भारत की राष्ट्रपति ने अलचिकि लिपि के शताब्दी समारोह का उद्घाटन किया

राष्ट्रपति भवन : 16.02.2026

भारत की राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज 16 फरवरी, 2026 को नई दिल्ली में संस्कृति मंत्रालय द्वारा आयोजित अलचिकि लिपि के शताब्दी समारोह का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि संथाल समुदाय की अपनी भाषा, साहित्य और संस्कृति है। लेकिन पहले संथाली भाषा की अपनी लिपि नहीं होने के कारण रोमन, देवनागरी, ओड़िआ, बांग्ला आदि लिपियों में इसे लिखा जा रहा था। नेपाल, भूटान, मॉरीशस में रह रहे संताल समुदाय के लोग भी उन देशों में प्रचलित लिपियों में संथाली भाषा लिखा करते थे। इन लिपियों में संथाली भाषा के मूल शब्दों का उच्चारण सही रूप से नहीं हो पा रहा था। वर्ष 1925 में पंडित रघुनाथ मुर्मु ने अलचिकि लिपि का आविष्कार किया। उसके उपरांत संथाली भाषा के लिए अलचिकि लिपि का उपयोग किया जा रहा है। अब अलचिकि लिपि विश्व भर में संताल समुदाय का एक सशक्त परिचय है। यह संताल समुदाय के लोगों के बीच एकता स्थापित करने का एक प्रभावी माध्यम भी है।

राष्ट्रपति ने कहा कि अलचिकि लिपि का शताब्दी वर्ष समारोह इस लिपि को बढ़ावा देने का संकल्प लेने का अवसर है। हिंदी, अंग्रेजी, ओड़िया, बंगला जैसी भाषाओं में बच्चे पढ़ाई करें। लेकिन उसके साथ-साथ अपनी मातृभाषा संताली को अलचिकि लिपि में सीखना उनके लिए अत्यंत आवश्यक है।

राष्ट्रपति ने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि अनेक लेखक अपनी रचनाओं के माध्यम से संथाली साहित्य को समृद्ध करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने लेखकों को अपने लेखन के माध्यम से लोगों को जागृत करने की सलाह दी।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारा भारत देश अनेक भाषाओं का एक उद्यान जैसा ही है। भाषा और साहित्य एक डोर है, जिसके सहारे समुदाय में एकता बनाकर रखी जाती है। विभिन्न भाषाओं के बीच साहित्य के आदान-प्रदान से भाषाएं समृद्ध हो सकती हैं। संथाली भाषा के विद्यार्थियों को अनुवाद के द्वारा अन्य भाषाओं के लेखन से परिचय कराने की आवश्यकता है। इसी प्रकार अनुवाद एवं लेखन कार्य के माध्यम से संथाली साहित्य को अन्य भाषाओं के विद्यार्थियों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

इस अवसर पर, राष्ट्रपति ने अलचिकि के 100 वर्ष पूरे होने पर एक स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी किया। उन्होंने संताल समुदाय के 10 ऐसे व्यक्तियों को भी सम्मानित किया जिन्होंने संताली लोगों में अलचिकि लिपि के व्यापक प्रयोग को बढ़ावा दिया है।

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