भारत की राष्ट्रपति राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं

बदलते सुरक्षा परिदृश्य में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों का महत्व और उत्तरदायित्व काफी बढ़ गया है: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

राष्ट्रपति भवन : 14.04.2026

भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु आज 14 अप्रैल, 2026 को गांधीनगर, गुजरात में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं और समारोह को संबोधित किया।

इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आने वाले समय में सुरक्षा परिदृश्य और भी जटिल होता जाएगा। कुछ वर्ष पहले हम डिजिटल अरेस्ट, साइबर अपराध और फ़िशिंग जैसे शब्दों से परिचित नहीं थे। लेकिन ये आज बहुत बड़े खतरे के रूप में हमारे सामने हैं। ऐसी परिस्थिति में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों का महत्‍व और उत्‍तरदायित्‍व बढ़ जाता है। देश को ऐसे पुलिस अधिकारियों की आवश्‍यकता है जो साइबर धोखाधड़ी के अपराधियों को पकड़ने और उन्हें सजा दिलाने में तकनीकी रूप से सक्षम और दक्ष हों; ऐसे फोरेंसिक विशेषज्ञों की आवश्यकता है जो न्‍यायालयों की कसौटी पर खरा उतरने वाले साक्ष्‍य उपलब्‍ध करा सकें; और साथ ही, ऐसे सक्षम पेशेवरों की आवश्यकता है जो भू-राजनीति की बारीकियों को समझ सकें और वैश्विक मंच पर भारत की बात को आत्मविश्वास और स्पष्टता से रख सकें।

राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि सामरिक अध्ययन अब केवल युद्ध और शांति के सिद्धांतों तक सीमित नहीं है। इसमें रक्षा विनिर्माण, उभरती प्रौद्योगिकियां, आपूर्ति- श्रृंखला और आत्मनिर्भर औद्योगिक क्षमता भी शामिल है। उन्होंने कहा कि रक्षा और सुरक्षा से जुड़े उद्योगों के साथ समन्वय स्थापित करना इन लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्र विश्व की दिशा और दशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सरकार इस दिशा में गंभीर प्रयास कर रही है। ‘इंडिया एआई मिशन’ और ‘एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ जैसी पहलों के माध्यम से भारत वैश्विक एआई प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में ‘नई दिल्ली घोषणा’ को व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिलना केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारत की नेतृत्व क्षमता का भी प्रमाण है।

राष्ट्रपति ने कहा कि साइबर सुरक्षा आंतरिक सुरक्षा, वित्तीय स्थिरता और डिजिटल विश्वास का अभिन्न हिस्सा है। भारत ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल जैसे मजबूत संस्थागत तंत्र विकसित किए हैं, जो नागरिकों के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय शक्ति, सैन्‍य कर्मियों और सुरक्षा बलों के साहस एवं पराक्रम पर तो निर्भर है ही, यह सुरक्षा के लिए आवश्‍यक अस्‍त्रों एवं शस्‍त्रों की गुणवत्ता, उत्पादन, प्रशिक्षण और प्रौद्योगिकीय आत्मनिर्भरता पर भी निर्भर है। सरकार इस दिशा में निरंतर प्रयत्नशील है। स्वदेशी क्षमता और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देकर रक्षा के क्षेत्र में आयात पर निर्भरता को कम किया जा रहा है।

राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय सुरक्षा शिक्षा का एक उत्कृष्ट वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ता रहेगा और उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थी सुरक्षित, न्यायपूर्ण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के बल पर भारत एक सुरक्षित, सशक्त और विकसित राष्ट्र बनेगा।

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