भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का आंध्र प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में संबोधन
अनंतपुरमु : 01.07.2026
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आज अनंतपुरमु के ऐतिहासिक शहर में आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यधिक प्रसन्नता हो रही है। इस ज़िले का आंध्र प्रदेश के इतिहास में एक विशेष स्थान है और यह अपनी समृद्ध विरासत और विजयनगर साम्राज्य की भव्य वास्तुकला के लिए जाना जाता है। मुझे आप सबको यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि यह जिला मेरे दो प्रतिष्ठित पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों से जुड़ा रहा है। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने यहां के सरकारी महाविद्यालय में पढ़ाया है और डॉ. नीलम संजीव रेड्डी इस ज़िले से आते थे। दोनों को भारत के महान सपूतों के रूप में याद किया जाता है, जिनके जीवन से हमें आज भी प्रेरणा मिलती है। आंध्र प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में उपस्थित होकर मुझे अत्यधिक प्रसन्नता हो रही है। आज का यह समारोह न केवल उत्सव मनाने का दिन है, बल्कि इस नए संस्थान की विकास-यात्रा का एक निर्णायक चरण भी है।
उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए, यह समारोह वर्षों के समर्पण, दृढ़ निश्चय और कड़े परिश्रम की सुखद परिणति है। आप सबने अनेक सपने संजोए हुए विश्वविद्यालय में प्रवेश किया था, और आज आप ज्ञान एवं आत्मविश्वास से युक्त होकर यहां से वह डिग्री लेकर जा रहे हैं जो आपके लिए संभावनाओं के नए द्वार खोलेगी। मैं उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देती हूं और मैं उन्हें विशेष रूप से बधाई देती हूं जिन्होंने स्वर्ण पदक प्राप्त किए हैं। मैंने देखा है कि स्वर्ण पदक प्राप्त करने में बेटियों का प्रदर्शन बेटों से अच्छा है। उनकी यह उपलब्धि हमारे देश की युवा महिला शक्ति की बढ़ती आकांक्षाओं और दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।
देवियो और सज्जनो,
मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि यह विश्वविद्यालय भविष्य के लिए पूर्णतः तैयार संस्थान बनने के लिए एक दूरगामी सोच के साथ आगे बढ़ रहा है। सतत विकास लक्ष्यों, और विशेषकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता, समावेशी और समतामूलक विकास के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को दर्शाती है। मुझे विश्वास है कि यह विश्वविद्यालय सेंटर ऑफ एक्सिलेंस के रूप में उभर कर सामने आएगा और वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' की संकल्पना को साकार करने में उल्लेखनीय योगदान देगा।
मुझे बताया गया है कि यहां बहुत से राज्यों के विद्यार्थी शिक्षा अर्जित कर रहे हैं। इस तरह, इस विश्वविद्यालय ने अलग-अलग भाषाओं और परंपराओं को एक साथ जोड़ा है और एक ऐसा जीवंत परिवेश बनाया है जिसमें छात्र प्रत्येक दिन 'अनेकता में एकता' का अनुभव करते हैं। ऐसे विचार-विनिमय परस्पर समझ को गहरा करते हैं और हमारी राष्ट्रीय एकता के बंधनों को सुदृढ़ करते हैं।
प्रिय विद्यार्थियो,
आज जबकि आप अपनी उपलब्धियों का जश्न मना रहे हैं, तो मैं चाहती हूं कि आप एक पल ठहरकर उन लोगों का स्मरण करें जिनके सहयोग से आपकी शिक्षण-यात्रा संभव हुई है। आपकी सफलता आपके कड़े परिश्रम का परिणाम है, किंतु इस सफलता में आपके माता-पिता का त्याग, आपके शिक्षकों का मार्गदर्शन और समाज का योगदान भी शामिल है। इसलिए, आप सबकी जिम्मेदारी है कि आप समाज का ऋण भी चुकाएं। चाहे आप रोजगार का सृजन करने वाले उद्यमी बनें, नवाचार को बढ़ावा देने वाले वैज्ञानिक बनें, जनता के लिए काम करने वाले लोकसेवक बनें या फिर समाज की सेवा करने वाले लोकोपकारी बनें, आपकी शिक्षा वंचित वर्ग के सशक्तीकरण का स्रोत बननी चाहिए।
इस विश्वविद्यालय से उपाधि प्राप्त करने वाला प्रथम बैच होने के नाते, विश्वविद्यालय की विकास यात्रा में आपका विशेष स्थान रहेगा। इस संस्थान की पहचान आपकी उपलब्धियों, आपके व्यवहार और समाज में आपके योगदान से बनेगी। जिंदगी आपको चाहे जहां भी ले जाए, आपको इस संस्थान से जुड़े रहना है। आप इस विश्वविद्यालय के दूत हैं।
आप ऐसी दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं जो अभूतपूर्व गति से बदल रही है। प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रही बहुआयामी प्रगति से प्रत्येक क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन हो रहे हैं। तेज़ी से बदलती ऐसी दुनिया में, सीखने का काम सिर्फ़ डिग्री प्राप्त करने के साथ समाप्त नहीं हो सकता और न ही होना चाहिए। अपने आप को उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के अनुरूप निरंतर ढालते चलने की प्रवृत्ति ही आपका मजबूत संबल बनेगी। आप नए विचारों को आजमाने और नवीन ज्ञान अर्जित करने का साहस विकसित करें। दृढ़ संकल्प को अपनी मूल्यवान शक्ति बनाएं।
मुझे बताया गया है कि इस विश्वविद्यालय ने स्नातक और परास्नातक कर रहे विद्यार्थियों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा साइंस को पाठ्यक्रम के अनिवार्य विषय के रूप में शामिल किया है। ऐसे नए विषय हमारे युवाओं को भविष्य के मौकों और चुनौतियों के लिए तैयार करेंगे।
सीखने के लिए तत्पर, मानसिक लचीलेपन से लैस, और नवाचारी सोच रखने वाले हमारे युवा देश की अनमोल संपत्ति हैं। हमारे युवा अपने ज्ञान के साथ रचनात्मकता, दृढ़ निश्चय और उत्तरदायित्व के भाव को लेकर चलेंगे, तो वे सामने आने वाली हर चुनौती को अवसर में बदल सकते हैं तथा और अधिक समावेशी और समृद्ध भारत के निर्माण में योगदान दे सकते हैं।
प्रिय विद्यार्थियो,
आप अपने करियर की शुरुआत एक ऐसे परिवर्तनकारी समय में कर रहे हैं जब हमारा देश वर्ष 2047 तक विकसित देश बनने की दिशा में आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। 'विकसित भारत' का हमारा लक्ष्य हमारे युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और प्रतिबद्धता से ही हासिल होगा। आप सभी हमारे उस भविष्य के निर्माता हैं। आप जीवन में चाहे जिस भी मार्ग को चुनें, उस पर पूरी लगन और ईमानदारी के साथ चलते हुए उत्कृष्टता की मंजिल हासिल करें।
अपने आचरण में नैतिक मूल्यों को आत्मसात करने से आपको बहुत लाभ मिलेगा। ईमानदारी, करुणा, समानुभूति और प्रकृति से प्रेम केवल ऊंचे नैतिक आदर्श ही नहीं हैं, बल्कि ये समग्र विकास के आधार भी हैं। इन गुणों से आपका जीवन तो बेहतर बनेगा ही, आप समाज व देश के लिए भी उपयोगी योगदान कर पाएंगे।
मैं कामना करती हूं कि आप सब अपने चुने हुए क्षेत्रों में सफलता हासिल करें, ऊंचे मूल्यों को बनाए रखें, और देश के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को हासिल करने में योगदान दें। मैं उपाधि प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल, संतोषप्रद और सार्थक भविष्य के लिए शुभकामनाएं देती हूं।
धन्यवाद,
जय हिंद!
जय भारत!
