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मुगल उद्यान

वृत्ताकार उद्यान (गहरा अथवा तितली उद्यान)

यह उद्यान का सबसे पश्चिमी हिस्सा है। हर एक हीरा है। मनोहारी है। यह एक टेरेसदार कटोरे के समान है जहां स्टॉक, वरबना, मिगनोनेट जैसी सुगंधित प्रजातियां हैं और चारों ओर दीवार से ऊंची-ऊंची डहेलिया की प्रजाती हैं तथा इस वृत्ताकार बाड़े की दीवारों को विभिन्न प्रकार की जासमाइन की प्रजातियां ढके हुए दिखाई देती हैं। इसके बीचों बीच कुंड में छुपा हुआ एक बुलबुलेदार झरना है। इस झरने से उठने वाली मुलायम अनवरत लहरें बाहर की ओर उठती हैं—रंगों के स्थिर लाहरों में रूपांतरित होती हैं—डहेलिया के ऊपर से गुजरती हुई दीवार तक पहुंचती हैं और इसके बाद असीम आकाश की गुमनामी में खो जाती हैं जबकि उसकी खुशबू हैरत में पड़े हुए दर्शक तक पहुंच जाती है। इस सबसे बेखबर तितलियां निरंतर फड़फड़ाती रहती हैं। कभी-कभार कोई मोर अपने संगी को बुलाने की तीखी आवाज अथवा एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर अपनी धीमी उड़ान से वातावरण की तंद्रा भंग कर देता है।

वृत्ताकार उद्यान के चारों ओर बागवानी विशेषज्ञ कार्यालय के कमरे, एक ग्रीन हाउस, भंडार, पौधशाला आदि हैं। यहीं पर हमारे देश में सबसे अच्छी बोनसाई की प्रजातियों का भी संग्रह है।

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