भारत की राष्ट्रपति अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), राजकोट के दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं

कुशल और सामाजिक रूप से संवेदनशील चिकित्सक समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु

राष्ट्रपति भवन : 13.04.2026

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु आज 13 अप्रैल, 2026 को राजकोट, गुजरात में एम्स, राजकोट के प्रथम दीक्षांत समारोह में शामिल हुईं और समारोह को संबोधित किया।

इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि कम खर्च पर विश्व स्तरीय तृतीयक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए देशभर में अनेक एम्स स्थापित किए गए हैं। गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा, शोध और नवाचार को बढ़ावा देने, जन स्वास्थ्य पहलों को आगे बढ़ाने और राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीतियों के निर्माण में एम्स की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि नवीन शोध और रोगी देखभाल के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा को आगे बढ़ाने में एम्स की प्रतिबद्धता प्रशंसनीय है।

राष्ट्रपति ने कहा कि एम्स राजकोट एक नया संस्थान है। चिकित्सा शिक्षा, शोध और सेवा के क्षेत्र में इसे लंबी यात्रा करनी है। उन्होंने एम्स राजकोट के नीति निर्धारकों से आग्रह किया कि वे एम्स के मूल लक्ष्यों के साथ-साथ इस क्षेत्र की स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान को भी अपने लक्ष्य में शामिल करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी संगठन के स्वस्थ विकास में सुशासन का महत्वपूर्ण स्थान होता है। सुशासन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए शुरुआत में ही उठाए गए कदम इस संस्थान के विकास की दिशा में दूरगामी सिद्ध होंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि चिकित्सा करना केवल एक पेशा नहीं है; यह मानवता की सेवा के प्रति प्रतिबद्धता भी है। इस पेशे में केवल वैज्ञानिक ज्ञान ही नहीं बल्कि संवेदनशीलता, धैर्य और विनम्रता की भी आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों द्वारा धारण किया गया सफेद कोट समाज के उस विश्वास का प्रतीक है जो लोग बीमारी और अनिश्चितता के क्षणों में चिकित्सक के ऊपर करते हैं। इस विश्वास को बनाए रखने की ज़िम्मेदारी आपके कंधों पर है।

राष्ट्रपति ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में तकनीकी प्रगति अभूतपूर्व गति से हो रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, सटीक चिकित्सा और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाएं चिकित्सा जगत के स्वरूप  और संभावनाओं को तेजी से बदल रही हैं। उन्होंने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को इन परिवर्तनों को अपनाने के लिए सदैव तैयार रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि नवीनतम तकनीकों को अपनाने से वे न केवल अपने ज्ञान और कौशल को संवर्धित कर सकेंगे बल्कि बीमारियों का भी बेहतर ढंग से उपचार भी कर सकेंगे।  फिर भी, चिकित्सा में मानवीय संवेदना का स्थान कभी भी नहीं लिया जा सकता। एक चिकित्सक के मधुर शब्द, आश्वस्त करने वाली मुस्कान और मरीज की बातों को धैर्यपूर्वक सुनना कई बार दवाइयों सहित, बहुत प्रभावी होता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि एक अच्छा डॉक्टर होना बड़ी बात  है। लेकिन ईमानदारी, करुणा और परोपकार की भावना जैसे मानवीय मूल्यों से युक्त चिकित्सक होना उससे भी बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि कुशल और सामाजिक रूप से संवेदनशील चिकित्सक समाज में बड़ा परिवर्तन ला सकते हैं। उन्होंने चिकित्सकों को अपने स्थिति का सदुपयोग करते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की सलाह दी।

राष्ट्रपति ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दृष्टि से देशवासियों का उत्तम स्वास्थ्य एक महत्वपूर्ण कारक है। नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ कराने की दिशा में भारत सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी आ रहे हैं। लेकिन इन प्रयासों को और बल तब मिलेगा जब सभी भागीदार एक साथ मिलकर आगे बढ़ेंगे। इसमें एम्स जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण है। उन्हें चिकित्सा सेवा में शोध और नवाचार के नए-नए प्रतिमान स्थापित करके देश की स्वास्थ्य-सेवा को दिशा दिखानी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एम्स राजकोट समान तथा सुलभ स्वास्थ्य सेवा के राष्ट्रीय लक्ष्य की प्राप्ति में अपने महत्वपूर्ण योगदान के नए प्रतिमान स्थापित करेगा।

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