भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का भारतीय वन सेवा के प्रशिक्षु अधिकारियों से मुलाकात के अवसर पर संबोधन
राष्ट्रपति भवन : 17.07.2026
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(हिन्दी, 74.32 किलोबाइट)

भारतीय वन सेवा के प्रिय प्रशिक्षु अधिकारियो,
मैं आप सभी को भारतीय वन सेवा में शामिल होने पर बधाई देती हूं। आपने यह उपलब्धि कड़े परिश्रम, लगन और समर्पण से हासिल की है। आज का दिन केवल आपके करियर की शुरुआत नहीं, बल्कि राष्ट्र की सेवा के एक पवित्र दायित्व के शुभारंभ का दिन है।
आप सब भारत की समृद्ध विविधता के प्रतिनिधि हैं। आप देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए हैं और अपने साथ अलग-अलग भाषाओं, संस्कृतियों, परम्पराओं तथा जीवन-अनुभवों को समेटे हुए हैं। यह विविधता आपकी सबसे बड़ी शक्ति है। यह आपको देश के विशिष्ट पारिस्थितिक और सामाजिक परिदृश्य को समझने और व्यापक दृष्टिकोण के साथ सेवा करने में सक्षम बनाएगी।
आप केवल वनों के प्रशासक नहीं हैं बल्कि भारत की प्राकृतिक धरोहर के संरक्षक भी हैं। आज आपकी भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। सम्पूर्ण विश्व जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के ह्रास जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन चुनौतियों का निराकरण करने में वन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वन जैव विविधता का संरक्षण करते हैं, स्थानीय जलवायु को संतुलित रखते हैं और लाखों लोगों की आजीविका का सहारा बनते हैं। इसलिए, आपका योगदान केवल भारत की पर्यावरणीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे सतत विकास के वैश्विक प्रयासों को भी बल मिलेगा।
भारत ने पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों का दृढ़ संकल्प और दूरदृष्टि के साथ सामना किया है। प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांत से प्रेरणा लेकर हमारे देश ने नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार करने, वनों और वेटलैंड्स का संरक्षण करने से लेकर 'मिशन LiFE' के जरिए संधारणीय जीवन शैली को बढ़ावा देने तक अनेक परिवर्तनकारी पहलें की हैं। नदियों के पुनरुद्धार, वन्यजीव संरक्षण और समुदाय आधारित पर्यावरणीय देखभाल जैसी हमारी पहलें, विकास को पारिस्थितिक संरक्षण के साथ संतुलित करने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।
आपकी जिम्मेदारियां केवल संरक्षण तक ही सीमित नहीं हैं। पारिस्थितिक संरक्षण को वनों एवं उनके आसपास रहने वाले लोगों की न्यायसंगत आकांक्षाओं के साथ संतुलित करना आवश्यक है। विकास और संरक्षण को एक-दूसरे के विरोधी लक्ष्यों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। आप सब ऐसे समाधान विकसित करने की दिशा में कार्य करें, जिनसे प्रकृति और स्थानीय समुदाय दोनों एक साथ फल-फूल सकें।
प्रिय प्रशिक्षु अधिकारियो,
हमारे इर्द-गिर्द की दुनिया तेजी से बदल रही है। नई प्रौद्योगिकी, जनसांख्यिकीय बदलाव और बढ़ती आकांक्षाएं आपके सामने लगातार नई चुनौतियां लेकर आएंगी। अधिकारी होने के नाते आपको परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की झमता विकसित करनी चाहिए और आपको दूरदर्शी होना चाहिए। आपको निरंतर सीखते रहना चाहिए और संविधान के मूल्यों पर दृढ़ता से अडिग रहते हुए नवाचारों को अपनाने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।
पर्यावरण से जुड़ी देखरेख एवं नियंत्रण के लिए प्रौद्योगिकी अपरिहार्य हो गई है। प्रौद्योगिकी के उपयोग से वनों की समग्र स्थिति, वन्य जीवों के मूवमेंट, अग्नि की रोकथाम और वन पुनर्स्थापन कार्यों की बेहतर निगरानी होती है। लेकिन, आपको यह स्मरण रखना है कि प्रौद्योगिकी मानवीय संवेदनशीलता, नैतिक निर्णय क्षमता और करुणा का स्थान नहीं ले सकती। सबसे अच्छे निर्णय तब लिए जाते हैं, जब वैज्ञानिक तथ्यों को अनुभव से मिली समझ और लोगों के साथ संवाद से प्राप्त ज्ञान के साथ जोड़ा जाए।
आपको संरक्षण, वन-पुनर्स्थापन तथा संधारणीय आजीविका से जुड़ी पहलों में जनभागीदारी को बढ़ावा देना है। जनजातीय समुदायों, वनवासियों, महिलाओं, किसानों तथा स्थानीय संस्थाओं के विचारों और चिंताओं को समझने से आपको बहुमूल्य दृष्टिकोण प्राप्त होगा। पारंपरिक ज्ञान ने पीढ़ियों से वनों का संरक्षण किया है। आपको प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच विश्वास बनाना है। वनों की सुरक्षा के कार्य में समाज को हितधारक बनाने से संरक्षण के प्रयास अधिक प्रभावी एवं दीर्घस्थायी होंगे।
प्रिय युवा अधिकारियो,
अब आप सार्वजनिक सेवा के क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं, ऐसे में आपकी सत्यनिष्ठा असंदिग्ध रहनी चाहिए। आपकी वाणी में विनम्रता झलकनी चाहिए। आपको, विशेषकर कठिन परिस्थितियों में, आगे बढ़कर नेतृत्व करना चाहिए। आपको सदा याद रखना है कि समानुभूति किसी भी लोक सेवक के सर्वश्रेष्ठ गुणों में से एक गुण है।
लोक सेवा का मूल उद्देश्य लोगों के जीवन को बेहतर बनाना और राष्ट्र की प्रगति में योगदान देना है। वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल करने के लिए पारिस्थितिक सुरक्षा बहुत जरूरी है। मुझे विश्वास है कि भारतीय वन सेवा के अधिकारियों के रूप में, आप यह सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे कि भारत की विकास यात्रा पर्यावरण के अनुकूल, समावेशी और संधारणीय बनी रहे।
जब आप अपने करियर की शुरुआत कर रहे हैं, तो स्वयं से यह संकल्प लें कि आपकी सत्यनिष्ठा आपके निर्णयों का मार्गदर्शन करेगी, करुणा आपके नेतृत्व में समाहित होगी, आपके कार्यों में साहस झलकेगा और सभी प्राणियों का कल्याण आपकी दृष्टि में होगा। प्रकृति, जीवों और पक्षियों की रक्षा हेतु किया गया कार्य मानवता के हित में भी होता है। मुझे विश्वास है कि आप ऐसे भविष्य के निर्माण में योगदान देंगे जिसमें फलते-फूलते वन हों, अधिक सुदृढ़ पारिस्थितिकी तंत्र हों, और अधिक सामर्थ्यवान समुदाय हों।
मैं आपके उपलब्धियों से भरे, उद्देश्यपूर्ण और अनुकरणीय सेवा-जीवन के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं।
धन्यवाद!
जय हिंद!
जय भारत!
