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Speeches

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द द्वारा बैरिस्टर नरेन्द्रजीत सिंह स्मृति व्याख्यान

कानपुर : 14.02.2018
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भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द द्वारा बैरिस्टर नरेन्द्रजीत सिंह स्मृति

1. इस क्षेत्र के सजग और विशिष्ट नागरिकों से भरे हुए इस सभागार में मुझे कई परिचित चेहरे दिखाई पड़ रहे हैं। आप सब के बीच यहां आकर मैं बहुत खुशी का अनुभव कर रहा हूं।

2.मेरे लिए यह कॉलेज,यह परिसर, भी जाना-पहचाना है। आज यहां के विधि-भवन का लोकार्पण करके मुझे प्रसन्नता हुई है। इस अवसर पर बैरिस्टर नरेन्द्रजीत सिंह की स्मृति में इस व्याख्यान का आयोजन करने के लिए मैं सभी आयोजकों को बधाई देता हूं।

3.इस कानपुर क्षेत्र से जुड़ी अनेक विशेषताओं में, यहां के इतिहास से जुड़े आजादी की लड़ाई के अध्याय विशेष गौरवशाली हैं। नाना साहब और तात्या टोपे से लेकर चन्द्र शेखर आजाद, गणेश शंकर विद्यार्थी और झण्डा गीत लिखने वाले कवि श्याम लाल पार्षद ने निडरता, देशप्रेम और बलिदान के बहुत ही ऊंचे आदर्श स्थापित किए हैं।

4.हमारी आजादी की लड़ाई और समाज के नव-निर्माण में वकीलों की बहुत ही बड़ी भूमिका रही है। बैरिस्टर मोहनदास करमचंद गांधी की, बैरिस्टर से महात्मा बनने तक की यात्रा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। गांधी जी की पीढ़ी से थोड़ा पहले ही, वकालत करते हुए समाज को योगदान देने की सराहनीय परंपरा शुरू हो चुकी थी, जो उनकी पीढ़ी में और भी मजबूत हुई। राय बहादुर विक्रमाजीत सिंह, जिनकी स्मृति में यह कॉलेज संचालित है, भी गांधी जी की पीढ़ी के ही थे। उन्होने भी वकालत, राजनीति और व्यापार से जुड़े रहकर समाज और संस्कृति को योगदान देने के लिएब्रह्मावर्त सनातन धर्म महामंडल की स्थापना की। मुझे बताया गया है कि यह महामंडल एक सौ सात साल पहले स्थापित किया गया था। इसके तहत कई शिक्षण संस्थान खोले गए। मैं भी इसी महामंडल द्वारा स्थापित और संचालित बी.एन.एस.डी. कॉलेज का विद्यार्थी रहा हूं।

5.इस महाविद्यालय में दीनदयाल उपाध्याय जी विद्यार्थी हुआ करते थे। मुझे बताया गया है कि सन 1937 से 1939 तक इसी कॉलेज के छात्रावास में रहकर उन्होने अपनी बी. ए. की पढ़ाई पूरी की, और प्रथम श्रेणी के साथ स्नातक की उपाधि प्राप्त की। उनके राजनैतिक जीवन की बुनियाद इसी कॉलेज में उनके विद्यार्थी जीवन के दौरान पड़ी। आधुनिक भारत के चिंतन और राजनीति कोएकात्म-मानव-वाद औरअंत्योदय जैसे आदर्शों से समृद्ध करने वाले दीनदयाल उपाध्याय, भारत की गौरवशाली संस्कृति के एक महान प्रतिनिधि के रूप में अमर हो गए हैं। उनका यहां का पूर्व छात्र होना इस महाविद्यालय के लिए बहुत ही गौरव की बात है।

6.मैं आशा करता हूं कि इस कॉलेज में शुरू किए जा रहे पांच साल केइंटीग्रेटेड लॉ कोर्सकी पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी और अन्य सभी संकायों के विद्यार्थी इस कॉलेज की प्रतिष्ठा को बढ़ाएंगे। कानून की पढ़ाई विद्यार्थियों को समाज को योगदान देने के लिए विशेष रूप से सक्षम बनाती है। कानून और कानून से जुड़ी प्रक्रियाओं की सामाजिक बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यहां देश की न्याय व्यवस्था से जुड़े लोग भी उपस्थित हैं। यह सभी को मालूम है कि हमारे देश की व्यवस्था में जन-साधारण के लिए न्याय प्रक्रिया लंबी, जटिल और महंगी है।

7.देश की न्याय व्यवस्था से जुड़कर मैंने भी गरीब लोगों के न्याय पाने के संघर्ष को नजदीक से देखा है। न्याय पालिका ही सबका सहारा होती है। गरीबों के लिए न्याय-प्रक्रिया में होने वाले विलंब का बोझ बहुत भारी पड़ता है। लेकिन भारत की न्याय-प्रणाली पर लोगों की आस्था बनी हुई है। न्याय-प्रक्रिया में विलंब के कारण होने वाले अन्याय को दूर करने के लिए न्यायिक सुधार लाने के लिए हम सबको निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।

8.मुझे यह जानकारी आप सबके साथ साझा करने में खुशी हो रही है कि लंबित मामलों का शीघ्रता से निपटारा करने के लिए कई उच्च न्यायालय प्रभावी कदम उठा रहे हैं।

9.विलंब के अलावा एक और गंभीर समस्या यह है कि न्याय पाने के लिए जो गरीब मुवक्किल पैसा खर्च करता है और जिसके लिए पूरी प्रक्रिया सबसे अधिक महत्वपूर्ण है वही इस प्रक्रिया के बारे में कुछ भी नहीं जान पाता है। वह पूरी तरह से अपने वकील या अन्य लोगों पर आश्रित रहता है। निचली अदालतों में तो स्थानीय भाषाओं में काम होता है लेकिन उच्च-न्यायालयों में अंग्रेजी में ही काम होने का चलन है।

10.उच्च-न्यायालयों द्वारा निर्णयों और आदेशों की सत्य प्रतिलिपि का स्थानीय भाषा में अनुवाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था होनी चाहिए। मुझे आप सबको यह बताने में खुशी हो रही है कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने अंग्रेजी में दिए गए निर्णयों और आदेशों के साथ-साथ उनके हिन्दी अनुवाद भी उपलब्ध कराने की नई शुरुआत कर दी है। अन्य कई उच्च न्यायालय भी इस दिशा में आगे बढ़ रहे है।

11.मुझे उम्मीद है कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी जब देश की न्याय-व्यवस्था से जुड़ेंगे तो जरूरतमंदों और गरीबों को यथोचित न्याय उपलब्ध कराने में अपना योगदान देंगे। मैं आशा करता हूं कि यहां के सभी विभागों के विद्यार्थी भी शिक्षा के साथ-साथ, यहां के प्रबुद्ध नागरिकों से मार्गदर्शन प्राप्त करके समाज और देश को बेहतर बनाने के लिए प्रयास करेंगे।

12.मैं एक बार फिर इस स्मृति व्याख्यान के आयोजकों को बधाई देता हूं।

धन्यवाद

जय हिन्द!

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