भारत की राष्ट्रपति भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के प्रशिक्षु अधिकारियों के 78वें बैच के विदाई समारोह में शामिल हुईं

भारतीय राजस्व सेवा विभाग के अधिकारियों का दायित्व केवल कानून का पालन सुनिश्चित करना नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक नागरिक, विशेषकर समाज के वंचित वर्गों से आने वाले नागरिकों को सम्मान और निष्पक्षता का अनुभव हो: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

राष्ट्रपति भवन : 15.04.2026

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु आज 15 अप्रैल, 2026 को राष्ट्रीय प्रत्यक्ष कर अकादमी नागपुर, महाराष्ट्र में भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के प्रशिक्षु अधिकारियों के 78वें बैच के विदाई समारोह में शामिल हुईं।

इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हाल के वर्षों में भारत की आर्थिक यात्रा अत्यंत गतिशील और प्रेरणादायक रही है। प्रत्यक्ष कर संग्रह में सतत वृद्धि होना, कर अनुपालन में सुधार तथा कर आधार के विस्तार का संकेत है। यह नागरिकों और प्रशासन के बीच बढ़ते विश्वास को भी दर्शाता है। आयकर अधिनियम, 2025, जो 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुआ है, इस परिवर्तनकारी यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह सुधार एक आधुनिक, सरल और पारदर्शी कर व्यवस्था की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसकी वास्तविक सफलता केवल इसके सही, पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन से ही सुनिश्चित होगी और यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारियों के कंधों पर है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय राजस्व सेवा अधिकारियों की भूमिका केवल कर संग्रह तक सीमित नहीं है। वे जन विश्वास के संरक्षक हैं; वे न्याय और निष्पक्षता के प्रहरी हैं। वे देश की आर्थिक प्रगति, सामाजिक न्याय और सुशासन के स्तंभ हैं। उन्होंने युवा अधिकारियों को यह स्मरण रखने के लिए कहा कि विनम्रता, संयम और संवेदनशीलता उनकी कार्यशैली के अभिन्न अंग होने चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी जिम्मेदारी केवल नियमों को लागू करना नहीं है बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में जनता के विश्वास को सुदृढ़ करना भी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि न्याय, पारदर्शिता और ईमानदारी के आधार पर लिए गए निर्णय न केवल शासन को सुदृढ़ बनाते हैं, बल्कि देश और उसके नागरिकों के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि हर आयकर रिटर्न जो देश का नागरिक भरता है उसके पीछे परिश्रम, आकांक्षा और उद्यम की कोई कहानी होती है। भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारियों का दायित्व केवल कानून का पालन सुनिश्चित करना नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक नागरिक, विशेषकर समाज के वंचित वर्गों से आने वाले नागरिकों को सम्मान और निष्पक्षता का अनुभव हो।

राष्ट्रपति ने कहा कि आज हमारा देश विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में तेजी से अग्रसर है। ऐसे समय में प्रशासनिक व्यवस्था तथा उससे जुड़े प्रत्येक संस्थान का दायित्व और अधिक बढ़ जाता है कि वे उच्चतम स्तर की दक्षता और पारदर्शिता को अपनाएं तथा समावेशी दृष्टिकोण के साथ कार्य करें।

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