भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2025 के उद्घाटन के अवसर पर संबोधन

नई दिल्ली : 01.02.2025

डाउनलोड : भाषण भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2025 के उद्घाटन के अवसर पर संबोधन(हिन्दी, 143.38 किलोबाइट)

ADDRESS BY THE HON’BLE PRESIDENT OF INDIA, SMT. DROUPADI MURMU ON THE OCCASION OF INAUGURATION OF THE NEW DELHI WORLD BOOK FAIR 2025

इस पुस्तक मेले के उद्घाटन के अवसर पर यहां उपस्थित ढेरों पुस्तक प्रेमियों के बीच उपस्थित होकर मुझे खुशी हो रही है। मुझे बताया गया है कि राष्ट्रीय पुस्तक न्यास और शिक्षा मंत्रालय विगत पांच दशकों से इस पुस्तक मेले का आयोजन कर रहे हैं। मैं पुस्तकें पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के इस महान कार्य में उनके अनवरत योगदान के लिए उनकी सराहना करती हूं।

इस वर्ष के मेले का विषय पिछले 75 वर्षों में एक गणतंत्र के रूप में भारत की यात्रा को उजागर करता है। यह पुस्तक मेला भारत की सांस्कृतिक विविधता, इसकी अटूट एकता और सराहनीय प्रगति को भी शानदार तरीके से अभिव्यक्त करता है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि इस मेले में कई अन्य देश भी भागीदारी करते हैं। मुझे प्रसन्नता हुई है कि अब की बार इस मेले में रूसी परिसंघ को फोकस देश' बनाया गया है और रूसी परिसंघ विभिन्न प्रकार के साहित्यिक कार्यक्रमों, बाल गतिविधियों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करेगा। मुझे विश्वास है कि इस मेले में रूस की विशेष भागीदारी से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंध और मजबूत होंगे।

देवियो और सज्जनो,

पुस्तकें पढ़ना एक शौक मात्र नहीं होता हैं; बल्कि यह परिवर्तनकारी अनुभव होता है। अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों की पुस्तकें पढ़ने से क्षेत्रों और समुदायों के बीच आपस में जुड़ाव बढ़ता है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई कि इस पुस्तक मेले में भारत की विभिन्न भाषाओं और अन्य देशों की भाषाओं के पुस्तकों के बहुत से स्टॉल लगाए गए हैं। इससे पुस्तक प्रेमियों के लिए एक ही स्थान पर पूरे विश्व का साहित्य सुलभ हो जाएगा।

मैं सभी से आग्रह करना चाहूंगी कि बच्चों के लिए पुस्तक रचना को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास करें। बच्चों में विकसित की जाने वाली सबसे अच्छी आदतों में से एक है पुस्तकें पढ़ने के प्रति प्रेम पैदा करना। घर के प्रत्येक अग्रज को इसे एक महत्वपूर्ण दायित्व मानकर पूरा करना चाहिए। मैं कृतज्ञतापूर्वक अपने उन सभी अग्रजों, जिनमें शिक्षक भी शामिल हैं का स्मरण करती हूं जिन्होंने मुझे अधिक से अधिक पुस्तकें पढ़ने के लिए प्रेरित किया। मैं ओड़िया कविता की कुछ पंक्तियां सुनाती हूं जो मैंने अपने स्कूल के दिनों में पढ़ी थी:

ଏହି ବହିରୁ ପଢ଼େ ମୁଁ ପାଠ,
ବହିକି ପଢ଼ି ବୋଲାଏ ଚାଟ,
ଏ ବହି ମୋତେ ବତାଏ ବାଟ,
ବହିଟି ମୋର ସାଥୀ;
ଏ ବହି ପଢ଼ି କେତେ କଥା ମୁଁ
ଶିଖଇ ନିତି ନିତି ।

इसका भावार्थ है:

मैं इस पुस्तक से शिक्षा ग्रहण करता हूं। पुस्तक पढ़कर मैं एक विद्यार्थी बना। पुस्तक मुझे सही रास्ता दिखाती है। पुस्तक मेरी मित्र है और मैं पुस्तकें पढ़ कर बहुत-सी बातें सीखता हूं।

अगर बचपन में ही पढ़ने की आदत डाल दी जाए, तो वह जीवन भर कायम रहने वाली आदत बन जाती है।

देवियो और सज्जनो,

पाठ्यक्रम में निर्धारित पुस्तकों को पढ़ने के अलावा विद्यार्थियों को विविध विषयों पर विभिन्न प्रकार की पुस्तकें भी पढ़नी चाहिए। इससे उन्हें अपनी क्षमता और योग्यताओं को पहचानने में मदद मिलेगी। इससे उन्हें अच्छा इंसान बनने में भी मदद मिलेगी।

मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि इस पुस्तक मेले में बाल साहित्य और पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने के लिए कई प्रकार की गतिविधियों की योजना बनाई गई है।

हमारे बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए अभिभावकों, शिक्षकों, लेखकों, प्रकाशकों, स्वैच्छिक संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, मीडिया समूहों और इस कार्य में योगदान देने वाले सभी लोगों को मिलकर निरंतर प्रयास करने चाहिए। जब ​​आप किसी बच्चे में पढ़ने के प्रति रुचि जगाते हैं तो आप राष्ट्र- निर्माण में भी योगदान देते हैं।

पुस्तकों का जादू हमें एक अधिक ज्ञानवान और संवेदनशील समाज के निर्माण की दिशा में निरंतर प्रेरित करता रहे।

मैं सभी पुस्तक-प्रेमियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हूं।

धन्यवाद!
जय हिंद!
जय भारत!
 

समाचार पत्रिका के लिए सदस्यता लें

सदस्यता का प्रकार
वह न्यूज़लेटर चुनें जिसकी आप सदस्यता लेना चाहते हैं।
सब्सक्राइबर का ईमेल पता