भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का शहीद इहादादेन अब्देलहाफिद विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय केंद्र में संबोधन
सिदी अब्देल्लाह, अल्जीरिया : 15.10.2024
डाउनलोड : भाषण
(हिन्दी, 138.04 किलोबाइट)
आज आप सभी के बीच आकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। मानद डॉक्टरेट से सम्मानित होना मेरे लिए सचमुच सम्मान की बात है। इस सम्मान से मेरे व्यक्तिगत रूप से अधिक मेरे देश का गौरव बढ़ा है। आप यह सम्मान उस देश, सभ्यता और संस्कृति को प्रदान कर रहे हैं जो अनादि काल से शांति और शिक्षा का प्रबल और निरंतर समर्थक रहा है।
इस विशिष्ट सम्मान के लिए मुझे और मेरे देश को चुनने के लिए मैं, शहीद इहादादेन अब्देलहाफिद, सिदी अब्देल्लाह के वैज्ञानिक और प्रौद्योगिकीय केन्द्र के प्रति आभार व्यक्त करती हूं। मुझे ज्ञात है कि भारत-अल्जीरिया सहयोग के एक उज्ज्वल उदाहरण के रूप में स्थापित इस विश्वविद्यालय का उद्घाटन मार्च 2024 में राष्ट्रपति तेब्बूने ने किया था। कल, मुझे प्रत्यक्ष रूप से राष्ट्रपति तेब्बूने की दूरदृष्टि और ‘न्यू अल्जीरिया’ की परिकल्पना को देखने का अवसर मिला, जिसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी को अग्रणी भूमिका प्रदान की जाएगी।
मैं और मेरे प्रतिनिधिमंडल के सदस्य, भारत के 1.4 अरब लोगों की ओर से अल्जीरिया के मित्रवत लोगों, विशेष रूप से विश्व की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले हमारे देश के लगभग 37.5 करोड़ युवाओं की ओर से, जो हमारी आबादी का 28% है, और जो अल्जीरिया के युवाओं की तरह ही एक शांतिपूर्ण और समृद्ध विश्व बनाने के लिए उत्सुक हैं, के लिए शुभकामनाएं और बधाई लेकर आए हैं।
राष्ट्रीय विकास के लक्ष्यों को सीधे प्रभावित करने वाले ज्ञान की खोज के प्रति समर्पित, आत्मविश्वास से भरपूर विश्वविद्यालयों के युवाओं को संबोधित करना मुझे हमेशा खुशी देता है।
मेरे प्रिय विद्यार्थियों,
अब जब मैं आपके बीच हूं तो आइए मैं आपको अपने अतीत की यात्रा पर ले चलूं और आपके साथ अपनी जीवन-यात्रा साझा करूं – एक जनजातीय, वंचित और सुदूर गांव से लेकर अपने देश के राष्ट्राध्यक्ष के पद तक पहुंचने तक की मेरी यात्रा।
मेरा जन्म भारत के जनजातीय बहुल राज्य ओडिशा के उपरबेड़ा गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। मेरा बचपन चुनौतीपूर्ण और कठिनाइयों से भरा रहा। मेरी प्रारंभिक शिक्षा एक स्थानीय प्राथमिक विद्यालय में हुई और बाद में, मैं उच्च शिक्षा के लिए भुवनेश्वर चली गई। मैंने भुवनेश्वर के रमा देवी महिला कॉलेज से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और अपने गांव से विश्वविद्यालय की शिक्षा प्राप्त करने वाली पहली महिला बनी। राजनीति में प्रवेश करने से पहले, मैंने लिपिक और शिक्षिका के रूप में काम किया। शिक्षा और सशक्तीकरण के प्रति मेरी प्रतिबद्धता, सदैव मेरे व्यक्तिगत जीवन की प्रेरक शक्ति रही है। एक शिक्षिका के रूप में मैंने विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं के जीवन को सही दिशा देने में अपनी ओर से विनम्र योगदान देने का प्रयास किया और उनमें ज्ञान, दृढ़ता और करुणा के मूल्यों को विकसित करने का प्रयास किया। उसके बाद मैंने स्वयं को राष्ट्र की सेवा के लिए समर्पित कर दिया। आज मैं, भारतीय गणराज्य के सर्वोच्च पद को सुशोभित करने वाली जनजातीय समुदाय से आने वाली पहली व्यक्ति हूं और साथ ही, सबसे कम आयु की व्यक्ति भी हूं।
मित्रो,
प्रौद्योगिकी-आधारित और महिलाओं के नेतृत्व वाला विकास भारत के तीव्र आर्थिक सुधारों के प्रमुख आधारों में शामिल है। भारत में हो रहा व्यापक डिजिटल परिवर्तन, जैसा कि विश्व में कहीं ओर देखने को नहीं मिला है, कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित कर रहा है। हमारे आईटी क्षेत्र में काम करने वाले 44 लाख पेशेवरों में लगभग 36% महिलाएं हैं। प्रौद्योगिकी-आधारित वित्तीय समावेशन का लाभ भी बड़े पैमाने पर ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं तक पहुंचा है।
मुझे यह जानकर प्रसन्नता है कि अल्जीरिया अपने रिटेल पेमेंट सिस्टम के डिजिटलीकरण के क्षेत्र में भारत के साथ संवाद को बढ़ावा देने के लिए इच्छुक है। अंतरिक्ष अन्वेषण और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी हमने प्रगति की है। अगले वर्ष प्रक्षेपित किए जाने के लिए निर्धारित हमारा गगनयान मिशन भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान के तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों के एक दल को अंतरिक्ष में ले जाएगा।
मित्रो,
शिक्षा निस्संदेह मानव विकास, सामाजिक उत्थान और आर्थिक विकास का सबसे प्रभावशाली माध्यम है। यह समानता लाती है और सामाजिक विषमताओं को दूर करती है जिससे विकास का लाभ समाज के सबसे वंचित वर्गों तक भी पहुंचा है। शिक्षा केवल व्यक्ति के सशक्तीकरण का माध्यम ही नहीं बल्कि राष्ट्र के विकास का भी एक महत्वपूर्ण साधन है।
हाल के वर्षों में, भारत ने शिक्षा के क्षेत्र में काफी प्रगति की है। हमारी साक्षरता दरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था विश्व की सबसे बड़ी उच्च शिक्षा व्यवस्थाओं में से एक है। इसमें 58,000 से अधिक उच्च शिक्षा संस्थान हैं और 4.3 करोड़ से अधिक विद्यार्थी उच्च शिक्षा में नामांकित हैं। केवल पिछले दशक में ही, हमने लगभग 400 नए विश्वविद्यालय, 5300 नए महाविद्यालय, 75 राष्ट्रीय महत्व के नए संस्थान, 14 नए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, 7 नए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान और 7 नए भारतीय प्रबंध संस्थान स्थापित किए हैं। इन नए संस्थानों में से आधे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित हैं।
विद्यार्थियों को प्रबुद्ध नागरिक के रूप में तैयार करने और भारत को भविष्य की ज्ञान-अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर करने के उद्देश्य से, भारत सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में अनेक सुधार किए हैं। हमनें हाल ही में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 लागू की है जिसका उद्देश्य सभी स्तरों पर शिक्षा व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन लाना है। इस नीति में विदेशी शिक्षण संस्थानों के साथ सहयोग के रास्ते भी खुले हैं।
मैं आपका ध्यान हमारी प्रमुख पहल, ‘भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग’, जिसे लोकप्रिय रूप से आईटीईसी कार्यक्रम के नाम से जाना जाता है, की ओर आकर्षित करना चाहती हूं। इस पहल के तहत, अब तक 31,000 अफ्रीकी नागरिकों और 155 अल्जीरियाई नागरिकों ने इस कार्यक्रम का लाभ उठाया है।
हमारे लिए यह गर्व की बात है कि आईटीईसी के पूर्व विद्यार्थियों ने अपने- अपने देशों में जाकर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। उनमें से अनेक मंत्री, वरिष्ठ राजनयिक, सरकारी अधिकारी और प्रमुख उद्यमी बने हैं। मैं अल्जीरिया सरकार से आग्रह करती हूं कि वे भारत सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे इस अनूठे अवसर का लाभ उठाएं।
भारत, पश्चिमी देशों के संस्थानों की तुलना में बहुत कम लागत पर अफ्रीका, जिसमें अल्जीरिया शामिल है, से बड़ी संख्या में आने वाले विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करता है। हम अफ्रीकी विद्यार्थियों के लिए अनेक छात्रवृत्तियां और फेलोशिप प्रदान करते हैं। मैं अल्जीरिया के शैक्षणिक संस्थानों, सरकारी विभागों और युवाओं से आह्वान करता हूं कि वे भारत सरकार की विभिन्न पहलों का लाभ उठाएं।
मित्रों, भारत और अल्जीरिया के संबंध औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध अल्जीरिया के मुक्ति संघर्ष के दिनों से चले आ रहे हैं। उस समय भारत ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अल्जीरिया की स्वतंत्रता के पक्ष में आवाज उठाई थी। जुलाई 1962 में अल्जीरिया की स्वतंत्रता और दोनो देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद, इसी नीति दृष्टिकोण ने भारत और अल्जीरिया को और निकट लाया हैं और हमारे मैत्रीपूर्ण संबंध आज भी प्रगाढ़ हो रहे हैं।
वर्तमान में हो रहे ये विकास केवल एक अच्छी शुरुआत भर हैं। हमारे संबंधों में निहित संभावनाओं को पूरी तरह साकार करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है और यह विस्तार हमारे दोनों देशों के परिश्रमी युवा ही संभव बना सकते हैं। मुझे इस देश की युवा शक्ति पर पूरा विश्वास है और मेरा मानना है कि उनमें अल्जीरिया को गौरवपूर्ण विकास के पथ पर आगे ले जाने की पूरी क्षमता है। ये युवा ही आगे चलकर हमारे सुदृढ़ जन-से-जन के संबंधों को और मजबूत बनाने में सेतु का कार्य करेंगे।
एक बार फिर, मुझे और मेरे देश को दिए गए सम्मान एवं आत्मीय स्वागत के लिए मैं विश्वविद्यालय के प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करती हूं। मैं राष्ट्रपति तेब्बूने और मंत्री कामेल बद्दारी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करती हूं। मैं डीन, सभी सम्मानित संकाय सदस्यों और विद्यार्थियों को उनके भावी प्रयासों में सफलता के लिए शुभकामनाएं देती हूं।
मेरे युवा मित्रो, आप 'नए अल्जीरिया' के प्रबुद्ध नागरिक बनें और भारत तथा अल्जीरिया के बीच संबंधों को गहरा करने वाले एक सशक्त एवं जीवंत सेतु के रूप में अपनी भूमिका निभाएं। आज, हमारे ऐतिहासिक संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ गया है।
जय हिंद!
शुक्रान!
