भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का सिक्किम विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में संबोधन

गंगटोक : 27.05.2026

डाउनलोड : भाषण भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का  सिक्किम विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में संबोधन(हिन्दी, 123.71 किलोबाइट)

सिक्किम विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में आप सब के बीच उपस्थित होकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। मैं आज उपाधि और पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देती हूं।

यह सभी देशवासियों, विशेषकर सिक्किम के लोगों के लिए गर्व का विषय है कि सिक्किम अब पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री श्री प्रेम सिंह तामांग, सरकार में उनके सहयोगियों और सिक्किम के सभी निवासियों को हार्दिक बधाई देती हूं।

दीक्षांत समारोह का यह अवसर, इस विश्वविद्यालय तथा उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आज विद्यार्थियों, उनके माता-पिता और शिक्षकों, सभी का परिश्रम फलीभूत हुआ है। सभी विद्यार्थी एक नए जीवन की शुरुआत कर रहे हैं। मुझे विश्‍वास है कि इस विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों को हर परिस्थिति का सामना करने के लिए सक्षम बनाया है।

मुझे बताया गया है कि इस दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में लगभग 60 प्रतिशत और पदक विजेताओं में लगभग 70 प्रतिशत बेटियां हैं। मैं इन सभी बेटियों को बहुत-बहुत बधाई देती हूं। यह उपलब्धि न केवल हमारी बेटियों की प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प का परिचायक है, बल्कि यह शिक्षा के माध्यम से महिला सशक्तीकरण का प्रभावशाली उदाहरण भी है। बेटियों को आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें और वे देश के विकास की गाथा में पूर्ण रूप से भागीदारी कर सकें, यह सुनिश्चित करना पूरे समाज का कर्तव्य है।

देवियो और सज्जनो,

प्रकृति की गोद में बसा सिक्‍किम, अपनी प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और जैव-विविधता के लिए विशिष्ट पहचान रखता है। हिमालय की सबसे ऊंची चोटियों में से एक, कंचनजंगा, सिक्‍किम को प्रकृति का अमूल्‍य उपहार है। इस चोटी को सिक्किम के लोग अपनी रक्षा करने वाली देवी मानते हैं। उनमें प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन के प्रति जिम्‍मेदारी की भावना दिखाई देती है।

इस राज्य के लिए यह बड़े गर्व की बात है कि सिक्किम 2016 में भारत का पहला पूर्णतः जैविक राज्य बना। सिक्किम ने यह साबित किया है कि विकास और प्रकृति के संरक्षण का समन्वय किया जा सकता है। प्लास्टिक पर नियंत्रण, जैविक खेती को बढ़ावा और पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्य पूरे देश के लिए प्रेरणादायक हैं। यदि हर व्यक्ति अपने आसपास की स्वच्छता, प्रकृति और समाज के प्रति जिम्मेदार बने, तो देश तेजी से प्रगति कर सकता है।

देवियो और सज्जनो,

हिमालय की गोद में स्थित होने के कारण सिक्किम विश्वविद्यालय की विशेष जिम्मेदारी बनती है। इसे केवल शिक्षा और शोध के केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की भाषा, संस्कृति और पर्यावरण के संरक्षण की दिशा में भी विशेष प्रयास करना है। मुझे प्रसन्नता है कि इस विश्वविद्यालय द्वारा आधुनिक शिक्षा को स्थानीय परंपराओं, ecological consciousness और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ जोड़ा जाता है। यही विद्यार्थियों को समग्र विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का उचित मार्ग है। मुझे बताया गया है कि यह विश्वविद्यालय एकमात्र ऐसा केंद्रीय संस्थान है, जहां पीएच. डी. स्तर तक लिंबू, लेप्चा और भूटिया पाठ्यक्रम के अध्ययन एवं अनुसंधान की व्यवस्था है। यहां हिमालयी क्षेत्र में cryosphere dynamics, climate change के प्रभावों तथा उनसे उत्पन्न संभावित खतरों के संदर्भ में glaciers पर अध्ययन एवं अनुसंधान किए जा रहे है।

भाषाएं, क्षेत्र और समाज की संस्कृति, परंपरा और इतिहास को संजोकर रखती हैं। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि इस क्षेत्र की लुप्तप्राय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए सिक्किम विश्वविद्यालय में Centre for Endangered Languages की स्थापना की गई है। इस Centre से यह अपेक्षा की जाती है कि वह सिक्किम और उत्तरी बंगाल की लुप्तप्राय भाषाई परंपराओं के conservation, documentation और revitalization में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

प्यारे विद्यार्थियो,

North-East का विकास, देश की समग्र प्रगति के लिए अनिवार्य है। पूर्वोत्तर क्षेत्र का विकास और राष्ट्रीय विकास के लक्ष्य आपस में जुड़े हुए हैं। यहां के युवाओं में असीम प्रतिभा है। इस संस्थान में सिक्किम सहित अन्य राज्यों से आये हुए विद्यार्थियों से मैं आग्रह करती हूं कि आप सब एक दूसरे के संपर्क में रहें और मिलजुल कर राष्ट्रीय विकास में योगदान देने की भावना से आगे बढ़ें। आप अपनी योग्यता और निष्ठा के बल पर वंचित वर्गों के लोगों के जीवन को बेहतर बना सकते हैं। इस प्रकार आप समावेशी विकास में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

आज के युग में नई-नई जरूरतें सामने आ रही हैं जिनके समाधान युवा पीढ़ी को निकालने हैं। आपको latest technologies का उपयोग करते हुए दूरदर्शी सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। कुछ बातों को यदि आप ध्यान में रखेंगे तो आप हर परिस्थिति का सामना कर पाएंगे।

 पहली बात - अपनी क्षमता पर हमेशा पूरा विश्वास रखें।

 दूसरी बात - आप दूसरों के अनुभव और ज्ञान से हमेशा सीख लें। जहां से भी हो सके, ज्ञान और कौशल अर्जित करते रहना चाहिए।

 तीसरी बात - Isolation में नहीं collaboration से आगे बढ़ें। Team spirit हमेशा सहायक होती है। आप सब तो इतने अच्छे संस्थान से शिक्षा लेकर जा रहे हैं। कोशिश करके समान लक्ष्यों वाले युवा अपने groups बना लें और मिलकर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करें। इससे आप resources का भी सही उपयोग कर पाएंगे और अपने ideas को और अधिक बड़े पैमाने पर कार्यरूप दे पाएंगे।

 चौथी बात - मैं यह कहना चाहूंगी कि अपने लक्ष्यों को prioritise करें। short term और long term goals तय करें और उन्हें achieve करने की strategy भी बनाएं। Short term goals आपको हर दिन motivated रखेंगे और इनसे आपको long term goals को achieve करने में मदद भी मिलेगी।

शिक्षा आत्मनिर्भरता का महत्वपूर्ण साधन है। आप अपनी शिक्षा के बल पर सक्षम बनें और देश तथा समाज की भलाई के लिए कार्य करें। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लक्ष्य की ओर हम आगे बढ़ रहे हैं। मुझे विश्वास है कि आप जिस क्षेत्र में भी कार्य करेंगे Efficiency, Equity और Sustainability के मूल्यों को आत्मसात करते हुए आगे बढ़ेंगे। आप सबके उज्ज्वल भविष्य और सार्थक जीवन के लिए मैं आपको शुभकामनाएं देती हूं।

धन्यवाद, 
जय हिंद!
जय भारत!

समाचार पत्रिका के लिए सदस्यता लें

सदस्यता का प्रकार
वह न्यूज़लेटर चुनें जिसकी आप सदस्यता लेना चाहते हैं।
सब्सक्राइबर का ईमेल पता