भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का नुआखाई महोत्सव के अवसर पर आयोजित ‘युवा प्रबोधन’ एवं ‘सेवा सम्मान पर्व’ में सम्बोधन
रायपुर : 22.10.2026
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आज नुआखाई मिलन समारोह में आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक समारोह नहीं है, बल्कि हमारी समृद्ध परंपराओं, आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता का उत्सव है। ऐसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जुड़ने, सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने और आने वाली पीढ़ियों तक भारतीय जीवन-मूल्यों को पहुँचाने का अवसर प्रदान करते हैं।
नुआखाई पर्व हमारी कृषि परंपरा को संजो कर रखने, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और सामुदायिक भावनाओं का उत्सव है। नई फसल के आगमन पर अन्न देवता को सम्मान देना और परिवार तथा समाज के साथ खुशियों को बांटना इस पर्व का मूल उदेश्य है। यह उत्सव हमें याद दिलाता है कि अन्न केवल हमारी भूख मिटाने का साधन नहीं है, बल्कि किसान भाई-बहनों के परिश्रम, धरती की उदारता और प्रकृति के अनमोल उपहार का प्रतीक भी है। अन्न का सम्मान करना, किसानों के योगदान को स्वीकार करना और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना हम सब का दायित्व है।
देवियो और सज्जनो,
आज के इस आयोजन में भारी संख्या में युवाओं की उपस्थिति देखकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। जिज्ञासु, संस्कारी, संकल्पित, संवेदनशील और कर्मठ युवा अपने प्रयासों से देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सक्षम होंगे। आप जैसे युवा भारत के भविष्य निर्माता हैं।
प्रिय युवाओं,
आज आपके सामने असीमित अवसर उपलब्ध हैं। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, उद्यमशीलता, खेल, कला, कृषि और सामाजिक सेवा, हर क्षेत्र में आप अपनी प्रतिभा का उपयोग कर सकते हैं। मेरा मानना है कि आपको कुछ संकल्पों के साथ जीवन में आगे बढ़ना चाहिए। इससे आप अवसरों का उचित लाभ उठा सकेंगे।
पहला संकल्प है आजीवन सीखते रहने का संकल्प। पुस्तकें पढ़िए, प्रश्न पूछिए, नई तकनीक को समझिए और अपने कौशल को विकसित कीजिए। सीखने की इच्छा व्यक्ति को प्रगतिशील बनाती है।
दूसरा संकल्प है चुनौतियों का डट कर सामना करने का संकल्प। जीवन में कभी सफलता मिलती है कभी असफलता। लेकिन असफलता हताश होने का अवसर नहीं होता है। यह अपनी कमियों को पहचानने, उसे सुधारने और नए उत्साह के साथ फिर से कार्य में लग जाने का अवसर होता है। दृढ़ संकल्प और परिश्रम के बल पर आप किसी भी चुनौती पर विजय प्राप्त कर सकते हैं।
तीसरा संकल्प है अपनी सफलता को समाज की प्रगति से जोड़ने का संकल्प। अपनी मेधा, ज्ञान और परिश्रम के बल पर व्यक्तिगत उपलब्धि हासिल करना बहुत अच्छी बात है। लेकिन जब आपकी शिक्षा किसी जरूरतमंद के काम आए, आपका ज्ञान किसी समस्या का समाधान हो सके, आपकी प्रतिभा किसी दूसरों को प्रेरित करे और आपकी सफलता से समाज में सकारात्मक परिवर्तन आए, तब उस स्थिति में आपकी उपलब्धि आपको गर्व के साथ-साथ संतोष भी प्रदान करती है।
चौथा संकल्प है अपनी जड़ों को याद रखने का संकल्प। आप सब आधुनिक विज्ञान और तकनीक में आगे बढ़ें, नए विचारों को अपनाएं और विश्व मंच पर प्रतिष्ठा हासिल करें। लेकिन अपनी भाषा, कला-संस्कृति, साहित्य और पारंपरिक ज्ञान का भी सम्मान करें। अपनी परंपराओं के श्रेष्ठ मूल्यों को वर्तमान की आवश्यकताओं से जोड़ें और अगली पीढ़ियों तक पहुंचाएं। आधुनिकता हमें आगे बढ़ने की शक्ति देती है और संस्कृति हमें जड़ों से जोड़े रखती है। विरासत और विकास के संतुलन में ही वास्तविक प्रगति है।
देवियो और सज्जनो,
आज के समारोह में महिलाओं की भागीदारी देख कर मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। हम वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए हमारी आधी आबादी यानी महिलाओं की समान भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। मैं प्रायः कहती हूं कि नारी और पुरुष एक ही रथ के दो पहिये हैं। दोनों में से कोई भी एक पहिया कमजोर होगा तो रथ आगे नहीं बढ़ेगा। मैं सभी बेटियों-बहनों से आग्रह करूंगी कि वे देश और समाज के कार्यों में बढ़-चढ़ कर भागीदारी करें। जब आप आगे बढ़ेंगे तो उसका लाभ केवल आपको या आपके परिवार को ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र को भी मिलेगा। मैं पुरुषों, विशेषकर युवाओं, से अपील करूंगी कि आप अपनी बहनों-बेटियों को ऐसा वातावरण प्रदान करें जिसमें वे बिना किसी रुकावट के अपने सपनों को साकार कर सकें। महिलाओं के प्रति सम्मान केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार, सोच और दैनिक आचरण में दिखाई देना चाहिए।
देवियो और सज्जनो,
परिस्थितियाँ अलग हो सकती हैं, चुनौतियाँ अलग हो सकती हैं। लेकिन प्रत्येक युवा के भीतर कुछ नया करने, कुछ बेहतर बनाने और अपनी पहचान स्थापित करने की ललक होनी चाहिए। मुझे विश्वास है कि जब भारत का युवा ज्ञान के साथ विनम्रता, महत्वाकांक्षा के साथ नैतिकता और सफलता के साथ सेवा-भाव को अपनाएगा, तब विकसित भारत का संकल्प और अधिक मजबूत होगा।
मेरा मानना है कि जब हम अपने व्यक्तिगत प्रयासों को सामूहिक और राष्ट्रीय लक्ष्यों से जोड़ते हैं, तब देश की प्रगति का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। यहां उपस्थित युवाओं से मैं कहना चाहूंगी कि अपने सपनों को ऊँचा रखिए, अपने विचारों को व्यापक बनाइए, अपने आचरण को श्रेष्ठ रखिए और अपने मनोमस्तिष्क में समाज तथा राष्ट्र के प्रति सेवा-भाव बनाए रखिए। जीवन में आप जो भी कार्य करें उसे ईमानदारी, निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ करें। राष्ट्र का निर्माण केवल बड़े निर्णयों से नहीं होता। वह करोड़ों नागरिकों के छोटे-छोटे ईमानदार प्रयासों से होता है।
यह बहुत ही प्रसन्नता का विषय है कि केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों और अपनी इच्छा-शक्ति के बल पर, आज छत्तीसगढ़ के युवा नक्सलवाद के भटकाव से मुक्त होकर मुख्य धारा में शामिल हो गए हैं। जहां कभी आतंक का अंधेरा था वहां आज विकास का उजियारा फैल रहा है। इससे न केवल युवाओं और उनके परिवारजनों का कल्याण हो रहा है, बल्कि छत्तीसगढ़ और भारत के विकास को भी गति मिल रही है।
मेरी कामना है कि नुआखाई का यह पावन पर्व आप लोगों के जीवन में नई आशा, नई ऊर्जा, सुख-समृद्धि और सद्भाव लेकर आए। पूरा देश कहता है - ‘छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया’। इस उदाहरण को मजबूत करते हुए आप सब समृद्ध छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे, इसी विश्वास के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देती हूं। सब झन ल गाड़ा गाड़ा बधाई आऊ शुभकामना!
धन्यवाद,
जय हिंद!
जय भारत!
