भारत की राष्ट्रपति ने शेगांव में राष्ट्रीय आरोग्य मेला-2026 का उद्घाटन किया
आयुष चिकित्सा पद्धतियों ने नागरिकों के स्वास्थ्य में अमूल्य योगदान दिया है: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
राष्ट्रपति भवन : 25.02.2026
भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज 25 फरवरी, 2026 को महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के शेगांव में राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 का उद्घाटन किया। उन्होंने आयुष स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले छह वरिष्ठ वैद्यों को सम्मानित भी किया।
इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी परंपरा में समग्र स्वास्थ्य को सबसे बड़ा सुख कहा गया है। स्वस्थ नागरिकों की देश को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका है। आयुष चिकित्सा पद्धतियों ने देशवासियों को स्वास्थ्य रखने में अमूल्य योगदान दिया है। योग, आयुर्वेद और सिद्ध जैसी प्रणालियाँ उस समय से लोगों की सेवा करती आ रही हैं जब आधुनिक चिकित्सा पद्धति का प्रचलन नहीं था।
राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे खेतों में, हमारी रसोई में और हमारे वन-क्षेत्र में औषधीय वनस्पतियों, स्वास्थ्य-रक्षक जड़ी-बूटियों का बहुमूल्य भंडार मौजूद है। इस बहुमूल्य सम्पदा का संरक्षण और संवर्धन औषधियों के लिए कच्चा माल उपलब्ध कराने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए भी महत्वपूर्ण है। औषधीय पौधों की खेती न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधारती है, बल्कि यह मिट्टी के स्वास्थ्य और संरक्षण में भी मदद करती है। इसलिए आयुष पद्धतियों को बढ़ावा देने से न केवल लोगों का शारीरिक और आर्थिक स्वास्थ्य बेहतर होता है बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि आयुर्वेद, योग और अन्य आयुष पद्धतियां हमें स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने का मार्ग दिखाती हैं। बीमारियों की रोक-थाम में समेकित चिकित्सा पद्धति का महत्व आज पूरा विश्व समझ रहा है। तनावमुक्त और स्वस्थ जीवन शैली के लिए विश्वभर में लोग योग को अपना रहे हैं और आयुर्वेदिक उपचार और दवाओं का लाभ उठा रहे हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि साक्ष्य-आधारित अनुसंधान, औषधियों के मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण जैसे कदमों से आयुष पद्धतियों की मान्यता एवं स्वीकार्यता और बढ़ेगी। उन्होंने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि आयुष मंत्रालय इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है।
अनुसंधान और दवाओं के विकास के लिए सामान्य दिशानिर्देश अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाए गए हैं। आयुर्वेद, योग और अन्य आयुष पद्धतियों को आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए भरोसेमंद, वैज्ञानिक समाधान के रूप में स्थापित करने के अनेक विज्ञान-सम्मत प्रयास हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक वैज्ञानिक हस्तक्षेपों, नवाचारों और वैश्विक सहयोग के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को और अधिक सरल, सुलभ एवं लोकप्रिय बनाकर हम इसे समकालीन स्वास्थ्य प्रणाली का अभिन्न अंग बनाने में सफल हो सकेंगे।
