भारत की माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का अंतर्राष्ट्रीय नौसेना फ्लीट कार्यक्रम– 2026 में संबोधन

विशाखापत्तनम : 18.02.2026

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युद्धपोतों के सुदृढ़ बेड़े और भारत तथा मित्र नौसेनाओं के नौसैनिकों द्वारा किया गया प्रदर्शन देखकर मुझे अत्यधिक प्रसन्नता हुई है।

इस अंतर्राष्ट्रीय नौसेना प्रदर्शन में आप सभी द्वारा किए गए पेशेवर प्रदर्शन के लिए मैं आप सब को हार्दिक बधाई देती हूँ।

अंतर्राष्ट्रीय नौसेना परेड कार्यक्रम समुद्री परंपराओं के लिए राष्ट्रों की एकता, विश्वास और सम्मान को दर्शाता है। विभिन्न देशों के ध्वजों वाले जलपोत और विभिन्न देशों के नाविक एकजुटता की भावना से प्रदर्शन करते हैं। एकजुटता का यह भाव इस कार्यक्रम के विषय 'महासागरों के माध्यम से एकजुट' में साफ झलकता है। यह विश्व समाज के लिए यह एक सकारात्मक संदेश है कि ऐसे सामूहिक नौसैनिक शक्ति की प्रतिबद्धता और संकल्प से सभी चुनौतियों पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

समुद्री क्षेत्रों के साथ भारत का संबंध गहराई से जुड़ा रहा है और अटूट रहा है। सदियों से ये महासागर भारत के लिए वाणिज्य, संपर्क और सांस्कृतिक आदान- प्रदान का माध्यम रहे हैं। कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होने वाले सप्ताह के दौरान कटक में महानदी के तट पर लोग उत्साहपूर्वक 'बाली जात्रा' या कहें 'बाली यात्रा' उत्सव मनाते हैं। यह उत्सव ओड़िशा के प्राचीन नाविकों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। यह प्राचीन कलिंग साम्राज्य के समय से ही विभिन्न प्रयोजनों के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया की हमारी नियमित समुद्री यात्रा की परंपरा के जश्न के रूप में मनाया जाता है। इन यात्राओं से व्यापार और वस्तुओं, विचारों और मूल्यों के प्रसार और आदान-प्रदान में योगदान मिलता रहा है, जिससे व्यापक क्षेत्रों में एक साझा सांस्कृतिक चेतना का जागरण हुआ है।

विशाखापत्तनम का गौरवशाली समुद्री इतिहास रहा है। आज का यह कार्यक्रम विशाखापत्तनम के चिरस्थायी नौसैनिक महत्व को दर्शाता है। यह कार्यक्रम भारत के महासागर दृष्टिकोण को भी प्रोत्साहित करता है, 'महासागर' दृष्टिकोण का अर्थ है 'सभी क्षेत्रों की सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति'। समुद्री क्षेत्र सहित अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रति भारत का दृष्टिकोण 'वसुधैव कुटुंबकम' या 'पूरा विश्व एक परिवार है' के हमारे आदर्शों से प्रेरित है। यह सोच दर्शाती है कि वैश्विक सुरक्षा और विकास, स्थिरता और स्थायित्व साझेदारी के माध्यम से ही संभव हैं। आपसी साझेदारी का यह भाव एक स्थायी वैश्विक व्यवस्था की आधारशिला है। इसलिए भारत का मानना ​​है कि एक सुदृढ़ समुद्री व्यवस्था समान विचारधारा वाले भागीदारों के सामूहिक उत्तरदायित्व और सहयोगी कार्रवाई पर आधारित है।

देवियो और सज्जनो,

भारतीय नौसेना भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने और समान व्यापक समुद्री क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए तत्पर है। क्षेत्र में तैनात भारतीय नौसेना की यूनिट समुद्री क्षेत्र से उत्पन्न होने वाले खतरों और चुनौतियों के विरुद्ध प्रतिरोध और रक्षा के विश्वसनीय साधन के रूप में कार्य करती हैं। भारत की नौसेना मानवीय संकटों और प्राकृतिक आपदाओं के समय अक्सर सबसे पहले सहायता प्रदान करती है तथा करुणा और दक्षता के साथ शीघ्रता से सहायता प्रदान करती है। भारत की नौसेना विश्व की नौसेनाओं के साथ सद्भाव बढ़ाने और विश्वास, भरोसे और मित्रता का माध्यम बनने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है।

आज इतने सारे मित्र देशों द्वारा मिलकर दिखाया गया मित्रता का यह भाव इस सत्य को प्रमाणित करता है कि हम समुद्रों के कारण दूर नहीं है बल्कि इनसे जुड़े हुए हैं।

सभी देशवासियों की ओर से, मैं मित्र विदेशी नौसेनाओं के अधिकारियों और नौसैनिकों के प्रति हार्दिक मित्रता का भाव और प्रशंसा व्यक्त करती हूँ। आप अपनी सेवाओं और अपने राष्ट्रों की सर्वोत्तम परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। आपके अनुशासन, समर्पण और दक्षता के आधार पर सामूहिक समुद्री सुरक्षा टिकी हुई। यहाँ आपकी उपस्थिति ने हमारे विश्वास को और मजबूत किया है और समुद्री क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सहयोग के प्रति हमारी साझी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है।

यहाँ दिखाया गया अंतर्राष्ट्रीय समन्वय हमारे साझा उद्देश्य और विरासत को आगे बढ़ाएगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ उपस्थित सभी नौसेनाएँ सामूहिक रूप से महासागरों को वैश्विक समाज के विकास, उसकी समृद्धि और समग्र कल्याण के द्वार के रूप में विकसित करने में सहयोग करेंगी।

धन्यवाद!
जय हिंद!
जय भारत!

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