भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के 75वें दीक्षांत समारोह में सम्बोधन(HINDI)

बडोदरा : 23.09.2026

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1. आज महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में आप सब के बीच उपस्थित होकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। यह विश्वविद्यालय का 75वां दीक्षांत समारोह है। इस महत्वपूर्ण अवसर पर मैं विश्वविद्यालय के सभी पूर्व और वर्तमान शिक्षकों, विद्यार्थियों और प्रशासकों को हार्दिक बधाई देती हूं।

2. आज के दीक्षांत समारोह में उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को मैं हार्दिक बधाई देती हूं। जिन विद्यार्थियों ने इस दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक प्राप्त किए हैं उनको मैं विशेष बधाई देती हूं।

उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के माता-पिता और अभिभावक भी बधाई के हकदार हैं जिनके त्याग और प्रोत्साहन के बल पर यह शुभ अवसर आया है। आज का यह अवसर विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों का आभार व्यक्त करने का भी अवसर है जिनके मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने ज्ञान अर्जित करके उपाधि प्राप्त की है।

3. मुझे बताया गया है कि इस दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में बेटियों की संख्या अधिक है। साथ ही इस विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थियों में भी बेटियों की संख्या अधिक है।

यह बदलते हुए भारत की तस्वीर है जो देश के अधिकांश उच्च शिक्षण संस्थानों में दिखाई देती है। हर क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी इस बात का शुभ संकेत है कि हमारा देश समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

देवियो और सज्जनो,

4. यह गुजरात की धरती है जहां अतीत, वर्तमान और भविष्य साथ चलते हैं। इस धरती ने स्वतंत्रता आंदोलन, सामाजिक सुधार, सहकारिता और उद्यमिता की अनेक धाराओं को शक्ति दी है। वर्तमान में भी गुजरात आधुनिक उद्योग, प्रौद्योगिकी, वित्त और वैश्विक निवेश के नए केंद्रों के निर्माण में अग्रणी है।

5. बड़ौदा की धरती पर महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 1949 में हुई। इस विश्वविद्यालय और भारत के लोकतन्त्र की यात्रा लगभग साथ-साथ चल रही है। मुझे यह देखकर प्रसन्नता हुई है कि तब से आज तक यह विश्वविद्यालय ज्ञान की अनेक धाराओं को एक साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। कला से विज्ञान तक, तकनीक से चिकित्सा तक, कानून से सामाजिक कार्य तक, ललित कला से प्रदर्शन कला तक, प्रबंधन से पत्रकारिता तक ज्ञान के अनेक क्षेत्रों में यह विश्वविद्यालय शिक्षा प्रदान कर रहा है।

6. वर्तमान समय में किसी समस्या का समाधान अध्ययन की एक धारा तक सीमित नहीं है। Climate Change केवल Environmental Study का विषय नहीं है। Artificial Intelligence केवल Computer Science का विषय नहीं है। Health केवल Medical Science का विषय नहीं है। Poverty alleviation केवल Economics का विषय नहीं है।

Democracy केवल Political Science का विषय नहीं है। आज की सभी महत्वपूर्ण समस्याओं के समाधान के लिए Multidisciplinary approach की आवश्यकता है। हमें वैज्ञानिक की जिज्ञासा चाहिए, कलाकार की संवेदना चाहिए, इतिहासकार की दृष्टि चाहिए, अर्थशास्त्री की समझ चाहिए और समाजशास्त्री की चेतना चाहिए। महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों से यह अपेक्षा की जाती है कि इस दिशा में वे निरंतर गतिशील रहेंगे।

प्रिय विद्यार्थियो,

7. यह दीक्षांत का अवसर आपके जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस अवसर पर आपको स्वयं से प्रश्न करना चाहिए - आप अपनी शिक्षा और ज्ञान का उपयोग किसके लिए करेंगे? केवल अपने लिए, अपने परिवार के लिए, या समाज और राष्ट्र के लिए भी? मेरा मानना है कि जब आप अपने कार्यक्षेत्र में राष्ट्र और समाज के हित को सर्वोपरि रख कर आगे बढ़ेंगे तब देश और समाज के साथ-साथ आपकी भी प्रगति होगी। उस प्रगति से आपको असीम संतोष मिलेगा।

8. आपकी शिक्षा तभी सार्थक होगी जब उससे देश और समाज को लाभ पहुंचेगा। यदि आप इंजीनियर बन रहे हैं, तो ऐसी तकनीक विकसित करें जो लोगों के जीवन को बेहतर बनाएं। यदि आप चिकित्सक बन रहे हैं, तो चिकित्सा को केवल profession नहीं, सेवा मानें। यदि आप वैज्ञानिक के रूप में कार्य करें, तो मानवता के हित में समस्याओं का समाधान निकालें। यदि आप कलाकार या साहित्यकार हैं, तो अपनी कला और सृजन से समाज की संवेदनशीलता को समृद्ध करें। यदि आप उद्यमी बन रहे हैं, तो केवल धन नहीं, रोजगार और अवसर का भी सृजन करें। यदि आप शिक्षक बनाना चाहते हैं, तो ऐसी युवा पीढ़ी तैयार करने पर बल दें जो विरासत और विकास को साथ लेकर चले। यदि आप सार्वजनिक जीवन में जा रहे हैं, तो पद को अधिकार नहीं, उत्तरदायित्व समझें।

प्यारे विद्यार्थियो,

9. आज हर क्षेत्र में technological changes बहुत तेज गति से हो रहे हैं। Technology को अपनाते समय आपको विवेकवान होना चाहिए। आपको यह याद रखना चाहिए कि Artificial Intelligence समाधान दे सकता है, लेकिन सही प्रश्न पूछना आपका कर्तव्य है। तकनीक आपको गति दे सकती है, लेकिन यह तय करना आपका काम है कि आपको किस दिशा में जाना है। डेटा आपको सूचना दे सकता है, लेकिन उस सूचना का नैतिक उपयोग कैसे करना है यह निर्णय आपको ही करना है। 10. आप जैसे शिक्षित लोगों से अपेक्षा की जाती है कि आप संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता के आदर्श को अपने जीवन और कार्यक्षेत्र में अपनाएंगे। आपकी मानवीय मूल्यों और संवैधानिक आदर्शों के प्रति निष्ठा और समर्पण की भावना से भारत का लोकतंत्र मजबूत होगा।

प्रिय विद्यार्थियो,

11. आप अपने जीवन में सफल होंगे, लेकिन कभी-कभी असफलताओं का भी सामना करना पड़ेगा। उस समय यह मत सोचिए कि असफलता ने आपका रास्ता रोक दिया है। आप प्रश्न पूछिये, चिंतन करिए, प्रयोग कीजिए, सफलता अवश्य मिलेगी। लेकिन जब आप सफलता की सीढ़ियां चढ़ रहे हों, तब अपने पीछे देखना न भूलें। माता-पिता, शिक्षकों और उन मित्रों को याद रखिए, जिन्होंने कठिन समय में आपका साथ दिया, उस समाज को याद रखिए, जिसने आपको अवसर दिया। सफलता का सबसे सुंदर रूप वही है, जिसमें व्यक्ति ऊपर उठता है, लेकिन अपनी जड़ों से अलग नहीं होता।

12. वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के राष्ट्रीय लक्ष्य को लेकर देशवासी आगे बढ़ रहे हैं।

 ऐसा भारत जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं सभी तक पहुंचे,

 ऐसा भारत जहां विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग मानव- कल्याण के लिए हो,

 ऐसा भारत जहां अवसरों की समानता हो,

 ऐसा भारत जहां महिलाओं और युवाओं की पूरी क्षमता का उपयोग हो, और

 ऐसा भारत जहां प्रत्येक नागरिक को सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिले।

इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में विश्वविद्यालयों और आप जैसे युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। मुझे विश्वास है कि आप अपने कार्यों से गुजरात का गौरव बढ़ाएंगे और अपने योगदान से भारत का भविष्य उज्ज्वल बनायेंगे।

13. मेरी शुभकामनाएं आप सभी के साथ हैं।

धन्‍यवाद,
जय हिन्‍द!
जय भारत!

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