भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में आयोजित 128वां प्रवेश प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे राज्य सिविल सेवा अधिकारियों से मुलाकात के अवसर पर संबोधन

राष्ट्रपति भवन : 02.03.2026

डाउनलोड : भाषण भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में आयोजित 128वां प्रवेश प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे राज्य सिविल सेवा अधिकारियों से मुलाकात के  अवसर पर संबोधन(हिन्दी, 603.76 किलोबाइट)

भारतीय प्रशासनिक सेवा के प्रिय अधिकारियो,

भारतीय प्रशासनिक सेवा में आपका प्रवेश आपके करियर का एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह पदोन्नति पदनाम में परिवर्तन मात्र नहीं है। इस पदोन्नति के साथ, आप सबने शासन के कहीं अधिक व्यापक क्षेत्र में कदम रखा है, एक ऐसा क्षेत्र जिसके लिए राष्ट्रीय दृष्टिकोण, गहन दूरदर्शिता और हमारे देश में लोक सेवा को कायम रखने वाले मूल्यों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता की आवश्यकता है।

राष्ट्र निर्माण के कार्य में आपकी भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। अब आपको अपने कर्तव्य निष्पादन में जिला या राज्य से परे सोचना है। इन बढ़ी हुई जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए आपका दृष्टिकोण विभाग तक ही सीमित नहीं रहे वरन् ऐसा हो जिससे प्रशासनिक बाधाएं दूर हों। आप सबको मिलजुल कर कार्य करना है, संस्थागत सामंजस्य बढ़ाते जाना है और शासन तंत्र को मजबूती प्रदान करनी है। सामूहिक पेशेवर दृष्टिकोण, समन्वय और प्रतिबद्धता विकासात्मक परिणाम लाने और लोक सेवा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं।

मुझे विश्वास है कि लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में आपके प्रवेश प्रशिक्षण कार्यक्रम से आपके दृष्टिकोण में परिवर्तन आया होगा और व्यापक बना होगा। इस प्रशिक्षण से आप सब प्रशासनिक सीमाओं से परे सोचने, भारत की विशालता और विविधता को समझने और शासन संबंधी मुद्दों के प्रति समग्र दृष्टिकोण रखते हुए विश्लेषण करने में सक्षम हुए होंगे।

लगभग दो दशकों से राज्य सिविल सेवाओं के अधिकारी के रूप में आप सबने जमीनी स्तर पर विकास पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आपका अलग- अलग समुदायों के लोगों के साथ मिलकर कार्य करने, उनकी चुनौतियों को समझने और उनकी समस्याओं का समाधान करने का अनुभव रहा है। लेकिन आप सबकी इस नई भूमिका में आपके कार्यक्षेत्र का दायरा काफी बढ़ जाएगा। आप अब किसी क्षेत्र विशेष के प्रशासक नहीं रह जाएंगे; आप शासन के लिए आवश्यक मानकों के संरक्षक हैं और इन मानकों को पूरे देश में लागू करना है। आपके द्वारा लिया गया प्रत्येक निर्णय वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के समग्र दृष्टि के अनुरूप हो।

प्रिय अधिकारियो,

आप सबकी लंबे काल की सेवा हो चुकी है और आपको जमीनी सचाई की गहरी समझ और प्रशासनिक तंत्र की गहन जानकारी है। आईएएस अधिकारी के रूप में, आप सबसे अपेक्षा की जाती है कि लोगों की जरूरतों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करें। अधिक जटिल चुनौतियों का सामना करते समय अपने बहुमूल्य अनुभव से काम लें और 'राष्ट्र सर्वोपरि' की भावना आप सबका मार्गदर्शी सिद्धांत हो।

आप सभी से अपेक्षा की जाती है कि आप सब समावेशी विकास में योगदान देंगे। एक विकसित भारत का निर्माण तभी सार्थक होगा जब इसका लाभ सबसे कमजोर और वंचित वर्गों तक पहुंचेगा। भौगोलिक, सामाजिक या आर्थिक कारणों से कोई भी व्यक्ति पीछे न रह जाए, इसके लिए अथक प्रयास करने हैं।

एक अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र जिसमें आपकी प्रतिबद्धता आवश्यक होगी, वह है संधारणीयता और जलवायु परिवर्तन। वरिष्ठ प्रशासकों के रूप में, आपको हरित प्रथाओं का समर्थन करना है, जलवायु-अनुकूल प्रशासन को बढ़ावा देना है और सतत विकास सुनिश्चित करना है। आज हम जो सामूहिक कार्य करेंगे उनसे ही आने वाली पीढ़ियों को गुणवत्तापूर्ण जीवन मिल पाएगा।

प्रिय अधिकारियो,

प्रौद्योगिकी और नवाचार के प्रयोग से शासन में अभूतपूर्व गति से परिवर्तन हो रहा है। मैं आप सब से कहना चाहूंगी कि आप तकनीकी प्रगति - एआई-संचालित समाधान, ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म, डिजिटल शिकायत निवारण प्रणाली और रीयल- टाइम एनालिटिक्स - को पूरी तरह से अपनाएं। इनसे प्रशासनिक प्रणालियां सरल बनती हैं और इनसे अंतिम व्यक्ति तक अधिक कुशलता से सेवाएं प्रदान की जा सकती हैं। लेकिन आधुनिक प्रणालियों का प्रयोग करते समय यह स्मरण रखें कि प्रौद्योगिकी में मानवीय संवेदनशीलता और तर्कसंगत निर्णय का ध्यान रखा गया है।

आपको अटूट सत्यनिष्ठा, पूर्ण पारदर्शिता और पूरी जवाबदेही के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना है। ये ऐसे सिद्धांत हैं जिनसे सच्ची जनसेवा परिभाषित होती है और जो देश का आप पर विश्वास कायम रखते हैं। आपको सदा सहानुभूति और निष्पक्षता के साथ अपने अधिकार का प्रयोग करना चाहिए। अंत में, मैं आपको कहना चाहूंगी कि आप अपने शरीर, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का ध्यान रखें। प्रशासनिक कार्यों में चुनौतियां आती हैं, ऐसे में आपके संतुलित और स्वस्थ रहने से आप प्रभावी ढंग से अपनी सेवा कर सकेंगे।

आप सभी को मेरी शुभकामनाएं। आप समर्पण भाव, बुद्धिमत्ता और करुणा से सशक्त और अधिक समावेशी भारत का निर्माण करें। देश को आप सबसे बहुत उम्मीद है। मुझे विश्वास है कि आप सब देश के प्रति अपनी उत्कृष्ट सेवाओं का प्रदर्शन करेंगे।

धन्यवाद!
जय हिंद!
जय भारत!

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