भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का ‘विश्व नव निर्माण हेतु आध्यात्मिक जागरण’ के शुभारंभ, ‘ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस’ के उद्घाटन और ‘विकसित भारत के लिए युवा: राष्ट्र निर्माण के लिए आंतरिक शक्ति की जागृति’ के वर्चुअल शुभारंभ के अवसर पर सम्बोधन

बडोदरा : 23.09.2026

डाउनलोड : भाषण भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का  ‘विश्व नव निर्माण हेतु आध्यात्मिक जागरण’ के शुभारंभ, ‘ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस’ के उद्घाटन और ‘विकसित भारत के लिए युवा: राष्ट्र निर्माण के लिए आंतरिक शक्ति की जागृति’ के वर्चुअल शुभारंभ के अवसर पर सम्बोधन(हिन्दी, 145.91 किलोबाइट)

आज अध्यात्म और युवा जागरण से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का शुभारंभ करने के अवसर पर आप सब के बीच उपस्थित होकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है।

वर्तमान विश्व परिदृश्य में तनाव, चिंता, हिंसा, असहिष्णुता और सामाजिक विभाजन जैसी चुनौतियां व्याप्त हैं। अनेक क्षेत्रों में अशांति का वातावरण है। ऐसी परिस्थियों में ध्यान, आत्मचिंतन, करुणा और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देने वाले प्रयोजन महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

आज केवल आर्थिक विकास नहीं, बल्कि मानवीय विकास की भी आवश्यकता है। ऐसी शिक्षा जो केवल बुद्धि को विकसित न करे, बल्कि विवेक को भी जागृत करे। ऐसी प्रगति जिसमें प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता हो। ऐसी शक्ति चाहिए जो दूसरों पर नियंत्रण करने के बजाय स्वयं पर नियंत्रण करना सिखाए। हमें ऐसी आध्यात्मिकता चाहिए जो मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती हो। यह प्रसन्नता का विषय है कि ब्रह्मा कुमारीज़ संस्था ने ध्यान और आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से व्यक्तिगत परिवर्तन तथा विश्व नवीनीकरण का संदेश भारत ही नहीं, बल्कि विश्व के अनेक देशों तक पहुंचाया है।

देवियो और सज्जनो,

हर मनुष्य के भीतर परिवर्तन की संभावना रहती है। यदि किसी व्यक्ति के भीतर यह विश्वास जागे कि विचारों और कर्मों को बदलने से उसका जीवन बदल सकता है, यदि उसके जीवन में आशा और आत्मसम्मान वापस आए तो वह केवल उस व्यक्ति में नहीं, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनेगा। मुझे बताया गया है कि वडोदरा सेंट्रल जेल में पिछले लगभग 30 वर्ष से ब्रह्मा कुमारीज़ संस्था द्वारा बंदियों तक आध्यात्मिक ज्ञान और सकारात्मक जीवन-दृष्टि पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है।

आज ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस का उद्घाटन करके मुझे बहुत खुशी हो रही है। मेरी कामना है कि यह एक ऐसा स्थान बने, जहां समाज के विभिन्न वर्गों के लोग एक-दूसरे के साथ शांति और सद्भाव से जुड़ सकें।

देवियो और सज्जनो,

आज यहां से मुझे लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जन्मस्थली नडियाड में ‘विकसित भारत के लिए युवा: राष्ट्र निर्माण के लिए आंतरिक शक्ति की जागृति’ कार्यक्रम का उद्घाटन करके अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। मेरे लिए यह सौभाग्य की बात है कि कल केवड़िया में उनकी प्रतिमा के समीप राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में भाग लेने का अवसर मिला और आज वर्चुअल माध्यम से उनके जन्म स्थान पर युवा जागृति और राष्ट्र निर्माण से जुड़े कार्यक्रम के शुभारंभ का अवसर मिल रहा है। सरदार पटेल ने राष्ट्र सेवा के जो उदाहरण देशवासियों के सामने प्रस्तुत किए हैं वे सभी देशवासियों, विशेषकर युवाओं, के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।

जब युवा अपने विचारों, भावनाओं और कर्मों को सकारात्मक दिशा देते हैं, तब उसका प्रभाव परिवार, कार्यस्थल, समुदाय और अंततः पूरे राष्ट्र पर पड़ता है। इसलिए “Awakening Inner Strength” केवल एक व्यक्तिगत विकास का संदेश नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक गहरी प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में जागृत चेतन वाला युवा अपनी प्रतिभा, ऊर्जा और मूल्यों को विकसित भारत के निर्माण में समर्पित करता है।

युवाओं को सशक्त, संस्कारवान, आत्मनिर्भर, शांतिपूर्ण और जिम्मेदार बनाना हम सब की ज़िम्मेदारी है। हमें ऐसे युवा तैयार करने हैं जो ज्ञान, तकनीक और कौशल से युक्त हों। साथ ही वे आत्मविश्वास, आत्म-अनुशासन, सकारात्मक सोच, संवेदनशीलता और नैतिक मूल्यों से भी परिपूर्ण हों।

युवा पीढ़ी के सामने असीमित अवसरों के साथ अनेक चुनौतियां भी हैं। डिजिटल दुनिया, सूचना की अधिकता, प्रतिस्पर्धा, बदलती जीवनशैली और सामाजिक अपेक्षाएं युवाओं के मन पर विपरीत प्रभाव डाल सकती हैं। इसलिए उनमें आंतरिक शक्ति का विकास अर्थात आत्म-जागरूकता, आत्म-विश्वास, एकाग्रता, भावनात्मक संतुलन, सकारात्मक दृष्टिकोण और आत्म-अनुशासन का विकास महत्वपूर्ण है। इस संदर्भ में ब्रह्मा कुमारीज़ जैसी संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।

देवियो और सज्जनो,

भारत ने विश्व को योग, ध्यान, अहिंसा, करुणा और “वसुधैव कुटुम्बकम्” जैसी महान जीवन-दृष्टि दी है। आधुनिक भारत की युवा शक्ति इस आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक विज्ञान, तकनीक और नई सोच के साथ जोड़कर विश्व के सामने एक नया विकास मॉडल प्रस्तुत कर सकती है। इससे न केवल भारत का विकास होगा, बल्कि सम्पूर्ण मानवता का कल्याण होगा।

भारत की आध्यात्मिक परंपरा में मानवता की सेवा को ही सच्ची सेवा माना गया है। आत्म-परिवर्तन को समाज-परिवर्तन का आधार माना गया है। आज आवश्यकता है कि हम अपनी इस महान विरासत को आधुनिक जीवन की आवश्यकताओं के साथ जोड़ें। हमारा लक्ष्य ऐसे भारत का निर्माण होना चाहिए जो आर्थिक रूप से समृद्ध हो, वैज्ञानिक रूप से शक्तिशाली हो, सामाजिक रूप से समावेशी हो और आध्यात्मिक रूप से जागृत हो।

हम भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हमें ऐसे युवा शक्ति की आवश्यकता है जो ईमानदारी, जिम्मेदारी, करुणा, सह-अस्तित्व और राष्ट्रप्रेम से प्रेरित हो। मुझे विश्वास है कि ऐसी युवा शक्ति के निर्माण के लिए आप सब निरंतर प्रयासरत रहेंगे। मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

धन्यवाद,
जय हिन्द!
जय भारत!

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