भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का सेना इंजीनियरी सेवा के प्रोबेशनर्स से मुलाकात के अवसर पर संबोधन

राष्ट्रपति भवन : 25.06.2026

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प्रिय प्रशिक्षु अधिकारियो,

मैं आप सभी को सेना इंजीनियरी सेवा (एमईएस) में शामिल होने पर बधाई देती हूं। इस संगठन ने देश के डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

सेना इंजीनियरी सेवा हमारे देश के डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ है। यह सेवा भारतीय सशस्त्र बलों के लिए डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और उसका रखरखाव करने के लिए उत्तरदायी है। हमारे देश के सामरिक महत्व के प्रतिष्ठानों का निर्माण और रखरखाव करके एमईएस के अधिकारी हमारे सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमताओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सेना इंजीनियरी सेवा के अधिकारियों का कौशल, समर्पण और कठोर परिश्रम यह सुनिश्चित करने की दृष्‍टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हमारे सैनिक, नौसैनिक, और वायु सैनिक देश की रक्षा के अपने कर्तव्यों का कारगर तरीके से और कुशलतापूर्वक निर्वहन कर सकें।

युवा अधिकारियों के रूप में, आप सब हमारी गौरवशाली विरासत के संरक्षक और भारत के भावी डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माता हैं। मैं आपसे कहना चाहूंगी कि आप अपने कार्य में पेशेवर दृष्‍टिकोण, सत्यनिष्ठा, तकनीकी उत्कृष्टता और कर्तव्य के प्रति समर्पण के उच्चतम मानकों को बनाए रखें। आप नवाचार को अपनाएं, नई-नई प्रौद्योगिकियों  का लाभ उठाएं और आप जिस भी परियोजना के लिए कार्य करें उनमें उत्कृष्टता लाने की चेष्‍टा करें। आपका नेतृत्व, समर्पण और दूरदृष्टि न केवल इस संगठन के भविष्य को आकार देंगे, बल्कि हमारे महान राष्ट्र के भविष्य को भी दिशा प्रदान करेंगे।

प्रिय प्रशिक्षु अधिकारियो,

आज के दौर में, जब विश्व में संघर्ष और भू-राजनीतिक तनाव व्‍याप्‍त हैं, आत्मनिर्भरता हासिल करना राष्ट्रों के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता बन गई है। एक आत्मनिर्भर देश संकट के समय अपनी आर्थिक सुस्थिरता बनाए रखने और विकास संबंधी प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में अधिक सक्षम होता है। यह बात ऑपरेशन सिंदूर के

दौरान स्पष्ट रूप से देखी गई, जिसने यह दर्शाया कि स्वदेशी रक्षा क्षमताएं, उन्नत प्रौद्योगिकी और एक सुदृढ़ घरेलू औद्योगिक आधार किसी राष्ट्र की परिचालनात्‍मक तत्‍परता और रणनीतिक प्रभावशीलता को सशक्त बनाने में कितने महत्वपूर्ण हैं। मुझे यह जानकर खुशी हो रही है कि सेना इंजीनियरी सेवा 'मेड इन इंडिया' उत्पादों को बढ़ावा दे रही है और उनका उपयोग कर रही है। सेना इंजीनियरी सेवा के अधिकारी 'आत्मनिर्भर भारत' के विज़न को हासिल करने की ओर अग्रसर हैं। मेरा आप सबसे आग्रह है कि युवा अधिकारी होने के नाते निर्माण और रखरखाव के सभी क्षेत्रों में नवीनतम और उन्नत प्रौद्योगिकियों को विकसित करें और उन्हें क्रियान्वित करें।

हाल के वर्षों में, हमने देखा है कि सशस्त्र बलों और रक्षा प्रतिष्ठानों सहित प्रत्येक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। थल सेना, नौसेना, वायु सेना और सहयोगी संगठनों में महिलाएं हर रुकावट को पार करते हुए उन भूमिकाओं में उत्कृष्टतापूर्वक कार्य कर रही हैं जिन्हें कभी उनकी पहुंच से बाहर माना जाता था। उनके पेशेवर दृष्टिकोण, नेतृत्व, साहस और समर्पण से हमारे संस्थानों को बहुत लाभ मिला है और हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा और सशक्त हुई है। मैं एमईएस के आगामी बैचों में महिला अधिकारियों को भी देखना चाहती हूं। विविधतापूर्ण एवं समावेशी कार्यबल न केवल हमारे संविधान के मूल्यों को प्रतिबिंबित करता है, बल्कि यह संगठन को अधिक प्रभावी एवं नवोन्मेषी बनाता है।

प्रिय अधिकारियो,

आज विश्व जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण से जुड़ी विभिन्‍न चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे परिदृश्य में, संधारणीय विकास अब केवल एक विकल्प नहीं है, बल्कि एक अनिवार्य आवश्यकता बन गया है। अभियंता होने के नाते आप सब की यह जिम्मेदारी है कि आप योजना बनाने, निर्माण एवं रखरखाव करने में पर्यावरण-अनुकूल संधारणीय कार्य-पद्धतियों को बढ़ावा दें। आपको हमारे चिरंतन मूल्यों का पालन करना है जो हमें प्रकृति का सम्मान और संरक्षण करने की सीख देते हैं। आपको ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनानी है, ऊर्जा और जल का संरक्षण करना है, हरित क्षेत्र में वृद्धि करनी है, अपशिष्ट कम करना है और अपने कार्य के प्रत्येक पहलू में संधारणीयता को बढ़ावा देना है। सुदृढ़, कार्यकुशल और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी अवसंरचना न केवल वर्तमान की आवश्यकताओं को पूरा करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के हितों को भी सुरक्षित रखेगी।

मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि सेना इंजीनियरी सेवा ने गृह यानि ग्रीन रेटिंग फॉर इंटिग्रेटेड हैबिटेट असेसमेंट मानकों के अनुकूल भवन निर्माण पद्धतियों, ऊर्जा-कुशल डिजाइनों, वर्षा जल संचयन प्रणालियों, और अन्य हरित पहलों को अपना कर पर्यावरणीय संधारणीयता के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता दर्शाई है।

आपके प्रयासों से न केवल एक सशक्त और सुरक्षित भारत के निर्माण में, बल्कि एक स्वच्छ, हरित और संधारणीय भारत के निर्माण में भी योगदान मिलना चाहिए। मुझे पूरा विश्वास है कि आप समर्पण, नवाचार और सेवा के प्रति प्रतिबद्ध होकर सेना इंजीनियरी सेवा की सर्वोच्च परंपराओं को बनाए रखेंगे और 'विकसित भारत' की संकल्पना को साकार करने में योगदान देंगे।

मैं आप सभी के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं व्यक्त करती हूं और राष्ट्रसेवा के आपके आगामी वर्षों के सार्थक होने की कामना करती हूं।

धन्यवाद, जय हिंद! जय भारत!

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