भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किए जाने के अवसर पर स्वीकृति भाषण

बुखारेस्ट : 24.07.2026

डाउनलोड : भाषण भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित  किए जाने के अवसर पर स्वीकृति भाषण(हिन्दी, 131.56 किलोबाइट)

आज बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज के इस समारोह में उपस्थित होकर और इस प्रतिष्ठित मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किए जाने पर मैं बहुत गर्व महसूस कर रही हूं। मैं इस सम्मान के लिए रेक्टर, सीनेट और पूरे विश्वविद्यालय परिवार का हार्दिक आभार व्यक्त करती हूं और मैं भारत और रोमानिया के लोगों  के बीच गहरी और स्थायी मित्रता के प्रतीक के रूप में 1.4 बिलियन भारतीयों की ओर से विनम्रतापूर्वक यह सम्मान स्वीकार करती हूं।

प्रिय मित्रो,

मैं राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र की विद्यार्थी रही हूं, इसलिए एक ऐसे विश्वविद्यालय से यह उपाधि प्राप्त करना मेरे लिए विशेष अर्थ रखता है, जहां से रोमानियाई लोगों की बहुत सी पीढ़ियों ने आर्थिक और प्रशासनिक विज्ञान में शिक्षण प्राप्त किया है।

शिक्षा मेरे अपने स्वयं के जीवन में सबसे बड़ी परिवर्तनकारी शक्ति रही है। मेरा जन्म एक छोटे से गांव में हुआ था और मेरे परिवार के पास बहुत सीमित साधन थे। मैं अपने गांव की पहली लड़की थी जिसने कॉलेज में पढ़ाई की। इस अनुभव ने मुझे किसी भी पाठ्यपुस्तक से कहीं अधिक सशक्त रूप से यह सिखाया कि शिक्षा समानता लाने वाला बहुत बड़ा साधन है: शिक्षा यह नहीं देखती कि आपका जन्म कहां हुआ है, बल्कि यह देखती है कि आप अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए कितनी मेहनत और कितना लंबा सफर तय करने के लिए तैयार हैं।

मुझे कुछ समय तक शिक्षिका के रूप में कार्य करने का सौभाग्य मिला था। उस दौरान मैंने स्‍वयं देखा कि कैसे एक क्लासरूम—चाहे वह कितना भी साधारण क्यों न हो—किसी परिवार, और समय के साथ-साथ पूरे समुदाय के भविष्य की दिशा बदल सकता है। यही दृढ़ विश्वास मेरी पूरी सार्वजनिक सेवा के दौरान मेरे साथ बना रहा है कि शिक्षा केवल किसी व्यक्ति का उन्नति का साधन नहीं है, बल्कि एक न्यायपूर्ण और समावेशी समाज की सबसे मजबूत नींव है।

आज जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल प्रौद्योगिकी और विज्ञान की तेजी से हो रही प्रगति दुनिया को नई दिशा दे रही है, तब बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज जैसे विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि वे यह सुनिश्चित करें कि ज्ञान का उपयोग बुद्धिमत्ता, नैतिकता और करुणा के साथ हो। भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी इसी सोच को आगे बढ़ाती है। यह नवाचार, अनुसंधान, रचनात्मकता और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग को प्रोत्साहित करती है।

मित्रो,

भारत और रोमानिया भले ही भौगोलिक रूप से एक-दूसरे से दूर हों, लेकिन हमारी सभ्यताओं के बीच लंबे समय से संवाद रहा है; हमारे राजनयिकों से पहले, हमारे कवियों ने एक-दूसरे के विचारों को जोड़ने का काम किया। लगभग सौ वर्ष पहले, नवंबर 1926 में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर इसी शहर आए थे और बुखारेस्ट के नेशनल थिएटर में लोगों से खचाखच भरे हॉल को मानव चेतना की एकता विषय पर संबोधित किया था। वे यह देखकर अभिभूत हो गए थे कि यहां के लोग भारतीय चिंतन को कितनी गहराई से समझते हैं। आपके अपने राष्ट्र कवि, मिहाई एमिनेस्कु ने अपने विद्यार्थी जीवन के दौरान उपनिषदों और भगवद गीता का अध्ययन किया था, और इन ग्रंथों की शिक्षाओं का उनके लेखन पर गहरा प्रभाव पड़ा। महान रोमानियाई इतिहासकार और लेखक मिर्सिया एलियाड भी अपनी युवावस्था में टैगोर की बुखारेस्ट यात्रा से प्रेरित हुए थे। वे कलकत्ता विश्वविद्यालय में अध्ययन करने के लिए भारत आए और वहां संस्कृत भाषा सीखी। दुनिया में बहुत कम ऐसे देश हैं, जो भौगोलिक रूप से इतने दूर होने के बावजूद अपने महान विचारकों के माध्यम से इतने गहरे बौद्धिक संबंध साझा करते हैं।

हमारी सभ्यताओं की यही साझा भावना प्राचीन भारतीय सिद्धांत 'वसुधैव कुटुंबकम' में व्यक्त होती है, जिसका अर्थ है - 'पूरा विश्व एक परिवार है'। यही सिद्धांत आज दुनिया के साथ भारत के संबंधों का मार्गदर्शन करता है। भारत प्रतिस्पर्धा के स्थान पर सहयोग, मतभेद के स्थान पर संवाद और मानवता के साझा भविष्य के लिए सामूहिक जिम्मेदारी में विश्वास रखता है।

इसी भावना के साथ मैं आज भारत और रोमानिया के द्विपक्षीय संबंधों को देखती हूं। हमारी मित्रता परस्पर सम्मान, विश्वास और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित रही है। शिक्षा इस साझेदारी के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक रही है। कई दशकों से रोमानिया के विश्वविद्यालय, विशेषकर चिकित्सा, इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में अध्ययन के लिए भारतीय विद्यार्थियों का स्वागत करते रहे हैं।

मैं इस विश्वविद्यालय और रोमानिया के अन्य शिक्षण संस्थानों से आग्रह करती हूं कि वे संयुक्त अनुसंधान तथा शिक्षकों और विद्यार्थियों के आदान-प्रदान के माध्यम से आपसी सहयोग को और मजबूत करें। मुझे उम्मीद है कि मेरी यह यात्रा शैक्षणिक साझेदारी के नए अवसर खोलेगी और रोमानिया के अधिक से अधिक विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को भारत के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित करेगी। मुझे यह घोषणा करते हुए भी प्रसन्नता हो रही है कि भारत ने रोमानिया के लिए आईटीईसी कार्यक्रम के अंतर्गत प्रशिक्षण सीटों की संख्या दोगुनी कर दी है। इससे रोमानिया के पेशेवरों को, विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे उभरते क्षेत्र में प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के अधिक अवसर मिलेंगे।

प्रिय विद्यार्थियो,

आप ही आने वाले कल की दुनिया के निर्माता हैं। सफलता केवल पेशेवर उपलब्धियों से नहीं मापी जाती, बल्कि उन मूल्यों से भी मापी जाती है जिन्हें आप अपने जीवन में अपनाते हैं और दूसरों के जीवन में जो सकारात्मक बदलाव लाते हैं। मैं कामना करती हूं कि ज्ञान की खोज में आपकी जिज्ञासा हमेशा बनी रहे, अपनी क्षमताओं पर आपका विश्वास अटूट रहे और आपके कार्यों में करुणा झलके। आप अपनी प्रतिभा का उपयोग संस्कृतियों के बीच सेतु बनाने तथा एक अधिक शांतिपूर्ण और समृद्ध दुनिया बनाने में करें।

मैं एक बार फिर बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज का इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करती हूं। मैं इस प्रतिष्ठित संस्थान के रेक्टर, सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों को निरंतर सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं देती हूं। मुझे विश्वास है कि आने वाले वर्षों में भारत और रोमानिया के बीच मित्रता, शिक्षा और उद्यमिता के संबंध और अधिक मजबूत होंगे।

धन्यवाद।

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