यक्त करती है कि भारत की विविधता लोकतंत्र के लिए कोई बाधा नहीं, बल्कि इसकी सबसे बड़ी खूबियों में से एक है।
भारत का लोकतांत्रिक अनुभव न केवल अपने संवैधानिक आधारों के कारण उल्लेखनीय है बल्कि अपने असाधारण विस्तार के कारण भी विशिष्ट है। लगभग एक अरब निर्वाचकों के साथ, हमारे आम चुनावों से मानव इतिहास की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक कवायद का निर्माण होता है। इतनी विशाल भौगोलिक, भाषायी और सांस्कृतिक विविधता वाले भूभाग में चुनावों का सफल संचालन, भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं की अविचलता और वह भरोसा, हमारे लोग निर्वाचन प्रक्रिया में रखते हैं, उनका प्रमाण है।
मुझे इस सदन में उपस्थित अनेक महिला सांसदों को देखकर खुशी हो रही है। उत्तरी मैसिडोनिया की महामहिम राष्ट्रपति स्वयं इस सदन की एक प्रतिष्ठित सदस्य रही हैं। मैं आप सभी को भारत में, विशेष रूप से हमारी पंचायती राज प्रणाली में, महिलाओं की बढ़ती लोकतांत्रिक भागीदारी के बारे में बताना चाहूंगी, जहां एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं। इसका परिणाम यह हुआ है कि लाखों महिलाएं सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भागीदार बन गई हैं। हमने हाल में एक ऐतिहासिक कानून भी अधिनियमित किया है जिससे संसद के निचले सदन में और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण सुनिश्चित हुआ है जिससे अधिक प्रतिनिधिक और समावेशी लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि होती है।
हम मानव इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़े हैं। विश्व की भू-राजनीतिक और आर्थिक ताकत का केंद्र बदल रहा है। इस नए दौर में, भारत दक्षिण-पूर्वी यूरोप को हाशिए पर पड़े क्षेत्र के तौर पर नहीं, बल्कि विकास और नवाचार के एक गतिमान क्षेत्र के रूप में मानता है। उत्तरी मैसिडोनिया इस बदलाव के केंद्र में स्थित है। आपका देश भूमध्य सागर को मध्य यूरोप, और पूर्व को पश्चिम से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार पर स्थित है। हम व्यापार और निवेश के नए मौकों के जरिए द्विपक्षीय स्तर पर और पूरे क्षेत्र में अपने जुड़ाव को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
कोई भी देश अकेले रहकर प्रगति नहीं कर सकता। भारत की प्राचीन सभ्यतागत जीवन- दृष्टि 'वसुधैव कुटुंबकम' के प्राचीन सिद्धांत पर आधारित है, जिसका अर्थ है-पूरा विश्व एक कुटुम्ब है। आज जब विश्व संघर्षों और आर्थिक विभाजन का सामना कर रहा है, तब यह जीवन-दृष्टि हमें दीवारें खड़ी करने के बजाय आपसी सहयोग और विश्वास के पुल बनाने की प्रेरणा देती है।
आइए, निकट भविष्य के क्षितिज से परे सोचें। आइए, हम अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को ठोस आर्थिक उपलब्धियों में बदलें। आइए, इतिहास में गहराई से रचे-बसे और भावी कल की संकल्पना से प्रेरित दोनों लोकतांत्रिक देश मिलकर आगे की वह राह तय करें जो हमारे लोगों के लिए शांति और समृद्धि लेकर आए।
धन्यवाद।
